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Saturday, October 3, 2026
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नर हो न निराश करो मन को मैथिलीशरण गुप्त

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nar ho n nirash karo man ko

नर हो न निराश करो मन को

मैथिलीशरण गुप्त (MAITHILI SHARAN GUPT)

 

कुछ काम करो, कुछ काम करो
जग में रह कर कुछ नाम करो
यह जन्म हुआ किस अर्थ अहो
समझो जिसमें यह व्यर्थ न हो
कुछ तो उपयुक्त करो तन को
नर हो, न निराश करो मन को

संभलो कि सुयोग न जाय चला
कब व्यर्थ हुआ सदुपाय भला
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
अखिलेश्वर है अवलंबन को
नर हो, न निराश करो मन को

जब प्राप्त तुम्हें सब तत्त्व यहाँ
फिर जा सकता वह सत्त्व कहाँ
तुम स्वत्त्व सुधा रस पान करो
उठके अमरत्व विधान करो
दवरूप रहो भव कानन को
नर हो न निराश करो मन को

निज गौरव का नित ज्ञान रहे
हम भी कुछ हैं यह ध्यान रहे
मरणोंत्‍तर गुंजित गान रहे
सब जाय अभी पर मान रहे
कुछ हो न तज़ो निज साधन को
नर हो, न निराश करो मन को

प्रभु ने तुमको दान किए
सब वांछित वस्तु विधान किए
तुम प्राप्‍त करो उनको न अहो
फिर है यह किसका दोष कहो
समझो न अलभ्य किसी धन को
नर हो, न निराश करो मन को

किस गौरव के तुम योग्य नहीं
कब कौन तुम्हें सुख भोग्य नहीं
जान हो तुम भी जगदीश्वर के
सब है जिसके अपने घर के
फिर दुर्लभ क्या उसके जन को
नर हो, न निराश करो मन को

करके विधि वाद न खेद करो
निज लक्ष्य निरन्तर भेद करो
बनता बस उद्‌यम ही विधि है
मिलती जिससे सुख की निधि है
समझो धिक् निष्क्रिय जीवन को
नर हो, न निराश करो मन को
कुछ काम करो, कुछ काम करो

देखिये बिहार के दुर्गा पूजा की एक झलक -30 सितम्बर 2017

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डाक बंगला चौराहा ,पटना (DAK BUNGALOW CHOURAHA ,PATANA )

डाक बंगला चौराहा ,पटना (DAK BUNGALOW CHOURAHA ,PATANA )

डाक बंगला चौराहा ,पटना (DAK BUNGALOW CHOURAHA ,PATANA )

बड़ी मठिया आरा, बिहार (BADI MATHIYA ,ARA,BIHAR)

बड़ी मठिया आरा, बिहार (BADI MATHIYA ,ARA,BIHAR)

पतंग से सजावट ,आनंदपुरी पटना (ANANDPURI,PATNA)

पतंग से सजावट ,आनंदपुरी पटना (ANANDPURI,PATNA)

 गर्दनीबाग, पटना (GARDANIBAG ,PATNA)


गर्दनीबाग, पटना (GARDANIBAG ,PATNA)

हसन चौक दुर्गा पूजा समिति,दरभंगा (HASAN CHOUK ,DARBHANGA)

हसन चौक दुर्गा पूजा समिति,दरभंगा (HASAN CHOUK ,DARBHANGA)

हसन चौक दुर्गा पूजा समिति,दरभंगा (HASAN CHOUK ,DARBHANGA)

गांधी चौक, छपरा (GANDHI CHOUK ,CHHAPRA )

गांधी चौक, छपरा (GANDHI CHOUK ,CHHAPRA

राम मंदिर का निर्माण ,गया ,बिहार (GAYA BIHAR )

राम मंदिर का निर्माण ,गया ,बिहार (GAYA BIHAR )

ब्रम्होस मिसाईल का निर्माण ,सीतामढ़ी (SITAMADHI ,BIHAR)

ब्रम्होस मिसाईल का निर्माण ,सीतामढ़ी (SITAMADHI ,BIHAR)

ताज होटल का निर्माण ,भागलपुर  (BHAGALPUR,BIHAR )

ताज होटल का निर्माण ,भागलपुर  (BHAGALPUR,BIHAR )

 

देखिये बिहार के दुर्गा पूजा की एक झलक -29 सितम्बर 2017

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BIHAR DURGA PUJA -2017

बिहार के दुर्गा पूजा के माता की तस्वीरे एवं पंडाल की झलक देखिये -29 सितम्बर 2017


ओम कला मंदिर ,आरा (OM KALA MANDIR,ARA )

 
ओम कला मंदिर ,आरा (OM KALA MANDIR,ARA )



डेहरी ,बिहार (DEHRI ,BIHAR )


डेहरी ,बिहार (DEHRI ,BIHAR )


दुर्गा पूजा समिति आनाईठ,आरा (DURGA POOJA SAMITI ,ANAITH,ARA)


दुर्गा पूजा समिति आनाईठ,आरा (DURGA POOJA SAMITI ,ANAITH,ARA)


 देवी स्थान  गया रोड,नवादा (GAYA ROAD ,NAWADA )

 

