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Vaibhav Sooryavanshi Biography in Hindi: जीवन परिचय, शिक्षा, परिवार, क्रिकेट करियर और रिकॉर्ड

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Vaibhav Sooryavanshi Biography in Hindi

Vaibhav Sooryavanshi Biography in Hindi : Age, Education, Family, IPL Career और Records

कुछ क्रिकेटरों की पहचान किसी एक बड़ी पारी से बनती है। Vaibhav Sooryavanshi की कहानी थोड़ी अलग है। बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर से निकलकर उन्होंने बहुत कम उम्र में पहले domestic cricket, फिर IPL और उसके बाद India की senior team तक का रास्ता तय किया।

27 मार्च 2011 को जन्मे Vaibhav ने 2024 में सिर्फ 12 साल की उम्र में Ranji Trophy में debut किया। अगले ही साल Rajasthan Royals ने उन्हें ₹1.10 करोड़ में IPL contract दिया। IPL 2025 में उन्होंने 35 गेंदों में century लगाकर इतिहास बनाया और 2026 में उनकी कहानी और आगे बढ़ी—U19 World Cup final में 175 runs, IPL में 776 runs और फिर England के खिलाफ India के लिए T20I debut।

1 अक्टूबर 2026 तक Vaibhav India की T20I setup का हिस्सा हैं और BCCI ने उन्हें West Indies के खिलाफ upcoming T20I series के लिए भी squad में शामिल किया है। इसी दिन उन्हें TIME 100 Next 2026 में भी जगह मिली।

इस biography में उनके जन्म और परिवार से लेकर cricket training, Ranji Trophy, IPL, U19 World Cup, India debut, awards और वर्तमान status तक की journey को verified information के आधार पर समझेंगे।

Vaibhav Sooryavanshi Quick Facts

जानकारी विवरण
नाम Vaibhav Sooryavanshi
जन्म तिथि 27 मार्च 2011
जन्म स्थान ताजपुर, समस्तीपुर, बिहार
उम्र 15 वर्ष (1 अक्टूबर 2026 को)
राष्ट्रीयता भारतीय
पेशा Professional Cricketer
भूमिका Left-handed Batter
Bowling Slow Left-arm Orthodox
घरेलू टीम Bihar
IPL Team Rajasthan Royals
IPL Debut 2025
India Debut 4 जुलाई 2026, T20I
प्रमुख उपलब्धि India’s youngest male international debutant
IPL 2026 776 runs, SR 237.30
U19 World Cup 2026 439 runs
प्रमुख सम्मान Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar, U19 World Cup Player of the Tournament
वर्तमान स्थिति India T20I setup और Rajasthan Royals से जुड़े

जन्मतिथि, birthplace और playing profile Rajasthan Royals की official profile से तथा India selection/current status BCCI records से लिए गए हैं। (Rajasthan Royals)

Vaibhav Sooryavanshi का जीवन परिचय

Vaibhav Sooryavanshi का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर में हुआ। बचपन से ही उनका झुकाव cricket की तरफ था और परिवार ने उनकी इस रुचि को केवल hobby के रूप में नहीं देखा। उनके पिता Sanjeev ने शुरुआती दौर में उनकी cricket training में सक्रिय भूमिका निभाई।

जब Vaibhav की उम्र लगभग आठ साल थी, तब उन्हें Patna की GenNex Cricket Academy में Manish Ojha के under training के लिए भेजा गया। Rajasthan Royals के अनुसार Samastipur से Patna तक लगभग 100 किलोमीटर की यात्रा उन्हें अपने पिता के साथ करनी पड़ती थी। यही routine उनकी शुरुआती cricket journey का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।

बहुत कम उम्र में बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने का अनुभव भी उन्हें मिला। जनवरी 2024 में उन्होंने Bihar के लिए Ranji Trophy में debut किया। उस समय वे सिर्फ 12 साल के थे। Bihar और Mumbai के बीच Patna में खेले गए उस मैच में ESPN के scorecard में उनका first-class debut दर्ज है। (ESPN India)

इसके बाद उनका career तेजी से आगे बढ़ा। 2024 के अंत में Rajasthan Royals ने उन्हें IPL auction में ₹1.10 करोड़ में खरीदा। IPL 2025 में debut के बाद Gujarat Titans के खिलाफ 35 गेंदों में century ने उन्हें international cricket की सबसे चर्चित young batting prospects में ला दिया। (Rajasthan Royals)

2026 में उन्होंने U19 World Cup में India के लिए शानदार प्रदर्शन किया, IPL में 776 runs बनाए और फिर July में senior India team के लिए T20I debut किया। (icc)

प्रारंभिक जीवन और परिवार

Vaibhav का जन्म ताजपुर, समस्तीपुर, बिहार में हुआ। उनके पिता का नाम Sanjeev Sooryavanshi  है। उपलब्ध interviews में Sanjeev ने बताया है कि उन्होंने अपने बेटे को कम उम्र से ही बड़े और तेज गेंदबाजों का सामना करने के लिए तैयार किया। (Hindustan Times)

यहाँ Vaibhav की कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू दिखाई देता है। उनके cricket career की शुरुआत किसी बड़े metropolitan cricket setup से नहीं हुई थी। परिवार को training के लिए Patna जाना पड़ता था और उनके पिता स्वयं इस process का हिस्सा बने रहे। Rajasthan Royals की official profile भी Patna की academy तक की इस journey को उनकी शुरुआती development का हिस्सा बताती है। (Rajasthan Royals)

पिता Sanjeev की भूमिका

Sanjeev का अपना cricket background professional level तक नहीं पहुंचा था, लेकिन उन्होंने Vaibhav की talent को बहुत जल्दी पहचान लिया। Hindustan Times के साथ 2024 में बातचीत में उन्होंने बताया था कि जब Vaibhav 9–10 साल के थे, तब वे उन्हें local fast bowlers के सामने खेलने के लिए तैयार करते थे। (Hindustan Times)

Vaibhav Sooryavanshi की शिक्षा

Vaibhav अभी बहुत कम उम्र में professional cricket खेलने वाले खिलाडी हैं और उनकी formal schooling जारी रहने की जानकारी media reports में मिलती है।

2026 में प्रकाशित एक report के अनुसार वे Dr. Mukteshwar Sinha Modesty School, Tajpur में पढ़ते हैं और Class 10 board examinations की तैयारी कर रहे थे।

उनकी कोई college degree या university qualification अभी applicable नहीं है। वे अभी school-age student हैं और साथ-साथ professional-level cricket खेल रहे हैं।

Cricket Career की शुरुआत

Vaibhav के career की सबसे दिलचस्प बात उनकी उम्र नहीं, बल्कि यह है कि उन्होंने कम उम्र में लगातार अलग-अलग levels पर transition किया।

उनकी शुरुआती professional training Patna की GenNex Cricket Academy में हुई, जहाँ Manish Ojha ने उन्हें coach किया। Rajasthan Royals की official profile के अनुसार Vaibhav के पिता उन्हें training के लिए Samastipur से Patna ले जाते थे। (Rajasthan Royals)

2024 में उनकी domestic cricket journey ने बड़ा मोड़ लिया।

Ranji Trophy Debut — 2024

5 जनवरी 2024 को Bihar और Mumbai के बीच Ranji Trophy match में Vaibhav ने first-class debut किया। उस समय उनकी उम्र सिर्फ 12 साल थी। ESPN के match records में उनका नाम Bihar के first-class debutants में दर्ज है। (ESPN India)

उनकी debut innings बहुत बड़ी नहीं रही—लेकिन इस stage पर पहुंचना ही अपने आप में unusual था। उस समय उनका सामना Mumbai जैसे मजबूत domestic cricket side से था।

यहीं से Vaibhav की journey age-group cricket से senior domestic cricket की ओर तेजी से बढ़ने लगी।

IPL में Entry

2024 के IPL auction में Vaibhav Sooryavanshi का नाम आने के साथ उनकी कहानी national attention में आ गई।

Rajasthan Royals ने उन्हें ₹1.10 करोड़ में खरीदा। वह उस समय IPL auction में शामिल होने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में नहीं बल्कि record-setting youngest entrant के रूप में चर्चा में आए। Rajasthan Royals ने अपनी official announcement में बताया कि उन्हें ₹1.1 crore में खरीदा गया था। (Rajasthan Royals)

इसका महत्व इसलिए भी था क्योंकि Vaibhav तब केवल 13 वर्ष के थे। यानी वे उस stage पर पहुंचे जहाँ कई cricketers अभी junior-level cricket खेल रहे होते हैं।

IPL Debut — 2025

19 अप्रैल 2025 को Lucknow Super Giants के खिलाफ Vaibhav ने IPL debut किया। उन्होंने अपने debut में 20 balls पर 34 runs बनाए और पहली ही गेंद पर छक्का लगाने के कारण भी चर्चा में आए। (icc)

लेकिन उनके debut season का सबसे बड़ा moment कुछ ही दिन बाद आया।

35 गेंदों में Century

28 अप्रैल 2025 को Gujarat Titans के खिलाफ Vaibhav ने 38 balls में 101 runs बनाए। उनकी century केवल 35 balls में पूरी हुई।

यह innings इसलिए ऐतिहासिक थी क्योंकि वे men’s T20 cricket में century बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में record स्थापित करने में सफल हुए और IPL में उनकी पहचान एक fearless attacking batter के रूप में बनने लगी। (IPL)

IPL 2025 में उन्होंने 7 matches में 252 runs बनाए और उनका strike rate 206.56 रहा। (icc)

2025: Domestic Cricket और National Recognition

IPL के बाद भी Vaibhav की progress केवल T20 cricket तक सीमित नहीं रही।

दिसंबर 2025 में Vijay Hazare Trophy में Bihar की ओर से Arunachal Pradesh के खिलाफ उन्होंने 190 runs off 84 balls बनाए। इस innings में century सिर्फ 36 balls में आई। इस प्रदर्शन ने उन्हें List A cricket में भी record books में पहुंचाया। (Rajasthan Royals)

इसी period में उन्हें Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar 2025 के Sports category में सम्मानित किया गया। 26 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उन्हें Rashtrapati Bhavan में यह award प्रदान किया। (Rajasthan Royals)

यह award उनके career में इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि recognition केवल IPL performance तक सीमित नहीं था; domestic और age-group cricket में उनके प्रदर्शन ने भी इसमें भूमिका निभाई।

2026 U19 World Cup: Career का बड़ा Turning Point

2026 की शुरुआत Vaibhav के career के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही।

India ने ICC Under-19 World Cup जीता और Vaibhav इस campaign के सबसे महत्वपूर्ण performers में रहे। पूरे tournament में उन्होंने 439 runs बनाए। (icc)

लेकिन final में उनका प्रदर्शन पूरी tournament story को अलग स्तर पर ले गया।

England के खिलाफ 175 runs

6 फरवरी 2026 को England U19 के खिलाफ final में Vaibhav ने केवल 80 balls में 175 runs बनाए।

