तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये – बशीर बद्र
तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये (कविता ) – बशीर बद्र TUMHARE NAME KI EK KHUBSURAT SHAM HO JAYE – BASHIR BADRA कभी तो आसमाँ से चांद उतरे जाम हो जाये तुम्हारे नाम की इक ख़ूबसूरत शाम हो जाये हमारा दिल सवेरे का सुनहरा जाम हो जाये चराग़ों की तरह आँखें जलें…
