Home hindi kavita अकाल और उसके बाद (कविता ) – नागार्जुन

अकाल और उसके बाद (कविता ) – नागार्जुन

0
1578

अकाल और उसके बाद

प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन 

 

कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास
कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास

कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त
कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त।

दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद
धुआँ उठा आँगन से ऊपर कई दिनों के बाद

चमक उठी घर भर की आँखें कई दिनों के बाद
कौए ने खुजलाई पाँखें कई दिनों के बाद।

NO COMMENTS

Leave a Reply