देवी स्थान  गया रोड,नवादा (GAYA ROAD ,NAWADA )

 

चैलिटाल ,पटना सिटी (CHAILITAL ,PATNACITY)


चैलिटाल ,पटना सिटी (CHAILITAL ,PATNACITY)


सीतामढ़ी ,बिहार (SITAMADHI ,BIHAR )


सीतामढ़ी ,बिहार (SITAMADHI ,BIHAR )


 

नवादा ,बिहार (NAWADA ,BIHAR )


 नवादा ,बिहार (NAWADA ,BIHAR )



गढ़ नोखा ,रोहतास ,बिहार (GARH NOKHA. ROHTAS, BIHAR)



गढ़ नोखा ,रोहतास ,बिहार (GARH NOKHA. ROHTAS, BIHAR)



गढ़ नोखा ,रोहतास ,बिहार (GARH NOKHA. ROHTAS, BIHAR)



गढ़ नोखा ,रोहतास ,बिहार (GARH NOKHA. ROHTAS, BIHAR)

 

सुभास चौक ,हाजीपुर (SUBHAS CHOUK ,HAJIPUR,BIHAR)



सुभास चौक ,हाजीपुर (SUBHAS CHOUK ,HAJIPUR,BIHAR)

 

राजा बाज़ार पटना (RAZAR BAZAR,PATNA)



सुभास चौक ,हाजीपुर (SUBHAS CHOUK ,HAJIPUR,BIHAR)




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MEIRA KUMAR BIOGRAPHY IN HINDI

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लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष मीरा कुमार

 
MEIRA KUMAR -मीरा कुमार  

 

अपने पिता स्वर्गीय जगजीवन राम के अधूरे सपने और संकल्प को पूरा करने के लिए भारतीय विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं मीरा कुमार स्वभाव से अत्यंत सौम्य, मृदुभाषी और मिलनसार हैं।राजीतिक पृष्ठभूमि वाली  मीरा कुमार को गुस्सा नहीं आता है। गुस्से में भी वह नहीं चीखती हैं। सौम्य हैं। हंसमुख हैं। पढ़ाकू भी हैं। मीरा कुमार अब तक पांच बार सांसद बन चुकी हैं वर्ष 2017 में मीरा कुमार को यूपीए द्वारा अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया पर वो रामनाथ कोविंद से हार गयी 

 

प्रारंभिक जीवन 

मीरा कुमार का जन्म 31 मार्च, 1945 को बाबू जगजीवन राम और इन्द्राणी देवी के यहाँ सासाराम बिहार में हुआ था मीरा कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के महारानी गायत्री देवी स्कूल में हुई। मीरा कुमार ने दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ और मिरांडा हाउस कॉलेजों से एम ए और एल एल बी तक शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1973 में वह भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के लिए चुनी गईं। कुछ वर्षो तक स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं लेकिन उन्हें अफसरशाही रास नहीं आई और उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाने का फैसला किया। मीरा कुमार अंग्रेजी, स्‍‍पेनिश, हिंदी, संस्कृत, भोजपुरी भाषाओ में निपुण है। मीरा कुमार वर्ष 1968 में बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री सुमित्रा देवी के बड़े पुत्र मंजुल कुमार से परिणय सूत्र में बंधी।मीरा कुमार के एक पुत्र (अंशुल) एवं दो पुत्रियाँ (स्‍‍वाति और देवांगना) हैं।

राजनीतिक सफर –

मीरा कुमार ने अपना राजनीतिक सफर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से किया। भारतीय राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले बाबू जगजीवन राम के घर में पली-बढ़ी मीरा कुमार कांग्रेस के टिकट पर पहली बार 1985 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से उप चुनाव लड़ी और तब उन्होंने मायावती और रामविलास पासवान को पराजित कर राजनीति में धमाकेदार शुरुआत की ।हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में वह बिजनौर से पराजित हुई। इसके बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला और 11 वीं तथा 12 वीं लोकसभा के चुनाव में वह दिल्ली के करोलबाग संसदीय क्षेत्र से विजयी होकर फिर संसद पहुंचीं।

कांग्रेस कमेटी का महासचिव पद भी संभाला

मीरा कुमार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयास से 1990 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं। 1996 में वे दूसरी बार सांसद बनीं और तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरु की। 2004 में बिहार के सासाराम से लोक सभा सीट जीती। उस समय इन्हें पहली बार केन्द्र में मंत्री पद भी प्राप्त हुआ और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।

राजग की हवा में भी सासाराम सीट को बरकरार रखा

15 वीं लोकसभा चुनाव में बिहार में जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हवा बह रही थी, उसमें भी मीरा कुमार ने सासाराम सीट को बरकरार रखा तथा अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुनिलाल को 45 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया। फलस्वरूप केन्द्र में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए जल संसाधन मंत्रालय सौंपा गया था।

पहली महिला स्पीकर

संसद के स्पीकर पद पर पहुंचने वाली वे पहली महिला हैं। वह भी दलित। इक्कीसवीं सदी में दुनिया के 187 मौजूदा लोकतांत्रिक देशों में से केवल 32 देशों में ही महिलाएं इस पद तक पहुंचने में सफल हो पाई हैं । आस्ट्रिया दुनिया का पहला देश है, जहां किसी महिला को संसद का स्पीकर चुना गया। द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले आस्ट्रियाई संसद बंदुेस्रात में पहली बार महिला स्पीकर पद पर आसीन हुई थी।