इस innings में 15 fours और 15 sixes शामिल थे। ICC के अनुसार यह Under-19 World Cup final में अब तक का highest individual score था। उनकी innings ने India को 100-run victory दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (icc)

पूरे tournament के प्रदर्शन के लिए उन्हें Player of the Tournament चुना गया और ICC ने उन्हें Team of the Tournament में भी शामिल किया। (icc)

यह Vaibhav के career का बड़ा turning point था। अब उनकी पहचान केवल IPL के युवा batter के रूप में नहीं रही; वे international age-group cricket के सबसे prominent performers में शामिल हो गए।

IPL 2026: 776 Runs और Orange Cap

अगर 2025 में Vaibhav ने अपना परिचय दिया था, तो IPL 2026 में उन्होंने अपनी batting को एक अलग स्तर पर पहुंचाया।

Rajasthan Royals के लिए 16 matches में उन्होंने:

  • 776 runs
  • 48.50 average
  • 237.30 strike rate
  • 1 century
  • 5 fifties
  • 72 sixes

लगाए। Rajasthan Royals के official season report के अनुसार वे टीम के leading run-scorer रहे। (Rajasthan Royals)

उनका सबसे बड़ा score Sunrisers Hyderabad के खिलाफ 103 runs off 37 balls रहा। इसके अलावा उन्होंने 97 off 29, 96 off 47 और 93 off 38 जैसी कई explosive innings खेलीं। (Rajasthan Royals)

सीजन के अंत में उन्होंने Orange Cap जीती और Rajasthan Royals की official profile के अनुसार Most Valuable Player तथा Emerging Player जैसे प्रमुख individual honours भी अपने नाम किए। (Rajasthan Royals)

यह performance इसलिए भी असाधारण रही क्योंकि वह अभी केवल 15 वर्ष के थे।

India A से Senior India Team तक

IPL 2026 के बाद Vaibhav को India A setup में भी मौका मिला।

BCCI ने मई 2026 में उन्हें Sri Lanka में होने वाली India A tri-series के squad में शामिल किया। (BCCI)

Tri-series के final में उन्होंने 94 runs की तेज innings खेली। इसके बाद senior selection committee ने उन्हें Ireland और England के खिलाफ India की T20I squads में शामिल किया। (BCCI)

फिर आया 4 जुलाई 2026।

India T20I Debut और Sachin Tendulkar का Record

England के खिलाफ Manchester में खेले गए दूसरे T20I में Vaibhav को India की playing XI में शामिल किया गया।

उस दिन उन्होंने 15 साल और 99 दिन की उम्र में India के लिए international debut किया। इस तरह उन्होंने Sachin Tendulkar के 16 साल 205 दिन की उम्र में international debut करने के record को पीछे छोड़ दिया और India के youngest male international debutant बने। (Reuters)

Debut में Vaibhav ने 10 balls पर 14 runs बनाए। Score बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन उस innings की historical significance उसके runs से कहीं अधिक थी। (Reuters)

Zimbabwe Series में वापसी

England series में शुरुआती matches के बाद Vaibhav को Zimbabwe tour में फिर मौका मिला।

23 जुलाई 2026 को Zimbabwe के खिलाफ पहले T20I में उन्होंने तेज half-century बनाई। पूरी तीन-match series में उनके बल्ले से 151 runs आए। तीसरे T20I में उन्होंने 81 runs की महत्वपूर्ण innings खेली और India ने series 3–0 से जीती। (The Indian Express)

यह phase उनके career के लिए एक अलग तरह का test था। IPL की high-scoring environment से international cricket में transition हमेशा सीधा नहीं होता, और Vaibhav ने Zimbabwe में फिर से scoring rhythm हासिल की।

TIME 100 Next में नाम

1 अक्टूबर 2026 को Vaibhav को TIME 100 Next 2026 list में शामिल किया गया।

Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार वे इस list में शामिल होने वाले एकमात्र Indian athlete और सबसे कम उम्र के honouree हैं। यह recognition cricket statistics से अलग है क्योंकि TIME 100 Next emerging personalities को global level पर पहचानने वाली list है। (The Indian Express)

यह उनकी 2026 journey के लिए एक नया milestone है—एक ही साल में U19 World Cup success, IPL dominance, senior India debut और global recognition।

Vaibhav Sooryavanshi की प्रमुख उपलब्धियां

वर्ष उपलब्धि महत्व
2024 Bihar के लिए Ranji Trophy debut 12 वर्ष की उम्र में senior first-class cricket
2024 Rajasthan Royals द्वारा ₹1.10 करोड़ में चयन IPL career का रास्ता खुला
2025 IPL debut IPL history के youngest debutants में शामिल
2025 Gujarat Titans के खिलाफ 101 35 balls में century
2025 Vijay Hazare Trophy में 190 List A cricket में बड़ा record
2025 Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar National-level Sports recognition
2026 U19 World Cup India champion
2026 U19 final में 175 U19 World Cup final का highest individual score
2026 U19 Player of the Tournament Tournament का सर्वोच्च individual recognition
2026 IPL में 776 runs Rajasthan Royals के top scorer
2026 IPL Orange Cap Season’s leading run-scorer
2026 India T20I debut India’s youngest male international debutant
2026 Zimbabwe T20I series में 151 runs Senior international cricket में बड़ा contribution
2026 TIME 100 Next Global emerging talent recognition

संबंधित records और awards के लिए IPL/RR, ICC और BCCI sources का उपयोग किया गया है। (Rajasthan Royals)

जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं: Timeline

2011 → जन्म
27 मार्च 2011 को ताजपुर, समस्तीपुर, बिहार में जन्म। (Rajasthan Royals)

लगभग 2019 → Patna में cricket training
करीब आठ साल की उम्र में GenNex Cricket Academy में training शुरू करने की जानकारी Rajasthan Royals की profile में दी गई है। (Rajasthan Royals)

जनवरी 2024 → Ranji Trophy debut
12 साल की उम्र में Bihar के लिए first-class debut। (ESPN India)

नवंबर 2024 → IPL auction
Rajasthan Royals ने ₹1.10 करोड़ में खरीदा। (Rajasthan Royals)

अप्रैल 2025 → IPL debut
LSG के खिलाफ IPL debut। (icc)

अप्रैल 2025 → 35-ball IPL century
Gujarat Titans के खिलाफ 101 off 38। (IPL)

दिसंबर 2025 → National award
Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar मिला। (Rajasthan Royals)

फरवरी 2026 → U19 World Cup final
England के खिलाफ 175 off 80 और Player of the Tournament। (icc)

मई 2026 → IPL 2026 समाप्त
16 matches में 776 runs और Orange Cap। (Rajasthan Royals)

4 जुलाई 2026 → India debut
15 years 99 days की उम्र में India T20I debut। (Reuters)

जुलाई 2026 → Zimbabwe series
तीन T20Is में 151 runs। (Vaibhav Sooryavanshi)

1 अक्टूबर 2026 → TIME 100 Next
TIME 100 Next 2026 में नाम और India के लिए senior T20I setup में बने हुए। (The Indian Express)

Vaibhav Sooryavanshi की Salary और Net Worth

Vaibhav की verified net worth का कोई authoritative public figure उपलब्ध नहीं है।

कुछ biography websites ₹2 करोड़, ₹2.5 करोड़ या ₹3 करोड़ जैसी figures प्रकाशित करती हैं, लेकिन ये figures स्पष्ट audited financial records या official disclosure पर आधारित दिखाई नहीं देतीं। इसलिए उन्हें verified net worth कहना सही नहीं होगा।

हाँ, IPL 2025 auction में Rajasthan Royals द्वारा उनकी ₹1.10 करोड़ की winning bid documented है। यह IPL contract value है; इसे सीधे उनकी net worth या हाथ में मिलने वाली income नहीं माना जाना चाहिए। (Rajasthan Royals)

Vaibhav Sooryavanshi के 10 Interesting Facts

  1. उनका जन्म 27 मार्च 2011 को बिहार के ताजपुर में हुआ था। (Rajasthan Royals)
  2. लगभग आठ साल की उम्र में वे Patna की GenNex Cricket Academy में training करने लगे थे। (Rajasthan Royals)
  3. उन्होंने सिर्फ 12 साल की उम्र में Ranji Trophy debut किया। (ESPN India)
  4. Rajasthan Royals ने उन्हें केवल 13 वर्ष की उम्र में ₹1.10 करोड़ में खरीदा था। (Rajasthan Royals)
  5. IPL 2025 में उन्होंने 35 balls में century पूरी की। (IPL)
  6. 2025 में उन्हें Pradhan Mantri Rashtriya Bal Puraskar के Sports category में सम्मानित किया गया। (Rajasthan Royals)
  7. U19 World Cup 2026 final में उनके 175 runs tournament final का highest individual score बना। (icc)
  8. IPL 2026 में उन्होंने 776 runs और 72 sixes लगाए। (Rajasthan Royals)
  9. 4 जुलाई 2026 को वे 15 साल 99 दिन की उम्र में India के youngest male international debutant बने। (Reuters)
  10. 1 अक्टूबर 2026 को वे TIME 100 Next में शामिल हुए और list में अकेले Indian athlete बताए गए। (The Indian Express)

Challenges और Turning Points

Vaibhav की journey में सबसे बड़ा challenge केवल cricket competition नहीं था। कम उम्र में senior cricket में खेलने का मतलब था कि उन्हें ऐसे खिलाड़ियों के खिलाफ उतरना पड़ा जो उनसे उम्र और physical maturity में काफी आगे थे।

Ranji Trophy debut इसका पहला उदाहरण था। 12 साल की उम्र में Mumbai के खिलाफ first-class cricket खेलना technically एक बड़ी jump थी। (ESPN India)

दूसरा बड़ा turning point IPL था। 2025 में एक teenager के रूप में 35-ball century ने expectations बहुत बढ़ा दीं। लेकिन 2026 में senior international cricket में जाने से पहले उन्हें अलग-अलग formats और levels पर अपने game को adapt करना पड़ा।

England T20I series में शुरुआती opportunities सीमित रहीं, लेकिन Zimbabwe tour में उन्होंने 18/19-ball fifty और फिर 81-run innings के साथ वापसी की। (The Indian Express)

इससे उनकी journey का एक महत्वपूर्ण practical aspect सामने आता है—record बनने के बाद भी अगली challenge उसी performance को नए level पर दोहराना होती है।

FAQ: Vaibhav Sooryavanshi

Vaibhav Sooryavanshi कौन हैं?

Vaibhav Sooryavanshi बिहार के युवा left-handed Indian cricketer हैं। वे domestic cricket में Bihar और IPL में Rajasthan Royals से जुड़े हैं। 2026 में उन्होंने India के लिए T20I debut किया और 15 वर्ष 99 दिन की उम्र में India’s youngest male international debutant बने। (Reuters)

Vaibhav Sooryavanshi का जन्म कब हुआ?

