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अकाल और उसके बाद (कविता ) – नागार्जुन
अकाल और उसके बाद प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त। दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ…
तुम कितनी सुन्दर लगती हो
तुम कितनी सुन्दर लगती हो धर्मवीर भारती तुम कितनी सुन्दर लगती हो जब तुम हो जाती हो उदास! ज्यों किसी गुलाबी दुनिया में सूने खँडहर के आसपास मदभरी चांदनी जगती हो! मुँह पर ढँक लेती हो आँचल ज्यों डूब रहे रवि पर बादल, या दिन-भर उड़कर थकी किरन, सो जाती हो पाँखें समेट, आँचल में…
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाए रहिए – निदा फ़ाज़ली
दिल मिले या न मिले हाथ मिलाए रहिए – निदा फ़ाज़ली बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए अजनबी शहर है ये, दोस्त बनाए रहिए दुश्मनी लाख सही, ख़त्म न कीजे रिश्ता दिल मिले या न मिले हाथ मिलाए रहिए ये तो चेहरे की शबाहत हुई तक़दीर नहीं इस पे कुछ रंग अभी और…
कदम बढाने वाले , कलम चलाने वाले – हरिवंशराय बच्चन
कदम बढाने वाले , कलम चलाने वाले हरिवंशराय बच्चन अगर तुम्हारा मुकाबला दीवार से है, पहाड़ से है, खाई-खंदक से, झाड़-झंकाड़ से है तो दो ही रास्ते हैं- दीवार को गिराओ, पहाड़ को काटो, खाई-खंदक को पाटो, झाड़-झंकाड़ को छांटो, दूर हटाओ और एसा नहीं कर सकते- सीमाएँ सब की हैं- तो उनकी तरफ…
क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए -निर्मला पुतुल
क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए – हिंदी कविता निर्मला पुतुल क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए…? एक तकिया कि कहीं से थका-मांदा आया और सिर टिका दिया कोई खूँटी कि ऊब, उदासी थकान से भरी कमीज़ उतारकर टाँग दी या आँगन में तनी अरगनी कि कपड़े लाद दिए घर कि सुबह निकला और शाम लौट आया…
फ़र्ज़ करो / इब्ने इंशा
फ़र्ज़ करो इब्ने इंशा फ़र्ज़ करो हम अहले वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूठी हों अफ़साने हों फ़र्ज़ करो ये जी की बिपता, जी से जोड़ सुनाई हो फ़र्ज़ करो अभी और हो इतनी, आधी हमने छुपाई हो फ़र्ज़ करो तुम्हें ख़ुश करने के ढूंढे हमने बहाने हों…