MIERA KUMAR BIHAR

प्रिय पुस्तक अभिज्ञान शांकुतलम्

मीरा कुमार कहती है कि मैं हमेशा कुछ न कुछ पढ़ती रहती हूं और मेरी प्रिय पुस्तक महाकवि कालिदास की अभिज्ञान शांकुतलम् है। पहली बार इस सदन की सदस्य बनने पर मैं पीछे की बेंच पर बैठा करती थी। जब मैं स्कूल की छात्रा थी, तब कई बार दर्शक दीर्घा से मैंने लोकसभा की कार्यवाही को देखा । उस समय स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा इस सदन में बैठकर देश के लोगों के हित में फैसले लेते थे। खासकर दलितों, वंचितों और कमजोर तथा हाशिए पर खड़े लोगों के लिए वह बड़ी मशक्कत करते थे।

कला और साहित्य से  विशेष लगाव 

भारतीय इतिहास में विशेष रुचि रखने वाली मीरा कुमार को कला और साहित्य से भी विशेष लगाव है।उन्हें देश-विदेश की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करने का भी शौक है। विदेश सेवा में कार्यरत होने के कारण बड़े पैमाने पर उन्होंने विदेश यात्राएं की हैं। हस्तशिल्प प्रेमी होने के अलावा मीरा कुमार एक अच्छी कवियित्री भी हैं. वह अपना खाली समय किताबें पढ़ने और शास्त्रीय संगीत सुनने में व्यतीत करती हैं। उनकी लिखी कई कविताएं प्रकाशित भी हुई हैं।

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देखिये बिहार के दुर्गा पूजा की एक झलक -28 सितम्बर 2017

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BIHAR DURGA PUJA -2017

बिहार के दुर्गा पूजा के माता की तस्वीरे एवं पंडाल की झलक देखिये 

हरिसभा चौक, मुज़फ़्फ़रपुर ,पटना  (HARISABHA CHOUK , MUZAFFARPUR,PATNA )


हरिसभा चौक, मुज़फ़्फ़रपुर ,पटना  (HARISABHA CHOUK , MUZAFFARPUR,PATNA )


आई जी एम एस ,राजा बाज़ार ,पटना (IGMS ,RAJA BAZAR,PATNA )

आई जी एम एस ,राजा बाज़ार ,पटना (IGMS ,RAJA BAZAR,PATNA )

बोर्ड अपर ,नोखा रोहतास (BOARD UPPER,NOKHA ,ROHTAS)

 
बोर्ड अपर ,नोखा रोहतास (BOARD UPPER,NOKHA ,ROHTAS)

पुलिस लाइन ,पटना  (POLICE LINE ,PATNA )

 

पुलिस लाइन ,पटना  (POLICE LINE ,PATNA )

 

 बोरिंग रोड चौराहा ,पटना (BOARING ROAD CHOURAHA,PATNA)


बोरिंग रोड चौराहा ,पटना (BOARING ROAD CHOURAHA,PATNA)

 

दानापुर ,पटना (DANAPUR PATNA )



दानापुर ,पटना (DANAPUR PATNA )


पंचमुखी हनुमान मंदिर ,बोरिंग रोड ,पटना (PANCHMUKHI HANUMAN MANDIR,BOARING ROAD ,PATNA )



पंचमुखी हनुमान मंदिर ,बोरिंग रोड ,पटना (PANCHMUKHI HANUMAN MANDIR,BOARING ROAD ,PATNA )


हाउसिंग बोर्ड ,हनुमान नगर ,पटना (HOUSING BOARD ,HANUMAN NAGAR,PATNA)



हाउसिंग बोर्ड ,हनुमान नगर ,पटना (HOUSING BOARD ,HANUMAN NAGAR,PATNA)


होटल सिटी सेंटर , पटना (HOTEL CITY CENTER,PATNA)

 

होटल सिटी सेंटर , पटना (HOTEL CITY CENTER,PATNA)


नूरसराय ,बिहार (NOORSARAI ,BIHAR )

नूरसराय ,बिहार (NOORSARAI ,BIHAR )

इसलामपुर, नालँदा, बिहार (ISLAMPUR ,NALANDA,BIHAR)


इसलामपुर, नालँदा, बिहार (ISLAMPUR ,NALANDA,BIHAR)

भैंसासुर, बिहारशरीफ (BHAINSASUR,BIHARSHARIF)

भैंसासुर, बिहारशरीफ (BHAINSASUR,BIHARSHARIF)

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चौदह साल का लड़का बना इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर

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YASHA YESLE ( याशा एस्ले )

चौदह साल की उम्र में जब बच्चे किशोरावस्था में कदम रखते है तो उस समय बहुत सारी बाते उन्हें मालूम नहीं होती है . इस उम्रे में मस्ती मजाक खेल कूद में ज्यादा मजा आता है लेकिन यदि हम आपसे कहे की तेरह साल की उम्र में कोई लड़का प्रोफेसर बन कर लोगो को पढ़ा रहा है तो क्या आप यकीन करेंगे नहीं न लेकिन ये सच है