उनका जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था। Rajasthan Royals की official player profile के अनुसार उनका birthplace ताजपुर, Samastipur district, Bihar है। (Rajasthan Royals)

Vaibhav Sooryavanshi की उम्र कितनी है?

1 अक्टूबर 2026 के अनुसार Vaibhav Sooryavanshi 15 वर्ष के हैं। उनका जन्म 27 मार्च 2011 को हुआ था।

Vaibhav Sooryavanshi के पिता का नाम क्या है?

उनके पिता का नाम Sanjeev Sooryavanshi है। उपलब्ध interviews के अनुसार Sanjeev ने Vaibhav की शुरुआती cricket training और development में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। (Hindustan Times)

Vaibhav Sooryavanshi ने Ranji Trophy कब खेली?

उन्होंने जनवरी 2024 में Bihar के लिए Ranji Trophy debut किया। Bihar और Mumbai के बीच 5 जनवरी 2024 से शुरू हुए Patna match में ESPN के scorecard में उनका first-class debut दर्ज है। (ESPN India)

Vaibhav Sooryavanshi को IPL में कितने रुपये में खरीदा गया था?

Rajasthan Royals ने IPL 2025 Mega Auction में उन्हें ₹1.10 करोड़ में खरीदा था। उस समय वे केवल 13 वर्ष के थे। (Rajasthan Royals)

Vaibhav Sooryavanshi ने IPL में century कितनी गेंदों में लगाई?

उन्होंने IPL 2025 में Gujarat Titans के खिलाफ century 35 balls में पूरी की। पूरी innings में उन्होंने 38 balls पर 101 runs बनाए। (IPL)

Vaibhav Sooryavanshi ने India के लिए debut कब किया?

उन्होंने 4 जुलाई 2026 को England के खिलाफ Manchester में T20I debut किया। उस समय उनकी उम्र 15 वर्ष और 99 दिन थी, जिससे वे India’s youngest male international debutant बने। (Reuters)

Vaibhav Sooryavanshi की net worth कितनी है?

उनकी verified net worth का कोई authoritative public figure उपलब्ध नहीं है। Internet पर ₹2–3 करोड़ जैसी कई estimates मिलती हैं, लेकिन उनके लिए पर्याप्त authoritative financial disclosure उपलब्ध नहीं है। IPL 2025 में उनका documented contract value ₹1.10 करोड़ था। (Rajasthan Royals)

Vaibhav Sooryavanshi ने U19 World Cup में कितना score किया?

2026 U19 World Cup में उन्होंने 439 runs बनाए। England के खिलाफ final में उन्होंने 80 balls पर 175 runs बनाए और Player of the Tournament चुने गए। (icc)

2026 IPL में Vaibhav Sooryavanshi ने कितने runs बनाए?

Rajasthan Royals के लिए IPL 2026 में उन्होंने 16 matches में 776 runs बनाए, उनका average 48.50 और strike rate 237.30 रहा। उन्होंने season में 72 sixes लगाए। (Rajasthan Royals)

निष्कर्ष

Vaibhav Sooryavanshi की biography को केवल “कम उम्र में cricket खेलने वाले खिलाड़ी” की कहानी मानना उनकी journey को छोटा कर देता है। उनकी progress को बेहतर तरीके से समझने का तरीका है—Tajpur → Patna academy → Bihar domestic cricket → Ranji Trophy → Rajasthan Royals → IPL records → U19 World Cup → India T20I team।

2024 में वे एक बेहद युवा domestic cricketer थे। 2025 में IPL और national award ने उन्हें national spotlight में पहुंचाया। 2026 में U19 World Cup final की 175-run innings, IPL के 776 runs और India debut ने उनकी journey को अगले स्तर पर पहुंचा दिया। (icc)

और 1 अक्टूबर 2026 को TIME 100 Next में उनका नाम आना इस बात का latest indication है कि उनकी पहचान अब केवल Bihar या Indian domestic cricket तक सीमित नहीं रही है। (The Indian Express)

हालांकि उनके career का senior international phase अभी शुरुआती दौर में है। इसलिए उनकी biography में सबसे उचित approach यही है कि अब तक के documented achievements को दर्ज किया जाए और भविष्य के बारे में अनुमान लगाने के बजाय उनके आगे के performances को देखा जाए।


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Divya Mittal IAS Biography Hindi – IIT-IIM से London की नौकरी और फिर IAS बनने की कहानी

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Divya Mittal IAS Biography Hindi

दिव्या मित्तल IAS का जीवन परिचय (Divya Mittal IAS Biography Hindi) सिर्फ एक सफल IAS officer की कहानी नहीं है। यह कहानी है एक ऐसी महिला की, जिसने IIT Delhi से Engineering, IIM Bangalore से MBA और London में J.P. Morgan जैसी कंपनी में नौकरी करने के बाद भी अपनी जिंदगी की दिशा बदलने का फैसला किया।

एक समय उनके पास विदेश की अच्छी नौकरी थी, लेकिन उन्होंने वह career छोड़कर भारत लौटने और UPSC Civil Services Examination की तैयारी करने का फैसला किया।

उन्होंने UPSC को एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार clear किया—पहली बार IRS, दूसरी बार IPS और तीसरी बार IAS। उनकी तीसरी कोशिश में उन्हें All India Rank 68 मिली और उत्तर प्रदेश कैडर मिला।  IAS बनने के बाद उनकी posting उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हुई। उन्होंने Meerut, Gonda, Kanpur, Bareilly, Sant Kabir Nagar, Mirzapur और Deoria जैसे स्थानों पर अलग-अलग प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। (Mirzapur)

लेकिन उनकी पहचान सबसे ज्यादा तब बनी जब उन्होंने Mirzapur के पहाड़ी गांव Lahuria Dah में दशकों से चले आ रहे पानी के संकट को दूर करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को जमीन पर उतारा। और इस कहानी का सबसे भावुक दृश्य वह था, जब गांव में पहली बार नल से पानी आया और एक बुजुर्ग महिला ने उनके सिर पर हाथ रखकर उन्हें आशीर्वाद दिया। दिव्या मित्तल ने बाद में लिखा कि वह स्पर्श उनके लिए किसी भी पद से ज्यादा यादगार रहा। (NDTV India)

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। 2023 में Mirzapur से उनका transfer भी चर्चा में रहा। इसके बाद waiting period, नई posting, Deoria में प्रशासनिक घटनाएं और अंततः अगस्त 2026 में 13 साल की IAS सेवा से इस्तीफा—उनका career कई उतार-चढ़ाव से गुजरा।

आइए, जानते हैं दिव्या मित्तल की पूरी कहानी।


दिव्या मित्तल कौन हैं?

दिव्या मित्तल 2013 बैच की Uttar Pradesh cadre IAS officer रही हैं।

वह मूल रूप से Rewari, Haryana से जुड़ी हैं और उन्होंने देश के दो प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई की—IIT Delhi और IIM Bangalore। इसके बाद उन्होंने London में financial sector में काम किया। (Hindustan Times)

IAS बनने से पहले उनका career corporate finance में था। लेकिन विदेश में अच्छी नौकरी होने के बावजूद उन्होंने Civil Services को अपना अगला लक्ष्य बनाया। उनका administrative career लगभग 13 साल चला।

इस दौरान वह:

  • NITI Aayog में Assistant Secretary
  • Meerut में Joint Magistrate/SDM
  • Gonda में Chief Development Officer
  • UPSIDC में Joint Managing Director
  • Bareilly Development Authority में Vice Chairperson
  • Sant Kabir Nagar की DM
  • Mirzapur की DM
  • Deoria की DM
  • UP Rural Road Development Agency की CEO
  • और अंत में Revenue Department में Special Secretary

जैसी जिम्मेदारियों पर रहीं। (Mirzapur)


दिव्या मित्तल की पढ़ाई कहां से हुई?

दिव्या मित्तल की education उनकी biography का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने IIT Delhi से B.Tech किया।

इसके बाद उन्होंने IIM Bangalore से MBA/PGDM किया।

उनकी academic journey थी:

IIT Delhi → IIM Bangalore → London → UPSC → IAS

उनकी अपनी LinkedIn profile और पुराने civil-services blog में IIT Delhi तथा IIM Bangalore की education का उल्लेख मिलता है। (LinkedIn)

यहां एक महत्वपूर्ण बात है। कई लोगों को लगता है कि IIT और IIM से पढ़ने के बाद career अपने आप तय हो जाता है। लेकिन दिव्या मित्तल की कहानी इसके उलट है। उन्होंने पहले Engineering की। फिर Management किया। फिर London में finance sector में career बनाया। और उसके बाद उस career को छोड़कर बिल्कुल अलग क्षेत्र—Public Administration—में चली गईं।


London में J.P. Morgan की नौकरी

IIM Bangalore से पढ़ाई पूरी करने के बाद दिव्या मित्तल London चली गईं।

वहां उन्होंने J.P. Morgan में financial sector में काम किया और exotic derivatives से जुड़ी भूमिका निभाई। उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार उनका यह corporate stint 2007 के आसपास शुरू हुआ था। (NDTV India)

यह नौकरी किसी सामान्य शुरुआती career की तरह नहीं थी। एक तरफ London की अच्छी corporate job थी। दूसरी तरफ भारत में लौटकर UPSC की तैयारी करने का अनिश्चित रास्ता।

और उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।


आखिर London की नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी क्यों की?

यह दिव्या मित्तल की जिंदगी का सबसे बड़ा turning point था। उनकी जिंदगी बाहर से काफी सफल दिखाई देती थी।

अच्छी education।

IIT की degree।

IIM की degree।

London की नौकरी।

लेकिन उनके लिए केवल पैसा और corporate success पर्याप्त नहीं था।

उन्होंने भारत लौटकर Civil Services की तैयारी शुरू की।

2026 में अपनी education पर लिखते हुए उन्होंने यह भी कहा कि elite education ने उन्हें कठिन exams और बड़ी responsibilities संभालना तो सिखाया, लेकिन जीवन की कुछ दूसरी महत्वपूर्ण चीजें—जैसे emotional well-being, loneliness और self-understanding—नहीं सिखाईं। (LinkedIn)

यानी समय के साथ उनके लिए सफलता का अर्थ भी बदलता गया।


UPSC में पहली बार नहीं मिली IAS

यह बात UPSC aspirants के लिए शायद उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा है। दिव्या मित्तल ने UPSC Civil Services Examination को लगातार तीन बार clear किया। उनके अपने civil-services blog के अनुसार:

वर्ष Rank Service
CSE 2010 AIR 332 IRS (Income Tax)
CSE 2011 AIR 134 IPS
CSE 2012 AIR 68 IAS

(Divya Mittal)

यानी पहली सफलता के बाद भी उन्होंने रुकने का फैसला नहीं किया। उन्हें IRS मिला। फिर उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और IPS मिला। लेकिन उनका लक्ष्य IAS था। इसलिए उन्होंने तीसरी बार फिर परीक्षा दी। और इस बार AIR 68 के साथ IAS हासिल किया।

यही उनकी कहानी का एक बहुत बड़ा lesson है:

