व्यंग्य मत बोलो – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
व्यंग्य मत बोलो – हिंदी कविता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना व्यंग्य मत बोलो। काटता है जूता तो क्या हुआ पैर में न सही सिर पर रख डोलो। व्यंग्य मत बोलो। अंधों का साथ हो जाये तो खुद भी आँखें बंद कर लो जैसे सब टटोलते हैं राह तुम भी टटोलो। व्यंग्य मत बोलो। क्या रखा…