 ह्यूमन कैलकुलेटर के  नाम से है प्रसिद्ध 

इरानी मूल के इस बच्चे का नाम है याशा एस्ले जिन्हें ह्यूमन कैलकुलेटर कहा जाता है । गणित के अविश्वसनीय ज्ञान से लैस वह इंग्लैंड की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में छात्रों को पढ़ा रहे हैं, साथ ही अपनी डिग्री की पढ़ाई भी पूरी कर रहे हैं। दुनिया के सबसे नन्हे प्रोफेसर याशा एस्ले ने साबित कर दिया कि किसी भी काम को करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती है।

बचपन से ही गणित में है रूचि 

याशा के पिता मूसा एस्ले बताते हैं कि याशा को शुरू से ही गणित में रुचि थी। वे उन्हे रोज गाड़ी में यूनिवर्सिटी छोड़ने जाते हैं। वह अपना डिग्री कोर्स खत्म करने के करीब है और जल्द ही अपनी पीएचडी शुरू करने वाला है।

यूनिवर्सिटी  पैनल भी  गणित के ज्ञान को देखकर था  हैरान 

याशा एस्ले का यहाँ तक का सफ़र आसान नहीं रहा । याशा का अनोखा गणित ज्ञान देखकर उनके पिता ने यूनिवर्सिटी से संपर्क किया था। उस वक्त इसकी उम्र सिर्फ तेरह साल थी।उसके बाद इसे यूनिवर्सिटी में बुलाया गया। याशा बताते हैं कि पहली मुलाकात के वक्त यूनिवर्सिटी के पैनल ने उनकी कम उम्र को देखते हुए कई तरह के सवाल किए थे, लेकिन मैंने उन्हे लाजवाब कर दिया । यूनिवर्सिटी का पैनल भी इसके गणित के ज्ञान को देखकर हैरान हो उठा।

मानव संसाधन विकास विभाग से लेनी पड़ी विशेष अनुमति 

उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त कर लिया गया। अतिथि शिक्षक पद पर नियुक्ति से पहले उन्हें मानव संसाधन विकास विभाग से विशेष अनुमति लेनी पड़ी। यूनिवर्सिटी ने जब यह अनुमति लेस्टर परिषद के सामने रखी तो परीषद के अधिकारीयों को भी यकीन नहीं हुआ। जब वे याशा से मिले तो वे भी आश्चर्यचकित रह गए । अब किसी 14 साल के बच्चे को यूनिवर्सिटी जाते देखना और वहां जाकर अपने से बड़े बच्चों की क्लास लेना उन्हें बड़ा सुखद लगता है।

याशा का कहना है कि उन्हें नौकरी करने से भी अधिक खुशी वहां के छात्रों को पढ़ाने में मिलती है। याशा कहते हैं कि मैं दूसरे छात्रों की मदद करना चाहता हूं और उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद कर सकता हूं

अमिताभ-शाहरूख संग काम कर चुकी बिहार की यह बेटी, अब हॉलीवुड में करेगी एंट्री

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दीपिका और कंगना भी है बिहार की सांची की दीवानी..

दोस्तों आज हम बात कर रहे है एक ऐसी छोटी बच्ची के बारे में जो इतनी छोटी उम्र में ही कई बड़े बड़े बॉलीवुड सितारों के साथ काम कर चुकी है । बिहार की इस चाइल्‍ड मॉडल व एक्‍ट्रेस के आदर्श भारत के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी है और वह बड़ा होकर वह पीएम मोदी की तरह ही देश की कमान संभालना चाहती है।


पिता ने  देखा था एक्टर बनने का सपना 

हम बात कर रहे हैं बिहार के नक्सल ग्रस्त रोहतास जिले के एक छोटे से गांव काशिगवा से मुंबई पहुंचे राकेश तिवारी की छह साल की बेटी सांची की। 15 साल पहले साँची के पिता ने एक्टर बनने का सपना देखा था और उसे पूरा करने की चाहत में मायानगरी मुंबई का रुख किया था। राकेश तिवारी का यह सपना उसकी बेटी ने पूरा कर दिया।

ऐसे मिला था पहला काम

राकेश ने बताया कि एक बार वे बेटी सांची को लेकर फिल्मिस्तान स्टूडियो गए थे। उसकी चंचलता और गतिविधियों को देख एक विज्ञापन प्रोड्यूसर ने उसे गोद में उठा लिया। दो महीने बाद एक शीतल पेय के विज्ञापन में उसे कम करने का मौका मिल गया । इसके बाद सांची ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

SANCHI -CHILD ACTRESS

शाहरूख के साथ की पहली विज्ञापन फिल्‍म

सांची ने अपनी पहली विज्ञापन फिल्‍म शाहरूख खान के साथ की थी। उस विज्ञापन फिल्‍म में शाहरूख के साथ एक शीतल पेय का विज्ञापन किया था । सांची अमिताभ बच्चन, ओमपुरी, फरहान अख्तर, कंगना राणावत, दीपिका पादुकोण जैसी फिल्मी हस्तियों के साथ भी काम कर चुकी है। अब उसे हॉलीवुड की एक फिल्म में ओमपुरी के साथ काम करने का मौका मिला है। रोहतास जिले के नक्सल प्रभावित काशिगवा से निकली बिहार की यह नन्ही परी मायानगरी पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।