पहली सफलता हमेशा आपकी अंतिम मंजिल नहीं होती।


LBSNAA में भी मिली बड़ी उपलब्धि

IAS बनने के बाद training के दौरान भी दिव्या मित्तल ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration (LBSNAA), Mussoorie में training के दौरान उन्हें Ashok Bambawale Memorial Award मिला। यह award outstanding IAS officer trainee के प्रदर्शन के लिए दिया जाता है। LBSNAA के official award document में Divya Mittal का नाम और उनके award-winning score का उल्लेख है। (LBSNAA)

इसका मतलब यह है कि उनकी कहानी केवल UPSC rank तक सीमित नहीं थी। Training के दौरान भी उनका performance मजबूत रहा।


IAS बनने के बाद पहली बड़ी जिम्मेदारी – Meerut

IAS career की शुरुआत में दिव्या मित्तल को Meerut में Joint Magistrate/SDM के रूप में काम करने का अवसर मिला। यह उनके field administration career की शुरुआत थी।

यहां से उनका career केवल files और policy तक सीमित नहीं रहा।

अब उन्हें सीधे जमीन पर:

  • कानून-व्यवस्था
  • राजस्व
  • जनशिकायत
  • स्थानीय प्रशासन
  • सरकारी योजनाओं

जैसी जिम्मेदारियों से सामना करना था।

उपलब्ध posting records के अनुसार उन्होंने 2015 से 2017 तक Meerut में काम किया। (AajTak)


Gonda में Chief Development Officer बनीं

Meerut के बाद उन्हें Gonda में Chief Development Officer (CDO) बनाया गया। यह posting इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि अब उनका काम केवल law and order तक सीमित नहीं था। CDO के रूप में rural development और सरकारी योजनाओं के implementation से उनका सीधा संबंध था। यहीं से उनके career में development administration का अनुभव और गहरा हुआ।

2017 से 2018 के दौरान उन्होंने Gonda में CDO के रूप में काम किया। (Mirzapur)


NITI Aayog में भी किया काम

उनके career का एक अलग chapter था NITI Aayog। वहां उन्होंने Assistant Secretary के रूप में काम किया।

Mirzapur district administration की official profile के अनुसार, NITI Aayog में उनके कार्यकाल के दौरान उनके presentation को उन पांच presentations में चुना गया जिन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्तुत किया गया था। (Mirzapur)

यह अनुभव महत्वपूर्ण था क्योंकि district administration से अलग यहां उन्हें national-level policy perspective देखने का अवसर मिला।


Sant Kabir Nagar की DM बनीं

इसके बाद दिव्या मित्तल को Sant Kabir Nagar का District Magistrate बनाया गया। यह उनके career का महत्वपूर्ण field posting phase था। DM के रूप में उन्हें जिले की overall administration की जिम्मेदारी मिली। यहीं से public-facing officer के रूप में उनकी पहचान और मजबूत हुई। इसके बाद सितंबर 2022 में उन्हें Mirzapur का District Magistrate बनाया गया। (NDTV India)

और यहीं उनकी सबसे चर्चित कहानी शुरू हुई।


Mirzapur का Lahuria Dah: जहां पानी पहुंचना भी मुश्किल था

Mirzapur का Lahuria Dah गांव पहाड़ी इलाके में स्थित है।

गांव की सबसे बड़ी समस्या थी— पानी।

लंबे समय तक यहां के लोग पानी के लिए tanker, दूर स्थित जलस्रोत और अन्य अस्थायी साधनों पर निर्भर रहे। दिव्या मित्तल के Mirzapur DM बनने के बाद इस समस्या को गंभीरता से लिया गया। पुराने surveys में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण गांव तक piped water पहुंचाना कठिन बताया गया था।

लेकिन इस बार approach अलग थी। नए सिरे से survey कराया गया। इंजीनियरों के साथ water-lifting system पर काम हुआ। Project को source, pumping, storage और distribution जैसे चरणों में बांटकर लागू किया गया।

और सबसे महत्वपूर्ण बात—

अधिकारी केवल office में बैठकर review नहीं कर रहे थे, बल्कि project की field-level monitoring भी की गई। (NDTV India)


75 साल बाद गांव के नल में आया पानी

लगभग नौ महीने की मेहनत के बाद अगस्त 2023 में Lahuria Dah के घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचा। रिपोर्टों के अनुसार उस समय गांव के करीब 125 घरों तक पानी पहुंचा था। (NDTV India)

यह सिर्फ एक सरकारी project नहीं था। कई लोगों के लिए यह उनके जीवन में पहली बार घर के नल से पानी आने का अनुभव था। और फिर हुआ वह दृश्य जिसने दिव्या मित्तल की पूरी administrative journey पर गहरी छाप छोड़ी।


वह बुजुर्ग महिला, जिसने सिर पर हाथ रखा

जब गांव में पानी पहुंचा तो एक बुजुर्ग महिला ने दिव्या मित्तल के सिर पर हाथ रखा। वह भावुक थीं।

दिव्या मित्तल भी भावुक हो गईं। बाद में उन्होंने इस घटना को याद करते हुए बताया कि उस बुजुर्ग महिला का स्पर्श और आशीर्वाद उनके लिए बहुत खास था।

अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफे की अपनी farewell post में भी उन्होंने इस महिला को याद किया। उन्होंने लिखा कि पद चला गया, लेकिन उस महिला का वह स्पर्श जीवन भर उनके साथ रहेगा। (NDTV India)

शायद यही वह क्षण था जिसने उन्हें यह महसूस कराया कि bureaucracy में किसी file को मंजूर करने से ज्यादा महत्वपूर्ण कभी-कभी यह होता है कि उसका असर किसी इंसान की जिंदगी में दिखाई दे।

दिव्या मित्तल ने बाद में अपने अनुभव को एक line में व्यक्त किया:

“Mirzapur taught me that ‘impossible’ is not a fact, but just an opinion.” (mint)


लेकिन पानी की कहानी के तुरंत बाद हुआ Transfer

Lahuria Dah में पानी पहुंचने के कुछ ही समय बाद दिव्या मित्तल का Mirzapur से transfer कर दिया गया। 30 अगस्त 2023 को गांव में पानी पहुंचा और उसके बाद उनके द्वारा किए गए एक छोटे “jal pujan” कार्यक्रम को लेकर protocol से जुड़ा विवाद सामने आया। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, उनके transfer के पीछे “protocol violation” को लेकर सवाल उठाए गए थे। (The Indian Express)

सितंबर 2023 में उन्हें Mirzapur से हटाया गया और कुछ समय के लिए वह waiting list पर रहीं। इस transfer को लेकर Mirzapur में काफी public reaction भी सामने आया। (The Indian Express)

यह episode उनकी कहानी का एक दूसरा पहलू दिखाता है।

एक तरफ ground-level achievement की प्रशंसा थी, दूसरी तरफ administrative protocol को लेकर विवाद।

किसी भी civil servant का career केवल उपलब्धियों से नहीं चलता। उसे rules, protocol, elected representatives और administrative hierarchy—सभी के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।


Deoria की DM बनीं तो फिर चर्चा में आईं

जुलाई 2024 में दिव्या मित्तल को Deoria का District Magistrate बनाया गया।  Deoria में भी उन्होंने field administration पर जोर दिया।

एक उल्लेखनीय पहल में उन्होंने एक सरकारी गाड़ी रुकवाकर सड़क किनारे मौजूद स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों की समस्या सुनी और अधिकारियों को मामले की जांच के निर्देश दिए। (Oneindia Hindi)

एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने 12वीं की एक छात्रा को कुछ समय के लिए DM की भूमिका का अनुभव भी कराया। इस तरह के प्रयासों का उद्देश्य बच्चों को प्रशासन और public service के प्रति प्रेरित करना था। (Navbharat Times)


स्कूल मांगने वाली बुजुर्ग महिला की कहानी

दिव्या मित्तल के resignation के बाद उन्होंने Mirzapur की एक और घटना साझा की, जो शायद Lahuria Dah की पानी वाली कहानी से भी ज्यादा सोचने पर मजबूर करती है।

एक inspection के दौरान उन्हें उम्मीद थी कि गांव की महिला उनसे pension , घर राशन या कोई basic सुविधा मांगेगी। लेकिन उस महिला ने उनसे अपने गांव में school की मांग की। दिव्या मित्तल के अनुसार उन्होंने school sanction कर दिया था, लेकिन बाद में भी construction शुरू नहीं हुआ।

यह घटना उनके लिए bureaucracy की एक बड़ी समस्या को सामने लाती है—

कागज पर मंजूरी और जमीन पर implementation के बीच का अंतर। (The Indian Express)

यही अनुभव बाद में उनके public statements में भी दिखाई दिया, जहां उन्होंने sanctioned schools, roads, land leases और अन्य योजनाओं के ground-level implementation पर सवाल उठाए। (The Indian Express)


2026 में IAS की नौकरी छोड़ने का फैसला

दिव्या मित्तल के career का सबसे बड़ा recent turning point अगस्त 2026 में आया। उन्होंने लगभग 13 साल की IAS service के बाद इस्तीफा देने की घोषणा की। उस समय वह Uttar Pradesh Revenue Department में Special Secretary थीं। (The Indian Express)

उनकी farewell post में उन्होंने अपने पूरे career को याद किया। उन्होंने लिखा कि यह 13 साल उनके लिए unforgettable journey रहे।

लेकिन उन्होंने अपने message में resignation का कोई एक स्पष्ट व्यक्तिगत या प्रशासनिक कारण घोषित नहीं किया। इसलिए उनकी resignation को किसी एक कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा। (mint)


इस्तीफे के बाद भी उनका public-service journey खत्म नहीं हुआ

सितंबर 2026 में दिव्या मित्तल ने अपनी आगे की दिशा के बारे में सार्वजनिक रूप से बताया कि वह राजनीति में प्रवेश करना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी समस्याएं सरकार तक नहीं पहुंचतीं। उन्होंने किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे काम करने के बजाय स्वतंत्र राजनीतिक पहल की बात कही। (The Indian Express)

यह उनके career का नया chapter है। इसलिए आज उनकी biography को केवल “पूर्व IAS officer” तक सीमित करके देखना पूरी कहानी नहीं होगी।


निष्कर्ष

दिव्या मित्तल IAS का जीवन परिचय हमें यह दिखाता है कि सफलता केवल किसी prestigious degree या बड़े पद का नाम नहीं है।

IIT Delhi और IIM Bangalore जैसी शानदार academic background होने के बावजूद दिव्या मित्तल ने अपने career को एक ही दिशा में नहीं चलाया।

उन्होंने London की corporate नौकरी की। फिर उसे छोड़ा। UPSC दिया। और IAS बनने के बाद भी उन्होंने केवल एक तरह का administrative काम नहीं किया। उन्होंने policy, development, industry, urban planning और district administration—कई क्षेत्रों में काम किया। (Divya Mittal)

