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सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा – काका हाथरसी
सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा काका हाथरसी सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा हम भेड़-बकरी इसके यह गड़ेरिया हमारा सत्ता की खुमारी में, आज़ादी सो रही है हड़ताल क्यों है इसकी पड़ताल हो रही है लेकर के कर्ज़ खाओ यह फर्ज़ है तुम्हारा सारे जहाँ से अच्छा है इंडिया हमारा. चोरों व…
गुनाहों के देवता (उपन्यास) – भाग 7
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 7 जब चन्दर पम्मी के बँगले पर पहुँचा तो शाम होने में देर नहीं थी। लेकिन अभी फर्स्ट शो शुरू होने में देरी थी। पम्मी गुलाबों के बीच में टहल रही थी और बर्टी एक अच्छा-सा सूट पहने लॉन पर बैठा था और घुटनों पर ठुड्डी रखे…
इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है-द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
इतने ऊँचे उठो कि जितना उठा गगन है। द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी देखो इस सारी दुनिया को एक दृष्टि से सिंचित करो धरा, समता की भाव वृष्टि से जाति भेद की, धर्म-वेश की काले गोरे रंग-द्वेष की ज्वालाओं से जलते जग में इतने शीतल बहो कि जितना मलय पवन है॥ नये हाथ से, वर्तमान का…
बाकी बच गया अण्डा (कविता ) – बाबा नागार्जुन
बाकी बच गया अण्डा प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो अलग हो गया उधर एक, अब…
गुनाहों के देवता – उपन्यास – भाग 2
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 2 सिविल लाइन्स के एक उजाड़ हिस्से में एक पुराने-से बँगले के सामने आकर मोटर रुकी। बँगले का नाम था ‘रोजलान’ लेकिन सामने के कम्पाउंड में जंगली घास उग रही थी और गुलाब के फूलों के बजाय अहाते में मुरगी के पंख बिखरे पड़े थे। रास्ते पर भी घास…
देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
देश कागज पर बना नक्शा नहीं होता हिंदी कविता – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में आग लगी हो तो क्या तुम दूसरे कमरे में सो सकते हो? यदि तुम्हारे घर के एक कमरे में लाशें सड़ रहीं हों तो क्या तुम दूसरे कमरे में प्रार्थना कर सकते हो? यदि…