कई टीवी सीरियलों व फिल्‍मों में  कर चुकी है  काम 

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्‍चन व किंग खान शाहरूख खान के साथ काम कर चुकी यह बच्‍ची कई टीवी सीरियलों व फिल्‍मों में भी भूमिकाएं कर चुकी है। सांची ने ‘क्राइम पेट्रोल‘, ‘सीआइडी‘, ‘सावधान इंडिया‘ जैसे सीरियलों में काम कर चुकी है । ‘शपथ‘, ‘डोली अरमानों की‘ में भी उसके अभिनय को सराहा गया है । हाॅरर सीरियल ‘आहट‘ में भी वह दिखी। सांची फरहान अख्तर के साथ फिल्म ‘वजीर‘, दीपिका पादुकोण के साथ ‘पीकू‘, कंगना राणावत के साथ ‘रज्जो‘ में भी काम कर चुकी है। फिलहाल सांची के पास कई टीवी सीरियल व फिल्‍में हैं।

 

SANCHI -CHILD ACTRESS

मुंबई में तीसरी कक्षा की छात्रा

सांची के पिता राकेश तिवारी ने बताया कि वे कभी मुंबई अभिनेता बनने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली । मुंबई में रहने के लिए उन्‍होंने टीवी सीरियलों व फिल्मों में छोटे छोटे रोल किए। घर लौटे तो शादी हो गई। सालों बाद वे पत्नी व बच्ची को लेकर फिर मुंबई पहुंचे और वहीं रह गए। सांची मुंबई के अंधेरी के समीप एक कान्वेंट स्कूल में तीसरी क्लास की छात्रा है।

बेटी पर है गर्व 

सांची की मां ने कहा कि बेटी पर नाज है। ऐसी एक बेटी पर सौ बेटों कुर्बान है। गाँव से निकल हमारी बेटी मुंबई में सफलता की झंडा गाड़ रही है। जिले के साथ-साथ बिहार का भी नाम रौशन कर रही है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।

पीएम मोदी की जबरदस्‍त फैन

सांची प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जबरदस्‍त फैन है। वह पीएम मोदी की तरह ही देश के सर्वोच्च स्थान पर पहुंचना चाहती है।

 

मछली पकड़ते-पकड़ते स्वीमिंग चैम्पियन बन गई बिहार की बेटी

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मछुआरे की बेटी – विश्व तैराकी में जीत चुकी है  गोल्ड मेडल

 
किसी ने सच ही कहा है की मन में अगर लग्न और तीव्र इच्छा शक्ति हो तो रस्ते की कोई भी रुकावट आपको मंजिल तक पहुचने से नहीं रोक सकती है । यूं तो उसके ढेर सारे उदाहरण हैं, परंतु, आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी बिहार की बेटी के बारे में जिसका जन्म  गरीब-नि:सहाय परिवार में हुआ लेकिन अपनी मेहनत के बल पर वो आज  कई लड़कियों की  लिए रोल मॉडल बन गई है। यह नाम है बेगुसराय जिला से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित सरौंजा निवासी फदौर सहनी की पुत्री बेबी कुमारी का।

मछली पकड़ते-पकड़ते तैराकी की तमाम बारीकियां जानी 

गांव के पोखर से तैराकी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली बेबी कुमारी वीरपुर प्रखंड के सरौंजा निवासी एक छोटे से मछुआरे फौदार सहनी के पांच संतानों में दूसरी संतान  है। बचपन में पिता के साथ गांव के छोटे से तालाब में मछली पकड़ते-पकड़ते वह तैरने की तमाम बारीकियों को जानी। गांव के प्राइमेरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर एसबीएसएस कॉलेज से स्नातक कर रही है।

 दर्जनों गोल्ड मेडल किया है अपने नाम 

गांव से निकल छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं में भाग लेती हुई बेबी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर तक की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का जौहर बिखेर चुकी है। दर्जनों गोल्ड मेडल के साथ ही करीब ढाई दर्जन सिल्वर और कांस्य पदक प्राप्त किया।

  वल्र्ड तैराकी प्रतियोगिता 2016 में जीता गोल्ड मेडल

इसमें अब तक की इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि गोवा में आयोजित वल्र्ड तैराकी प्रतियोगिता 2016 में गोल्ड मेडल जीतना है। इस स्वीमिंग प्रतियोगिता में बेबी ने इंग्लैंड, श्रीलंका, नेपाल सहित अन्य देशों के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाने में सफल हुई थीं। बेबी को इसी उपलब्धि के इनाम के रूप में सीआरपीएफ में नौकरी मिली है। फिलहाल वह पंजाब में ट्रेनिंग ले रही है।

 पढ़ने मे भी बचपन से है  मेधावी 

बेबी के एक भाई और एक अन्य बहन भी तैराकी मे अपना नाम कमा चुके हैं. बेबी न सिर्फ तैराकी में बल्कि पढ़ने मे भी बचपन से ही मेधावी रही है. बेबी की शिक्षक अपनी शिष्या की इस कामयाबी पर फूले नही समां रही हैं. शिक्षिका का भी मानना है की अगर इसके प्रतिभा को निखारने के लिए सरकार आगे आए तो नजारा कुछ और हो सकता है.