लेकिन उनके career की सबसे यादगार तस्वीर शायद किसी office की नहीं है। वह तस्वीर है Lahuria Dah की उस बुजुर्ग महिला की, जिसने अपने घर में पानी आते देखा और दिव्या मित्तल के सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया।

दिव्या मित्तल के लिए वह क्षण किसी award से बड़ा बन गया। और शायद यही public service की सबसे बड़ी खूबसूरती है।

2026 में उन्होंने IAS से इस्तीफा देकर अपने career का एक नया अध्याय शुरू किया और राजनीति में प्रवेश की घोषणा की। (The Indian Express)

उनकी कहानी को एक line में कहा जाए तो शायद वह यह होगी—

“करियर बदल सकता है, पद बदल सकता है, रास्ते बदल सकते हैं—लेकिन अगर सीखने और कुछ करने की इच्छा बनी रहे, तो हर मोड़ एक नई शुरुआत बन सकता है।”


दिव्या मित्तल IAS के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

विषय जानकारी
नाम दिव्या मित्तल
IAS Batch 2013
Cadre Uttar Pradesh
मूल स्थान Rewari, Haryana से जुड़ी
B.Tech IIT Delhi
MBA/PGDM IIM Bangalore
विदेश में नौकरी J.P. Morgan, London
UPSC पहली सफलता IRS
UPSC दूसरी सफलता IPS
UPSC तीसरी सफलता IAS
IAS Rank AIR 68
LBSNAA Achievement Ashok Bambawale Memorial Award
NITI Aayog Assistant Secretary
Meerut Joint Magistrate/SDM
Gonda Chief Development Officer
UPSIDC/UPSIDA Joint Managing Director
Bareilly Vice Chairperson, BDA
DM Sant Kabir Nagar
DM Mirzapur
DM Deoria
UPRRDA CEO
अंतिम ज्ञात सरकारी पद Special Secretary, Revenue Department, UP
IAS सेवा लगभग 13 वर्ष
IAS से इस्तीफा अगस्त 2026
2026 में आगे की दिशा राजनीति में प्रवेश की घोषणा

(Mirzapur)


Frequently Asked Questions (FAQs)

दिव्या मित्तल IAS कौन हैं?

दिव्या मित्तल 2013 बैच की Uttar Pradesh cadre IAS officer रही हैं। उन्होंने IIT Delhi और IIM Bangalore से पढ़ाई की और IAS बनने से पहले London में financial sector में काम किया।

दिव्या मित्तल ने कहां से पढ़ाई की?

उन्होंने IIT Delhi से B.Tech और IIM Bangalore से MBA/PGDM किया।

दिव्या मित्तल ने IAS बनने से पहले क्या नौकरी की?

उन्होंने London में J.P. Morgan में financial sector में काम किया और exotic derivatives से जुड़ी भूमिका निभाई।

दिव्या मित्तल ने UPSC कितनी बार पास किया?

उनके अपने civil-services blog के अनुसार उन्होंने लगातार तीन बार UPSC Civil Services Examination clear किया—2010 में IRS, 2011 में IPS और 2012 में IAS।

दिव्या मित्तल की UPSC Rank कितनी थी?

IAS के लिए चयन वाली परीक्षा में उनकी All India Rank 68 थी।

वह Sant Kabir Nagar, Mirzapur और Deoria की District Magistrate रही हैं।

दिव्या मित्तल का Mirzapur में कौन सा काम सबसे ज्यादा चर्चित हुआ?

Mirzapur के Lahuria Dah गांव में piped drinking water पहुंचाने का काम उनके सबसे चर्चित प्रशासनिक कार्यों में रहा। लंबे समय तक tanker पर निर्भर रहे गांव में 2023 में घरों तक पाइपलाइन से पानी पहुंचा।

Lahuria Dah की कहानी इतनी खास क्यों है?

गांव की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण वहां piped water पहुंचाना लंबे समय से मुश्किल माना जाता था। नए survey, water-lifting system और field monitoring के जरिए project को पूरा किया गया और करीब 125 घरों तक पानी पहुंचा।

दिव्या मित्तल का Mirzapur से transfer क्यों हुआ?

पानी पहुंचने के बाद हुए एक “jal pujan” कार्यक्रम को लेकर protocol से संबंधित विवाद सामने आया था। इसके बाद सितंबर 2023 में उनका transfer हुआ और बाद में वह waiting list पर रहीं। इस प्रकरण को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं।

दिव्या मित्तल ने IAS से इस्तीफा क्यों दिया?

उन्होंने अगस्त 2026 में IAS से इस्तीफा देने की घोषणा की, लेकिन अपने सार्वजनिक farewell message में इस्तीफे का कोई एक स्पष्ट प्रशासनिक कारण नहीं बताया। इसलिए उनके इस्तीफे को किसी एक कथित कारण से जोड़ना उचित नहीं होगा।

क्या दिव्या मित्तल अब राजनीति में हैं?

सितंबर 2026 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से राजनीति में प्रवेश करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि वह किसी राजनीतिक दल के झंडे के नीचे नहीं बल्कि स्वतंत्र रूप से लोगों की आवाज बनने की कोशिश करेंगी।


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Dilkhush Kumar Biography Hindi – Rickshaw Driver से RodBez के CEO बनने तक का सफ़र

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Dilkhush Kumar Biography Hindi

दिलखुश कुमार का जीवन परिचय (Dilkhush Kumar Biography Hindi) किसी बड़े शहर के महंगे business school से निकले entrepreneur की कहानी नहीं है। यह कहानी बिहार के सहरसा जिले के बनगांव से निकलने वाले उस युवक की है, जिसने जिंदगी में एक समय रिक्शा चलाया, पटना की सड़कों पर सब्जियां बेचीं और नौकरी के लिए कई बार असफलता देखी। लेकिन आज वही दिलखुश कुमार RodBez के Founder और CEO के रूप में पहचाने जाते हैं।

उनकी कहानी की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ अपनी परिस्थितियों को बदलने का सपना नहीं देखा, बल्कि उन समस्याओं को भी समझा जिन्हें उन्होंने खुद अपनी जिंदगी में महसूस किया था।

यही अनुभव आगे चलकर RodBez के business idea की नींव बना।

और शायद यही वजह है कि दिलखुश कुमार की कहानी केवल एक Bihar Success Story नहीं, बल्कि यह समझने की कहानी भी है कि कभी-कभी जिस समस्या से हम खुद गुजरते हैं, वही समस्या भविष्य में हमारे business का सबसे बड़ा idea बन सकती है।


दिलखुश कुमार कौन हैं?

नाम: दिलखुश कुमार
जन्म/मूल स्थान: बनगांव, सहरसा, बिहार
शिक्षा: 12वीं तक
प्रमुख पहचान: Entrepreneur, RodBez Founder & CEO
प्रमुख कंपनी: RodBez
क्षेत्र: Intercity Mobility / Taxi Service
सह-संस्थापक: सिद्धार्थ शंकर झा
प्रमुख पहचान: Bihar Startup Entrepreneur

 

दिलखुश कुमार बिहार के सहरसा जिले के बनगांव से आते हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत नहीं था। उनके पिता बस चालक थे और परिवार की जिम्मेदारियां भी कम नहीं थीं।

दिलखुश ने 12वीं तक पढ़ाई की, लेकिन आर्थिक परिस्थितियों के कारण आगे की पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था। बाद में नौकरी की तलाश शुरू हुई, लेकिन नौकरी मिलना भी उनके लिए आसान नहीं था। यहीं से उनकी जिंदगी का वह दौर शुरू हुआ जिसे शायद बहुत कम लोग अपने success story का हिस्सा बनाना चाहेंगे।


बचपन से ही जिंदगी आसान नहीं थी

दिलखुश कुमार के पिता बस चलाते थे। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि हर सपना आसानी से पूरा हो सके। ThePrint की एक profile के अनुसार, परिवार के लिए छोटी-छोटी चीजों के लिए भी पैसे जुटाना चुनौती थी; बचपन में साइकिल खरीदने के लिए भी पड़ोसियों से पैसे उधार लेने पड़े थे।  लेकिन दिलखुश के मन में आगे बढ़ने की इच्छा थी। उन्हें गाड़ियों और driving में खास दिलचस्पी थी।

शायद उस समय उन्हें खुद भी पता नहीं था कि यही driving आगे चलकर उनकी जिंदगी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है।


12वीं के बाद शुरू हुई नौकरी की तलाश

पढ़ाई पूरी करने के बाद दिलखुश ने नौकरी की तलाश शुरू की। लेकिन qualification कम थी और आर्थिक जरूरतें ज्यादा। नौकरी पाने के लिए उन्होंने कई जगह कोशिश की। एक interview ऐसा भी आया जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उन्हें एक छोटी नौकरी के लिए interview देना था। लेकिन वहां उन्हें reject कर दिया गया।

Shark Tank India में अपनी कहानी बताते हुए दिलखुश ने बताया कि एक interview में उनसे Apple के logo को पहचानने के लिए कहा गया और वे उसे पहचान नहीं पाए। उनके अनुसार, उन्हें लगा कि उनके साथ appearance और education के आधार पर भी व्यवहार किया गया। इसके बाद उन्होंने नौकरी की तलाश छोड़कर खुद कुछ करने का फैसला किया।  यह rejection उनके लिए सिर्फ एक नौकरी का rejection नहीं था।

यह उनके जीवन का turning point बन गया।


उन्होंने अपने Certificates जला दिए

इस घटना का सबसे भावुक हिस्सा तब आया जब दिलखुश ने बताया कि interview से निराश होकर उन्होंने अपने certificates जला दिए।

यह फैसला आज सुनने में बहुत कठोर लगता है। लेकिन उनके लिए इसका मतलब था—

अब नौकरी के पीछे नहीं भागना है।

अब कुछ अपना करना है। इसके बाद उन्होंने अपने पिता से driving सीखने को कहा। उनके पिता खुद बस चलाते थे और शुरुआत में नहीं चाहते थे कि बेटा भी driving को career बनाए। लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने उन्हें driving सिखाई।

यहीं से दिलखुश की जिंदगी का दूसरा chapter शुरू हुआ।


जब दिलखुश ने दिल्ली में रिक्शा चलाया

आज हम दिलखुश कुमार को एक startup founder के रूप में देखते हैं। लेकिन उनकी कहानी का एक ऐसा हिस्सा है जिसे भूलना आसान है।

उन्होंने दिल्ली में रिक्शा चलाया।

यह वह दौर था जब उनका उद्देश्य कोई startup बनाना नहीं था। उद्देश्य बहुत साधारण था—

कमाना और परिवार चलाना।

एक तरफ लोग बड़े शहरों में अपने career की शुरुआत कर रहे थे, दूसरी तरफ बिहार का यह युवा दिल्ली की सड़कों पर रिक्शा चला रहा था। किसी को उस समय शायद अंदाजा नहीं था कि यही व्यक्ति कुछ वर्षों बाद technology और startup की दुनिया में अपनी जगह बनाएगा।

