Similar Posts
हम सब सुमन एक उपवन के – द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
हम सब सुमन एक उपवन के – हिंदी कविता द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी हम सब सुमन एक उपवन के एक हमारी धरती सबकी जिसकी मिट्टी में जन्मे हम मिली एक ही धूप हमें है सींचे गए एक जल से हम। पले हुए हैं झूल-झूल कर पलनों में हम एक पवन के हम सब सुमन एक…
गुनाहों के देवता (उपन्यास) – भाग 4
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 4 चन्दर स्टडी-रूम में गया और मेज पर बैठ गया। कोट उतारकर उसने खूँटी पर टाँग दिया और नक्शा देखने लगा। पास में एक छोटी-सी चीनी की प्याली में चाइना इंक रखी थी और मेज पर पानी। उसने दो बूँद पानी डालकर चाइना इंक घिसनी शुरू की, इतने…
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ – निदा फ़ाज़ली
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ – निदा फ़ाज़ली बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी माँ याद आती है चौका-बासन चिमटा फुकनी जैसी माँ बाँस की खुर्री खाट के ऊपर हर आहट पर कान धरे आधी सोई आधी जागी थकी दोपहरी जैसी माँ चिड़ियों के चहकार में गूंजे राधा-मोहन…
फ़र्ज़ करो / इब्ने इंशा
फ़र्ज़ करो इब्ने इंशा फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई हो फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों…
बाकी बच गया अण्डा (कविता ) – बाबा नागार्जुन
बाकी बच गया अण्डा प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो अलग हो गया उधर एक, अब…
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती- हरिवंश राय बच्चन
कोशिश करने वालों की हार नहीं होती – कविता KOSHISH KARNE WALO KI HAR NAHI HOTI -HARIWANSH RAI BACHHAN (नोट-कई लोग इस रचना को हरिवंशराय बच्चन जी द्वारा रचित मानते हैं। लेकिन श्री अमिताभ बच्चन ने अपनी एक फ़ेसबुक पोस्ट में स्पष्ट किया है कि यह रचना सोहनलाल द्विवेदी जी की है) लहरों से डर कर नौका पार नहीं…