प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के हाथों भी मिल चूका है सम्मान 

बेबी कुमारी को यूं तो सैकड़ों सम्मान मिले हैं। परंतु, बेबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार से मिले सम्मान की चर्चा हर जगह करना नहीं भूलती। बेबी बताती हैं कि वह 2007 से लेकर 2014 तक बिहार चैंपियन रही हैं। अपनी इस कामयाबी के लिए गुजरात के तात्कालिक मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।

ओलंपिक में हिस्सा लेने की है ख्वाहिश

सीमित संसाधनो के बाबजूद बिहार और देश का नाम रौशन करनेवाली बेबी 2018 मे आयोजित होने वाली ओलंपिक मे हिस्सा लेकर देश का नाम रौशन करना चाहती है। दूरभाष पर बेबी ने बताया कि फिलहाल वे पूरा फोकस ट्रेनिंग पर दे रही है। जल्द ही उसकी ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी।
ट्रेनिंग के साथ ही वह मौका मिलते ही किसी स्वीमिंग पुल में जाकर प्रैक्टिस करती है। बेबी कहती है कि वह भारत की तरफ से ओलंपिक में भाग लेना चाहती है। बताते चलें कि 2018 में होने वाले ओलंपिक में स्वीमिंग प्रतिभागी के तौर पर बेबी सबसे मजबूत दावेदार हैं।
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‘बंधन तोड़’ ऐप के जरिए बिहार में बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा रोकने की मुहिम शुरू

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सिर्फ कानून बनाने से बाल विवाह और दहेज प्रथा पर रोक संभव नहीं

भारत में दहेज एक पुरानी प्रथा है । मनुस्मृति मे ऐसा उल्लेख आता है कि माता-कन्या के विवाह के समय दाय भाग के रूप में धन-सम्पत्ति, गउवें आदि कन्या को देकर वर को समर्पित करे ।यह भाग कितना होना चाहिए, इस बारे में मनु ने उल्लेख नहीं किया । समय बीतता चला गया स्वेच्छा से कन्या को दिया जाने वाला धन धीरे-धीरे वरपक्ष का अधिकार बनने लगा और वरपक्ष के लोग तो वर्तमान समय में इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही मान बैठे हैं ।
 

बाल विवाह और दहेज प्रथा सिर्फ देश की प्रमुख समस्या तो है ही साथ ही महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा है। सरकार और लोगो के संयुक्त प्रयास से ही इसे खत्म किया जा सकता है।राज्यसरकार 2 अक्टूबर से बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रही है।बिहार में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए एक अनोखी पहल के तहत ऐप लॉन्च किया गया है।

इस एप्प से   दहेज प्रथा के प्रति  लोगों को किया जायेगा जागरूक

संयुक्त राष्ट्र पॉप्युलेशन फंडद्वारा समर्थित इस ऐप को 270 सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर तैयार किया है। जेंडर अलायंस बिहार पहल के तहत लॉन्च किए गए इस ऐप का नाम ‘बंधन तोड़’ है। संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई यूएनएफपीए के थिंक टैंक जेंडर अलायंस द्वारा जारी किए गए इस मोबाइल एप बंधन तोड़ का लोकार्पण रविवार को उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया। इस एप को गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल किया जा सकता है। इस एप से बाल विवाह दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करने और कानूनी जानकारी देने के साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। इस एप से बिजली बिल जमा करने पर छूट भी मिलेगी।

24 घंटे मदद कराई जाएगी  उपलब्ध

इस समारोह में बंधन तोड़ मोबाइल ऐप, कॉफी टेबल बुक और बंधन तोड़ थीम सांग को भी लॉन्च किया गया। इस मौके पर सुशील मोदी ने कहा कि माता-पिता को भी समझना होगा कि जब लड़की आर्थिक रूप से सशक्त होगी, तो दहेज नहीं देना पड़ेगा। लड़के भी ऐलान करें कि वे दहेज नहीं लेंगे। बिहार में पंचायत चुनावों में महिलाओं को आरक्षण देने भर से बेहद तेजी से महिलाओं का सशक्तीकरण हुआ। जब मां शिक्षित होगी, तो उसके बच्चे भी शिक्षित होंगे। इस ऐप के जरिए बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी समस्याओं के बारे में जागरूकता तो फैलेगी ही साथ में पीड़ित लड़कियों और महिलाओं को 24 घंटे मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी।

दहेज प्रथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी साल मई में बाल विवाह के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा था कि गांधी जयंती से बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध सशक्त अभियान चलाया जाएगा। उसी के तहत ये कोशिश की जा रही है। सीएम ने कहा था कि हर गांव में 12वीं स्तर का स्कूल खोला जाएगा। जिससे धीरे-धीरे प्रजनन दर भी कम की जा सकेगी। बंधन तोड़ कैंपेन की लॉन्चिंग के वक्त यूनिसेफ के बिहार प्रमुख असदुर रहमान ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा है। सरकार और सिविल सोसाइटी के संयुक्त प्रयास से इसे खत्म किया जा सकता है।