India Today और ThePrint दोनों ने उनके रिक्शा चलाने और सब्जी बेचने के दौर का उल्लेख किया है। (India Today)


पटना लौटकर सब्जी भी बेची

दिल्ली में रिक्शा चलाने के बाद उनकी जिंदगी पटना की सड़कों तक पहुंची। उन्होंने सब्जियां भी बेचीं।

सोचिए—

एक व्यक्ति जो आगे चलकर startup founder बनने वाला है, उसकी जिंदगी में कभी ऐसा समय भी था जब उसे रोज सड़क पर खड़े होकर सब्जी बेचनी पड़ती थी।

यही वजह है कि दिलखुश की कहानी में “success” से ज्यादा महत्वपूर्ण शब्द है— survival।

उन्होंने कोई काम छोटा नहीं समझा। जिस काम से उस समय परिवार चल सकता था, वह काम किया। यही सोच आगे चलकर उनके entrepreneurial mindset का हिस्सा बनी।


Driving ने बदली जिंदगी की दिशा

दिलखुश के पिता बस driver थे। दिलखुश ने भी driving सीखी। फिर उन्होंने driving को केवल नौकरी के रूप में नहीं देखा। उन्होंने सड़क, यात्रियों और transport business को करीब से देखना शुरू किया। और यही observation आगे चलकर उनके लिए business opportunity बन गई।

उन्हें समझ आने लगा कि बिहार के छोटे शहरों और गांवों में intercity travel की बड़ी समस्या है।

Taxi मिलना आसान नहीं।

एक शहर से दूसरे शहर जाना महंगा।

और कई बार passenger को ऐसी taxi के लिए भी round-trip fare देना पड़ता था, जबकि उसे सिर्फ एक तरफ जाना होता था। दूसरी तरफ taxi driver को passenger छोड़ने के बाद वापसी में खाली आना पड़ता था।

यहीं से दिलखुश के दिमाग में एक सवाल आया—

“अगर जाने वाले passenger और लौटने वाली खाली taxi को आपस में जोड़ दिया जाए तो?”

यही सवाल आगे चलकर RodBez की नींव बना।


2016 में शुरू किया पहला Startup

RodBez से पहले भी दिलखुश ने entrepreneurship की कोशिश की थी। 2016 में उन्होंने AryaGo नाम से cab service शुरू की।

कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने इसके लिए अपनी बचत और बिहार सरकार की startup funding का इस्तेमाल किया। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने Startup योजना के तहत लगभग ₹5.5 लाख का loan लेकर अक्टूबर 2016 में AryaGo शुरू किया था। (Jagran)

इस business से उन्हें केवल पैसा कमाने का मौका नहीं मिला। उन्हें एक और महत्वपूर्ण चीज मिली—

Real-world experience।

उन्हें पता चला कि taxi business में असली समस्या सिर्फ passenger और driver को जोड़ना नहीं है। असली समस्या है—

सही passenger को सही direction में जा रही taxi से जोड़ना।


पहला Business सफल हुआ, फिर भी दिलखुश ने उसे छोड़ दिया

यह उनकी कहानी का सबसे interesting हिस्सा है। कई entrepreneurs के लिए पहला business चल जाना ही बड़ी सफलता होती। लेकिन दिलखुश ने अपने पहले venture से आगे बढ़ने का फैसला किया। उन्होंने महसूस किया कि transport sector में अभी बहुत बड़ी समस्या हल की जा सकती है। और इसी सोच ने उन्हें एक नए startup की ओर बढ़ाया।

RodBez।


RodBez का Idea कैसे आया?

RodBez का मूल idea बहुत simple था। मान लीजिए एक taxi पटना से सहरसा जाती है। Passenger को सिर्फ पटना से सहरसा जाना है। लेकिन driver को वापस पटना भी आना है। अगर driver को return passenger नहीं मिलता, तो उसे खाली गाड़ी वापस लानी पड़ती है। इसका खर्च driver पर पड़ता है। और इसी वजह से passenger से कई बार round-trip fare लिया जाता है।

दिलखुश ने इसी inefficiency को business opportunity के रूप में देखा।

Passenger को केवल अपनी यात्रा का किराया देना पड़े और driver की return journey भी कमाई वाली बन जाए।

RodBez इसी concept पर काम करने लगा।

Official RodBez के अनुसार, company ने one-way taxi और TaxiPool जैसे models विकसित किए, जिनका उद्देश्य passengers के travel cost को कम करना और drivers को empty return trip से बचाना है। (RodBez)


RodBez नाम कैसे पड़ा?

यह भी उनकी कहानी का दिलचस्प हिस्सा है। दिलखुश के पिता transport sector से जुड़े थे और बिहार रोडवेज में काम करते थे। इसी background से प्रेरित होकर startup का नाम RodBez रखा गया।

नाम सुनने में भले ही unusual लगे, लेकिन इसके पीछे बिहार और road transport से जुड़ी उनकी personal story है। (AajTak)


YouTube से Coding सीखी

यह कहानी का शायद सबसे powerful हिस्सा है। दिलखुश के पास कोई IIT या IIM degree नहीं थी। लेकिन उन्हें पता था कि अगर taxi business को technology से जोड़ना है तो उन्हें technology समझनी होगी।

उन्होंने YouTube की मदद से coding सीखना शुरू किया।

यानी जिस व्यक्ति ने कभी formal technical education नहीं लिया था, वह internet की मदद से technology सीख रहा था। और फिर उन्होंने अपने startup के लिए app/interface बनाने की दिशा में काम किया।

AajTak और Indian Express दोनों ने उनकी YouTube से coding सीखने की कहानी को report किया है। (AajTak)

यहां उनकी कहानी से एक बहुत बड़ी बात निकलती है—

Degree किसी क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता हो सकती है, लेकिन सीखने की इच्छा आपको उस क्षेत्र में आगे ले जा सकती है।


2022 में RodBez की शुरुआत

RodBez को मौजूदा रूप में 2022 में launch किया गया।

Company की official website के अनुसार, इसके बाद 2023 में One Way Taxi और TaxiPool services पेश की गईं और 2024 में company ने Bihar में statewide expansion किया। (RodBez)

इस बार दिलखुश सिर्फ taxi चलाने का business नहीं बना रहे थे। वे Bihar के transport system की एक समस्या को technology से solve करने की कोशिश कर रहे थे।


शुरुआत में कौन-कौन सी मुश्किलें आईं?

Startup शुरू करना किसी भी entrepreneur के लिए आसान नहीं होता। लेकिन दिलखुश के सामने कुछ अतिरिक्त challenges थे।

पैसा कम था

उनके पास बड़ी corporate funding नहीं थी।

Technology की formal education नहीं थी

उन्हें खुद सीखना पड़ा।

Market organized नहीं था

छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में taxi network को organize करना आसान नहीं था।

लोगों का भरोसा जीतना था

नई company के साथ taxi booking करने के लिए customers को भरोसा दिलाना जरूरी था।

Drivers को platform से जोड़ना था

Business तभी सफल हो सकता था जब पर्याप्त drivers network का हिस्सा बनें।

लेकिन इन सभी समस्याओं के बावजूद उन्होंने धीरे-धीरे RodBez का network बनाना शुरू किया।


Shark Tank India ने दिलखुश की कहानी देश तक पहुंचाई

2024 में दिलखुश कुमार और उनके cousin/co-founder सिद्धार्थ शंकर झा Shark Tank India Season 3 में पहुंचे। यही वह moment था जब Bihar के बाहर भी लाखों लोगों ने पहली बार उनकी पूरी कहानी सुनी।

उन्होंने Sharks से ₹50 लाख के बदले 5% equity की मांग की थी।

यानी उन्होंने company की valuation ₹10 करोड़ बताई थी।

लेकिन negotiation के बाद Vineeta Singh और Ritesh Agarwal ने ₹20 लाख के बदले 5% equity और ₹30 लाख debt 12% interest पर देने का offer दिया। दिलखुश ने यह offer स्वीकार किया।

लेकिन Shark Tank में उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि शायद पैसा नहीं था। उनकी कहानी देशभर में पहुंच गई।

एक ऐसा युवक जिसने कभी नौकरी के लिए rejection देखा था, अब national television पर अपने business model को investors के सामने समझा रहा था।


जिस युवक को नौकरी नहीं मिली, वही अब IIT-IIM graduates को नौकरी देता है

यह उनकी कहानी का सबसे बड़ा contrast है। एक समय उन्हें छोटी नौकरी के लिए भी reject किया गया था।

लेकिन बाद में उनकी company में IIT और IIM जैसे संस्थानों से पढ़े लोग काम करने लगे। India Today और ThePrint ने RodBez में ऐसे graduates के काम करने की रिपोर्ट की थी। (India Today)

इसमें एक बहुत गहरी बात छिपी है। दिलखुश की कहानी यह नहीं कहती कि education जरूरी नहीं है। बल्कि यह बताती है कि—

अगर आपकी formal education सीमित है, तो learning बंद नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने खुद technology सीखी। फिर experts को team में जोड़ा। और अपनी कमजोरी को team की strength में बदल दिया।


आज RodBez क्या करता है?

RodBez का मुख्य focus Bihar और अन्य underserved markets में intercity mobility को बेहतर बनाना है।

Official RodBez information के अनुसार company one-way taxi, TaxiPool और driver-focused mobility solutions पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य passengers के लिए यात्रा को affordable बनाना और drivers को बेहतर earning opportunities देना है। (RodBez)

यानी दिलखुश का business केवल “cab booking app” नहीं है।

इसके पीछे एक बड़ा सवाल है—

क्या छोटे शहर और गांव भी modern mobility services का फायदा उठा सकते हैं?

दिलखुश का जवाब है—हाँ।


“Bihar की समस्या” को ही Business Opportunity बना दिया

दिलखुश कुमार की entrepreneurial journey का सबसे बड़ा lesson शायद यही है।

किसी बड़े शहर में बैठे entrepreneur को Bihar के छोटे शहरों की transport समस्या उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं दे सकती थी।

लेकिन दिलखुश खुद उस environment से आए थे।

उन्होंने वही देखा जो दूसरे लोग रोज देखते थे।

लेकिन फर्क यह था कि—

दूसरे लोगों ने समस्या देखी, दिलखुश ने उसमें business opportunity देखी।

यही entrepreneurship का मूल है।


निष्कर्ष

दिलखुश कुमार का जीवन परिचय बिहार के एक साधारण परिवार से निकलकर entrepreneurship की दुनिया में अपनी जगह बनाने वाले युवा की कहानी है।

यह सफर बताता है कि—

सफलता हमेशा वहां से शुरू नहीं होती जहां हमारे पास सबकुछ होता है।

कई बार सफलता वहां से शुरू होती है जहां हमारे पास कुछ भी नहीं होता—सिवाय एक विचार और उसे पूरा करने की जिद के।

दिलखुश कुमार की कहानी का सबसे बड़ा संदेश शायद यही है—

“आपकी आज की परिस्थिति आपकी पूरी जिंदगी का फैसला नहीं करती।”

कभी-कभी जिस सड़क पर आप मजबूरी में चलते हैं,
उसी सड़क पर आपको अपने भविष्य का रास्ता मिल जाता है।


दिलखुश कुमार के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य

विषय जानकारी
नाम दिलखुश कुमार
मूल स्थान बनगांव, सहरसा, बिहार
शिक्षा 12वीं तक
पिता बस चालक
शुरुआती संघर्ष नौकरी की तलाश, रिक्शा चलाना, सब्जी बेचना
Driving पिता से सीखी
पहला Startup AryaGo
RodBez के सह-संस्थापक सिद्धार्थ शंकर झा
RodBez Intercity mobility / taxi service
RodBez की शुरुआत 2022
Shark Tank India Season 3
Shark Tank Ask ₹50 लाख for 5% equity
Shark Tank Deal ₹20 लाख for 5% equity + ₹30 लाख debt at 12%
Investors Vineeta Singh और Ritesh Agarwal
प्रमुख लक्ष्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में affordable intercity mobility

Frequently Asked Questions (FAQs)

दिलखुश कुमार कौन हैं?

