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व्यंग्य मत बोलो – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
व्यंग्य मत बोलो – हिंदी कविता सर्वेश्वर दयाल सक्सेना व्यंग्य मत बोलो। काटता है जूता तो क्या हुआ पैर में न सही सिर पर रख डोलो। व्यंग्य मत बोलो। अंधों का साथ हो जाये तो खुद भी आँखें बंद कर लो जैसे सब टटोलते हैं राह तुम भी टटोलो। व्यंग्य मत बोलो। क्या रखा…
रोने वाला ही गाता है – गोपालदास “नीरज” (Gopaldas Neeraj)
रोने वाला ही गाता है (कविता) – गोपालदास “नीरज”(Gopaldas Neeraj) रोने वाला ही गाता है ! मधु-विष हैं दोनों जीवन में दोनों मिलते जीवन-क्रम में पर विष पाने पर पहले मधु-मूल्य अरे, कुछ बढ़ जाता है। रोने वाला ही गाता है ! प्राणों की वर्त्तिका बनाकर ओढ़ तिमिर की काली चादर जलने वाला दीपक ही…
गुनाहों के देवता (उपन्यास) – भाग 4
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 4 चन्दर स्टडी-रूम में गया और मेज पर बैठ गया। कोट उतारकर उसने खूँटी पर टाँग दिया और नक्शा देखने लगा। पास में एक छोटी-सी चीनी की प्याली में चाइना इंक रखी थी और मेज पर पानी। उसने दो बूँद पानी डालकर चाइना इंक घिसनी शुरू की, इतने…
आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा – गोपालदास “नीरज”(Gopaldas Neeraj)
आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा (कविता) – गोपालदास “नीरज”(Gopaldas Neeraj) आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा जहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा मान-पत्र मैं नहीं लिख सका, राजभवन के सम्मानों का मैं तो आशिक़ रहा जन्म से, सुंदरता के दीवानों का लेकिन था मालूम नहीं ये, केवल…
गुनाहों का देवता (उपन्यास) – भाग 12
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 12 ”यहाँ बहुत रोशनी है! मुझे अपना अँधेरा कमरा ही अच्छा लगता है।” सुधा बोली। ”चलो बिनती, वहीं कार्ड ले चलो!” चन्दर ने कहा, ”आओ सुधा, आज कार्ड लिखते जाएँगे, तुमसे बात करते जाएँगे। जिंदगी देखो, सुधी! आज पन्द्रह दिन से तुमसे दो मिनट बैठकर बात…
पाँव बढ़ाना चलते जाना – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
पाँव बढ़ाना चलते जाना – हिंदी कविता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हँसा ज़ोर से जब, तब दुनिया बोली इसका पेट भरा है और फूट कर रोया जब तब बोली नाटक है नखरा है जब गुमसुम रह गया, लगाई तब उसने तोहमत घमंड की कभी नहीं वह समझी इसके भीतर कितना दर्द भरा है दोस्त कठिन है…