एप्प की मदद से लड़कियों को किया जायेगा शिक्षित 

बंधन तोड़ मोबाइल ऐप से बाल विवाह और दहेज प्रथा को रोकने के साथ लड़कियों को शिक्षित भी किया जाएगा। इसके तहत लोगों को आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। समारोह में बाल विवाह से इनकार कर शिक्षा हासिल कर रही कई बच्चियों को सम्मानित भी किया गया। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल किया जा सकता है। इसके बाल विवाह दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करने और कानूनी जानकारी देने के साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। इस एप से बिजली बिल जमा करने पर छूट भी मिलेगी।

इस एप्लीकेशन की खास बाते

  • अगर कहीं बाल विवाह हो रहा है तो इसे रोकने और लड़की तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए इस एप में एसओएस बटन होगा।
  • अगर किसी नाबालिग लड़की की शादी हो रही है, तो वह इसके जरिए मदद मांग सकती है। उसके मदद मांगते ही इसकी जानकारी जेंडर अलाएंस मुख्यालय, विभिन्न सिविल सोसाइटी, एनजीओ आदि के पास पहुंच जाएगी।
  • बाल विवाह का एक बड़ा कारण पढ़ाई का बीच में छूट जाना होता है। ऐसे में इस एप पर चर्चित शिक्षकों के 7वीं से 12वीं कक्षा के वीडियो लेक्चर हिंदी में मौजूद रहेंगे।
  •  इसकी मदद से शहरी इलाके के आम छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ले सकते हैं।
  •  यह लेक्चर बिहार बोर्ड के सिलेबस के मुताबिक होंगे। इसे गांव की जागरूक महिलाओंके साथ भी जोड़ा जाएगा। महिलाओं के समूह के जरिए इसका सही इस्तेमाल हो सकता है।
  • इस ऐप की एक खास बात और यह है कि इसे इंस्टॉल करने पर यूजर को सौ रुपए का डिजिटल अमाउंट भी उसके मोबीक्यूक वॉलेट में मिलेगा।
  • इसके अलावा यदि कोई इसके दूसरे को इंस्टॉल करने के लिए रेफर करेगा तो इनस्टॉल होने के बाद उसे 50 रुपए और मिलेंगे।
  •  इसमें सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी मुहैया कराई जाएगी।साथ ही साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह से संबंधित कानूनी जानकारी भी दी जाएगी।
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विमान से दुनिया का अकेले चक्कर लगाने वाली अफगान की पहली महिला पायलट की प्रेरणादायक कहानी

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मेरे जैसा कोई भी बन सकता है – Shaesta Waiz

दोस्तों आज हम बात कर रहे है एक ऐसी महिला के बारे में जिसका जन्म काबुल के शरणार्थी कैंप में हुआ । जंग के कारण उनके परिवार को भागकर अमेरिका जाना पड़ा । थोड़ी बड़ी हुई, तो पढ़ाई छोड़ने का दबाव बना । लेकिन उसने हार नहीं मानी। परिवार के विरोध के बावजूद अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं । 29 साल की उम्र में अकेले दुनिया का चक्कर लगाने के सफर पर निकली ।

सन 1987 में अफगानिस्तान में सोवियत सेना और मुजाहिदीन के बिच भयंकर लड़ाई चल रही थी | बहुत सारे अफगानी नागरिक देश छोड़कर जा रहे थे | हजारो लोग शरणार्थी कैंपों में नारकीय जिंदगी गुजारने के लिए विवश थे । उसी कैंप में शाइस्ता (shaista) का जन्म हुआ । इन कैंपों में भोजन, पानी और दवाई की बभी सही से व्यवस्था नहीं थी ।कब किस पल किसकी मौत आ जाएगी कोई नहीं जनता था । इसलिए शाइस्ता के परिवार को देश छोड़ना पड़ा ।

अफगानिस्तान छोड़कर आना पड़ा अमेरिका

शाइस्ता की माँ अपनी छह बेटियों को लेकर अमेरिका चली आईं। उनक परिवार बड़ा था पर आमदनी नहीं थी । शाइस्ता कैलिफोर्निया के रिचमंड इलाके के पास ही के एक स्कूल में पढ़ने लगीं। स्कूल में पढाई की व्यवस्था सही नहीं थी । अधिकांश गरीब परिवार के बच्चे ही पढने आते थे । स्कूल में बहुत कम किताबे थीं, जिन्हें बच्चे आपस में बांटकर पढ़ते थे।

बंद हुयी धमाकों और फायरिंग की आवाजें

शाइस्ता खुश थी क्युकी वो जानती थी मेरे पापा की इतनी कमाई नहीं थी कि वह हमें अच्छे स्कूल में पढ़ा पाते । परिवार भी खुश था क्युकी कैलिफोर्निया में अफगानिस्तान की तरह बम धमाकों और फायरिंग की आवाजें नहीं सुनाई देती थीं ।धीरे धीरे जिंदगी पटरी पर लौटने लगी।