दिलखुश कुमार बिहार के सहरसा जिले के उद्यमी और RodBez के Founder & CEO हैं। उनकी पहचान एक ऐसे entrepreneur के रूप में बनी जिसने कठिन आर्थिक परिस्थितियों से निकलकर transport startup खड़ा किया। (RodBez)

दिलखुश कुमार ने कितनी पढ़ाई की है?

उपलब्ध media reports के अनुसार उन्होंने 12वीं तक पढ़ाई की। (India Today)

क्या दिलखुश कुमार ने रिक्शा चलाया था?

हाँ। विभिन्न profiles में बताया गया है कि उन्होंने संघर्ष के दौर में दिल्ली में रिक्शा चलाया और पटना में सब्जी बेची। (India Today)

RodBez के founder कौन हैं?

RodBez की official website दिलखुश कुमार को Founder & CEO बताती है। कंपनी की स्थापना में सिद्धार्थ शंकर झा भी उनके साथ रहे। (RodBez)

RodBez कब शुरू हुआ?

RodBez को 2022 में launch किया गया था। कंपनी की official timeline के अनुसार 2023 में One Way Taxi और TaxiPool services जोड़ी गईं। (RodBez)

दिलखुश कुमार Shark Tank India में क्यों गए थे?

उन्होंने RodBez के लिए investment लेने और business को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से Shark Tank India Season 3 में pitch किया था। उन्होंने ₹50 लाख के बदले 5% equity की मांग की थी। (The Indian Express)

Shark Tank India में RodBez को कितना investment मिला?

Vineeta Singh और Ritesh Agarwal ने ₹20 लाख के बदले 5% equity तथा ₹30 लाख का debt 12% interest पर देने का प्रस्ताव दिया, जिसे founders ने स्वीकार किया। (The Indian Express)

दिलखुश कुमार की सफलता की सबसे बड़ी वजह क्या है?

उनकी कहानी में लगातार सीखना, ground-level experience और स्थानीय समस्या को business opportunity में बदलना महत्वपूर्ण दिखाई देता है। उन्होंने transport sector को खुद काम करके समझा और technology सीखकर उसे startup model में बदलने का प्रयास किया।


Samprada Singh Biography in Hindi – छोटे कारोबार से Alkem Laboratories बनाने तक

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Samprada Singh Biography in Hindi

बिहार के एक किसान परिवार के बेटे ने कैसे छोटे मेडिकल स्टोर से शुरुआत करके भारत की बड़ी pharma company खड़ी की

सम्प्रदा सिंह का जीवन परिचय (Samprada Singh Biography in Hindi) सिर्फ एक सफल उद्योगपति की कहानी नहीं है, बल्कि बिहार के एक साधारण किसान परिवार से निकलकर देश की बड़ी pharmaceutical company खड़ी करने वाले ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिन्होंने असफलताओं को रास्ते की रुकावट नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का अनुभव बनाया।

बिहार के जहानाबाद जिले के एक छोटे से गांव ओकरी से निकलकर सम्प्रदा सिंह ने अपने करियर की शुरुआत किसी बड़े business house या भारी पूंजी के साथ नहीं की थी। उनके परिवार की मुख्य आय खेती से होती थी और खेती भी मौसम की मार से प्रभावित होती रहती थी।

कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाला यह युवक आगे चलकर पहले मेडिकल स्टोर चलाने लगा, फिर pharmaceutical distribution में आया और अंततः 1973 में Alkem Laboratories की नींव रखी।

आज Alkem एक बड़ी भारतीय pharmaceutical company है, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे कई दशकों का संघर्ष, जोखिम, असफल साझेदारियां और लगातार सीखते रहने की कहानी है।

सम्प्रदा सिंह कौन थे?

पूरा नाम: सम्प्रदा सिंह
जन्म स्थान: ओकरी गांव, जहानाबाद, बिहार
पारिवारिक पृष्ठभूमि: किसान परिवार
व्यवसाय: Pharmaceutical entrepreneur
प्रमुख कंपनी: Alkem Laboratories
प्रमुख भूमिका: Founder एवं Chairman Emeritus
मृत्यु: 2019
पहचान: भारतीय pharmaceutical industry के प्रमुख उद्यमियों में से एक

 

सम्प्रदा सिंह का जन्म बिहार के जहानाबाद जिले के ओकरी गांव में एक middle-class किसान परिवार में हुआ था। परिवार की आमदनी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी और प्राकृतिक परिस्थितियों के कारण आर्थिक स्थिति हमेशा स्थिर नहीं रहती थी।

लेकिन कठिन परिस्थितियों के बावजूद पढ़ाई के प्रति उनका झुकाव था। वे अपने गांव से graduate करने वाले शुरुआती लोगों में ही नहीं, बल्कि गांव के पहले graduate बताए जाते हैं। उनका शुरुआती सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें medicine की पढ़ाई के बजाय healthcare business की ओर मोड़ दिया।


डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन किस्मत ने दूसरी राह दिखाई

सम्प्रदा सिंह लोगों की बीमारी और दर्द को कम करना चाहते थे। इसलिए उनका सपना था कि वे डॉक्टर बनें।

लेकिन हर व्यक्ति की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जहां सपना और परिस्थितियां आमने-सामने खड़ी हो जाती हैं।

सम्प्रदा सिंह डॉक्टर नहीं बन सके। उन्होंने हार मानने के बजाय अपने जीवन का रास्ता बदल दिया। उन्होंने पहले कृषि में हाथ आजमाया और इसके बाद छाते बेचने का काम भी किया।

आज यह सुनने में शायद सामान्य लगे, लेकिन उस समय बिहार के एक छोटे गांव से निकलकर अलग-अलग छोटे काम करके अपना रास्ता बनाना आसान नहीं था।

यही उनके व्यक्तित्व की पहली बड़ी विशेषता थी—

काम छोटा हो सकता है, लेकिन सीखने का मौका छोटा नहीं होता।

उनके मन में healthcare के प्रति रुचि बनी रही।

और यही रुचि आगे चलकर उनके पूरे जीवन की दिशा बदलने वाली थी।


1953 में खोला Medical Store

साल 1953 में सम्प्रदा सिंह ने एक medical store शुरू किया।

यह उनके entrepreneurial journey का महत्वपूर्ण turning point था।

यहां से उन्हें केवल दवाइयां बेचने का अनुभव नहीं मिला, बल्कि उन्होंने pharmaceutical business को करीब से समझना शुरू किया।

ग्राहकों की जरूरत क्या है?

दवाइयों की मांग कैसे बदलती है?

डॉक्टर और medical stores के बीच किस तरह का संबंध होता है?

Distribution system कैसे काम करता है?

इन सवालों का practical knowledge उन्हें धीरे-धीरे मिलता गया।

और यही अनुभव आगे चलकर उनके बड़े business की foundation बना।


Medical Store से Pharmaceutical Distribution तक

Medical store शुरू करने के लगभग छह वर्ष बाद, 1959 में उन्होंने Laxmi Pharma नाम से pharmaceutical distribution business शुरू किया।

यह उनके लिए बड़ा कदम था।

अब वे केवल दवाइयां बेच नहीं रहे थे, बल्कि pharmaceutical distribution business को समझ रहे थे।

कुछ समय बाद उन्होंने पटना में Magadh Pharma की स्थापना की।

यहां से उनका business scale बढ़ने लगा।

लेकिन असली बात यह थी कि इस दौरान उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक pharmaceutical distribution industry में काम किया।

इन वर्षों में उन्होंने pharmaceutical market को बहुत करीब से समझा।

यही अनुभव बाद में manufacturing business में प्रवेश करने में उनके लिए सबसे बड़ी पूंजी साबित हुआ। (Alkem Labs)


सबसे बड़ा Risk – Pharmaceutical Manufacturing में प्रवेश

Distribution business चल रहा था। व्यवसाय स्थापित हो चुका था। लेकिन सम्प्रदा सिंह सिर्फ distributor बनकर रुकना नहीं चाहते थे। उन्होंने pharmaceutical manufacturing में प्रवेश करने का फैसला किया।

1970 में उन्होंने Aristo Labs के साथ manufacturing business की दिशा में कदम बढ़ाया।

लेकिन यहां उन्हें सफलता तुरंत नहीं मिली।

उन्हें असफल partnerships और setbacks का सामना करना पड़ा।

यही वह हिस्सा है जो सम्प्रदा सिंह की कहानी को खास बनाता है। क्योंकि कई लोग पहली बड़ी असफलता के बाद business छोड़ देते हैं। सम्प्रदा सिंह ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने असफलताओं से सीखा।

और फिर एक ऐसा फैसला लिया जिसने उनके जीवन के साथ-साथ भारतीय pharmaceutical industry में भी उनकी पहचान बदल दी।


1973 – Alkem Laboratories की शुरुआत

साल 1973।

सम्प्रदा सिंह और उनके छोटे भाई Basudeo N. Singh ने मुंबई जाकर Alkem Laboratories की शुरुआत की।

Business Standard के अनुसार, दोनों भाइयों ने लगभग ₹5 लाख की शुरुआती पूंजी के साथ मुंबई में Alkem शुरू की थी। इससे पहले उनका pharmaceutical distribution business पटना में चल रहा था। (Business Standard)

सोचिए—

एक तरफ भारत का pharmaceutical market ऐसा था जिसमें विदेशी कंपनियों का मजबूत प्रभाव था।

दूसरी तरफ बिहार के एक छोटे गांव से निकलकर आया एक entrepreneur अपने अनुभव के आधार पर pharmaceutical company खड़ी करने का प्रयास कर रहा था।

यह कोई आसान journey नहीं थी।

लेकिन सम्प्रदा सिंह के पास एक चीज थी—

लंबे समय का pharmaceutical market experience।

Alkem की official founder story भी बताती है कि उस समय भारतीय pharmaceutical market में international brands का दबदबा था और Singh ने इसी environment में अपनी company खड़ी करने का निर्णय लिया।


Alkem नाम कैसे पड़ा?

