पुनः नया निर्माण करो- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
पुनः नया निर्माण करो – हिंदी कविता द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगे, नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों…