परिवार की पिछड़ी सोच बनी रास्ते की रुकावट

अमेरिका में रहने के बाद भी बेटियों को लेकर परिवार की सोच पिछड़ी रही। बेटियों के बड़े होते ही परिवार के लोगो को उसकी शादी की चिंता सताने लगती । लेकिन शाइस्ता बड़े होकर कुछ बनना चाहती थीं । पर उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्युकी उनके घर का माहौल अमेरिकी समाज की तरह खुला नहीं था बल्कि अभी भी कट्टर अफगान परंपरा से जुड़ा हुआ था । शाइस्ता को अमेरिकी लड़कियों की तरह हर तरह की आजादी नहीं थी बल्कि हमेशा याद दिलाया जाता था कि लडकियों को अपने दायरे में रहना चाहिए ।

हार नहीं मानी

इंटर की परीक्षा पास करने के बाद शाइस्ता को पढ़ाई छोड़ने को बोला गया , पर शाइस्ता ने हार नहीं मानी और जिद करके यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया । वह परिवार की पहली बेटी हैं जिन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की है ।

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता कहती हैं- हमारे यहाँ रिवाज था कि लड़कियां हाईस्कूल पास करने के बाद शादी करें और बच्चे पैदा करें। मगर मैं तो आसमान में उड़ना चाहती थी, इसलिए पायलट बनने का फैसला किया।

परिवारवालों ने किया पायलट बनने का विरोध

जब दादी ने यह खबर सुना कि पोती पायलट बनेगी, तो उनकी चिंता बढ़ गई। उन्होंने पूछा, हवाई जहाज चलाने वाली लड़की से कौन शादी करेगा? चाचा भी इस फैसले के खिलाफ थे । उनका मानना था कि पायलट जैसे काम महिलाओं के लिए नहीं हैं।मगर शाइस्ता ने किसी की नहीं सुनी।

अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं

28 साल की उम्र में वह अमेरिका में अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं। पहली बार वह जब हवाई जहाज की कॉकपिट में पहुंचीं, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि उनका सपना सच हो गया है। उनका बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना था लेकिन जिस तरह उनके परिवार के आर्थिक हालत थे उन्होंने कभी नहीं सोचा था की उनका यह सपना किसी दिन्सच हो जायेगा । शाइस्ता बताती हैं, की हम लोकल बस या ट्रेन में सफर करते थे। हवाई जहाज में सफर करना हमारे लिए बहुत बड़ी बात थी।

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

मै अक्सर ये सोचती हु की एक शरणार्थी होने के बावजूद मुझे अपना सपना पूरा करने मौका मिला, तो दुनिया की बाकी बेटियों को यह अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए?

लडकियों को आगे बढ़ने के लिए शुरू किया अभियान

बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए उन्होंने एक वैश्विक अभियान शुरू किया। 29 साल की शाइस्ता वाइज विमान से अकेले दुनिया का चक्कर लगाने के सफर पर निकली । अभियान के तहत उन्होंने 18 देशों का हवाई दौरा किया। इस अफगानी युवती ने अपने सफर की शुरुआत अमेरिका के फ्लोरिडा में डेटोना बीच से की थी । इस 90 दिन की यात्रा में उन्होंने 25,800 किलोमीटर का सफर तय किया।

बच्चो को पढने के लिए किया प्रेरित

इस दौरान वह 33 जगहों पर रुकीं और वहां के बच्चों से मुलाकात कर उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।उन्होंने बच्चों में साइंस, गणित तकनीक जैसे विषयों में रुचि जगाने की कोशिश की और समझाया कि ये विषय कठिन नहीं, बल्कि मजेदार हैं। शाइस्ता बताती हैं, मैं स्पेन, मिस्र, भारत, सिंगापुर और ऑस्टेलिया के बच्चों से मिली। हर बच्चे में प्रतिभा है। बस उन्हें सही रास्ता दिखाने की जरूरत है। इस यात्र के दौरान वह अफगानिस्तान भी गईं और अपने रिश्तेदारों से मिलीं। वह एक भावुक लम्हा था। रिश्तेदार अपनी बेटियों को लेकर उनसे मिलने आए।

काबुल में लड़कियों के लिए खोलेंगी कॉलेज

शाइस्ता ने तय किया कि वह काबुल में एक कॉलेज खोलेंगी, जहां लड़कियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि उन्हें अपना मनचाहा करियर चुनने में कोई दिक्कत न हो । शाइस्ता कहती हैं, अफगान बच्चियो की आंखों में भी मेरी तरह बहुत सारे सपने है । कुछ कर गुजरने का हौसला है । मेरा ख्वाब तो पूरा हो गया, अब मैं उनके लिए कुछ करना चाहती हूं।

कोई भी मेरे जैसा बन सकता है

अपने गैर लाभकारी संगठन ड्रीम्स सोर की वेबसाइट पर वे लिखती हैं, जब भी मैं किसी विमान का दरवाजा खोलती हूं, तो खुद से पूछती हूं-मेरी पृष्ठभूमि वाली कोई लड़की इतनी खुशकिस्मत कैसे हो सकती है? लेकिन, सच्चाई यह है कि कोई भी मेरे जैसा बन सकता है।