Alkem नाम की कहानी भी दिलचस्प है।

जब दोनों भाई मुंबई में नई pharmaceutical company शुरू करने जा रहे थे, तब company का नाम क्या रखा जाए, इस पर विचार हुआ।

कई नामों पर चर्चा हुई।

एक नाम के रूप में Alchemy सामने आया। Alchemy chemistry से जुड़ा शब्द है। बाद में इसी से inspired होकर नाम को बदलकर Alkem किया गया।

एक छोटे गांव से शुरू हुई entrepreneurial journey अब एक brand name में बदल रही थी।

Alkem।


शुरुआत आसान नहीं थी

आज जब हम Alkem Laboratories को एक बड़ी pharmaceutical company के रूप में देखते हैं, तो शुरुआती दिनों की कठिनाइयों को समझना आसान नहीं है।

Company की शुरुआत के समय अपने manufacturing infrastructure का पूरा network नहीं था।

Alkem के शुरुआती products में anti-infective और gynaecology therapies शामिल थीं और शुरुआती products contract manufacturing के जरिए बनाए गए थे।

लेकिन कंपनी धीरे-धीरे अपनी manufacturing capability बनाने लगी।

1978 में Alkem ने Taloja, Maharashtra में अपनी पहली manufacturing unit स्थापित की।

यह एक महत्वपूर्ण milestone था।

Distribution से manufacturing की ओर बढ़ने का सपना अब जमीन पर आकार ले चुका था।


Taxim ने बदल दी Alkem की पहचान

Alkem की journey में एक बड़ा turning point आया Taxim के साथ।

Company के इतिहास के अनुसार, Taxim भारत के domestic market में ₹100 करोड़ की sales पार करने वाला पहला anti-infective drug brand बना।

इसके बाद Alkem ने कई महत्वपूर्ण brands विकसित किए।

इनमें Clavam, Pan और Pan-D जैसे नाम शामिल हुए।

इन brands ने Alkem को भारतीय pharmaceutical market में मजबूत पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यानी जिस व्यक्ति ने कभी एक छोटे medical store से शुरुआत की थी, उसकी बनाई company अब देशभर में पहचानी जाने लगी थी।


सम्प्रदा सिंह की सबसे बड़ी ताकत क्या थी?

सम्प्रदा सिंह की कहानी को सिर्फ “गरीबी से अमीरी” की कहानी कहना अधूरा होगा।

उनकी असली ताकत थी—

1. Ground-level experience

उन्होंने pharmaceutical business को किताबों से नहीं, बल्कि market में काम करके सीखा।

2. Risk लेने की क्षमता

Medical store से distribution और distribution से manufacturing तक जाना लगातार बड़े risks लेने का उदाहरण था।

3. असफलता से सीखना

Manufacturing में शुरुआती setbacks और failed partnerships के बावजूद उन्होंने business journey जारी रखी।

4. Long-term सोच

उन्होंने केवल तत्काल profit पर ध्यान नहीं दिया।

उन्होंने manufacturing capabilities और brands बनाने पर जोर दिया।

5. Healthcare के प्रति जुनून

डॉक्टर बनने का सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन healthcare sector से उनका संबंध पूरी जिंदगी बना रहा।


₹5 लाख से शुरू हुआ सफर कितनी दूर पहुंचा?

1973 में शुरू हुई Alkem की journey कई दशकों में एक बड़े pharmaceutical business में बदल गई।

कंपनी ने 2015 में अपना IPO पूरा किया और public listed company बनी। Alkem की current official information के अनुसार, कंपनी के पास 800+ brands, 40 से अधिक देशों में business footprint और कई manufacturing तथा R&D capabilities हैं।

कंपनी के FY 2025-26 के official data में consolidated revenue ₹14,712.3 करोड़ बताया गया है।  यह वही business journey है जिसकी शुरुआत दशकों पहले एक छोटे medical store और pharmaceutical distribution business से हुई थी।


सम्प्रदा सिंह और उनके भाई Basudeo Singh की जोड़ी

Alkem की कहानी सम्प्रदा सिंह की अकेली कहानी नहीं थी। उनके छोटे भाई Basudeo N. Singh ने भी company के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Alkem खुद दोनों भाइयों को company की journey के प्रमुख pillars के रूप में वर्णित करती है।  Basudeo Singh शुरुआत में academic career की ओर थे और professor के रूप में काम कर रहे थे। लेकिन बड़े भाई सम्प्रदा सिंह ने उन्हें business में शामिल होने के लिए बुलाया।

इसके बाद दोनों भाइयों ने मिलकर Alkem को आगे बढ़ाया।

यह partnership इस बात का भी उदाहरण है कि बड़े business के पीछे कई बार केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक मजबूत team और family partnership काम करती है।


सम्प्रदा सिंह की उपलब्धियां

सम्प्रदा सिंह को pharmaceutical industry में उनके योगदान के लिए कई सम्मान मिले।

Alkem के पुराने board profile के अनुसार उन्हें विभिन्न lifetime achievement awards के साथ-साथ EY Entrepreneur of the Year – Life Sciences 2016 से भी सम्मानित किया गया था। उन्हें Bihar Pride Achiever 2017 award भी मिला था।

Forbes ने भी उन्हें Alkem Laboratories के founder और self-made entrepreneur के रूप में profile किया था। (Forbes)


सम्प्रदा सिंह का निधन

सम्प्रदा सिंह का निधन 2019 में 92 वर्ष की आयु में हुआ।

लेकिन किसी entrepreneur की असली विरासत केवल उनके जाने के बाद छोड़ी गई संपत्ति नहीं होती।

उनकी असली विरासत होती है—

वह संस्था जिसे उन्होंने बनाया और वह सोच जिसे उन्होंने पीछे छोड़ा।

सम्प्रदा सिंह की कहानी में यही सबसे बड़ा संदेश दिखाई देता है।


सम्प्रदा सिंह की कहानी से क्या सीख मिलती है?

उनकी जिंदगी से कई महत्वपूर्ण बातें सीखी जा सकती हैं।

सपना बदल सकता है, लक्ष्य नहीं

वे डॉक्टर बनना चाहते थे।

डॉक्टर नहीं बन सके।

लेकिन healthcare से जुड़ने का उनका उद्देश्य दूसरे रास्ते से पूरा हुआ।

छोटी शुरुआत कमजोरी नहीं है

उन्होंने medical store से शुरुआत की।

फिर distribution।

फिर manufacturing।

हर चरण ने अगले चरण की तैयारी की।

Failure को Final Result मत समझिए

उनके शुरुआती manufacturing प्रयासों में setbacks आए।

लेकिन उन्होंने उसी अनुभव से आगे की रणनीति बनाई।

Experience भी Capital होता है

उनके पास शुरुआत में बहुत बड़ी financial capital नहीं थी।

लेकिन वर्षों का pharmaceutical distribution experience उनकी बड़ी पूंजी था।

धैर्य business का सबसे underrated skill है

1973 में शुरू हुई Alkem की कहानी को बड़ा बनने में दशकों लगे।

आज की startup दुनिया में जहां लोग कुछ वर्षों में extraordinary results चाहते हैं, सम्प्रदा सिंह की journey बताती है कि बड़े businesses कई बार दशकों में बनते हैं।


निष्कर्ष

सम्प्रदा सिंह का जीवन परिचय हमें एक ऐसी कहानी बताता है जिसमें बिहार के एक छोटे गांव का किसान परिवार, एक medical store, pharmaceutical distribution, असफल partnerships और एक बड़ा entrepreneurial risk—सब मिलकर एक विशाल business journey में बदल जाते हैं।

उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा था, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें डॉक्टर नहीं बनने दिया।

फिर उन्होंने medicine बेचने से शुरुआत की।

Medical store से distribution business बनाया।

Distribution से pharmaceutical manufacturing में प्रवेश किया।

और अंततः 1973 में Alkem Laboratories की नींव रखी।

उनकी कहानी की सबसे बड़ी खूबसूरती शायद यही है कि सफलता अचानक नहीं आई।

पहले छोटा काम आया, फिर अनुभव आया, फिर असफलता आई, फिर सीख आई और उसके बाद बड़ी सफलता आई।

इसलिए सम्प्रदा सिंह की कहानी केवल एक businessman की biography नहीं है।

यह उन युवाओं के लिए एक संदेश है जो सोचते हैं कि छोटी शुरुआत का मतलब छोटा भविष्य होता है।

कभी-कभी आपकी सबसे छोटी शुरुआत ही आपके सबसे बड़े सपने की पहली सीढ़ी होती है।


सम्प्रदा सिंह से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विषय जानकारी
पूरा नाम सम्प्रदा सिंह
जन्मस्थान ओकरी, जहानाबाद, बिहार
पारिवारिक पृष्ठभूमि किसान परिवार
शुरुआती सपना डॉक्टर बनना
शुरुआती व्यवसाय Medical Store
Medical Store 1953
पहला Pharma Distribution Business Laxmi Pharma
बाद का Distribution Business Magadh Pharma
Manufacturing में प्रवेश 1970 के आसपास
Alkem की स्थापना 1973
प्रमुख सह-संस्थापक Basudeo N. Singh
प्रमुख क्षेत्र Pharmaceutical Industry
प्रमुख Brands Clavam, Pan, Pan-D, Taxim
Alkem IPO 2015
निधन 2019
आयु 92 वर्ष

Frequently Asked Questions (FAQs)

सम्प्रदा सिंह कौन थे?

सम्प्रदा सिंह बिहार के जहानाबाद जिले के ओकरी गांव से आने वाले भारतीय pharmaceutical entrepreneur और Alkem Laboratories के founder थे।

सम्प्रदा सिंह ने Alkem Laboratories कब शुरू की?

सम्प्रदा सिंह और Basudeo N. Singh ने 1973 में Alkem Laboratories की स्थापना की थी।

सम्प्रदा सिंह का शुरुआती कारोबार क्या था?

उन्होंने 1953 में medical store शुरू किया और बाद में pharmaceutical distribution business में प्रवेश किया।

सम्प्रदा सिंह का संबंध बिहार से क्या था?

उनका जन्म बिहार के जहानाबाद जिले के ओकरी गांव में हुआ था और वे किसान परिवार से थे।

Alkem Laboratories के founder कौन हैं?

सम्प्रदा सिंह और उनके भाई Basudeo N. Singh Alkem के प्रमुख co-founders हैं।

सम्प्रदा सिंह की सफलता की कहानी क्या है?

उनकी journey medical store से pharmaceutical distribution और फिर pharmaceutical manufacturing तक पहुंची। 1973 में उन्होंने Alkem Laboratories की स्थापना की, जो आगे चलकर भारत की प्रमुख pharmaceutical companies में शामिल हुई।


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जानिए निकोला टेस्ला के बारे में , जिनकी पांच भविष्यवाणियां सही साबित हुईं

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निकोल टेस्ला का नाम सुनते ही हमारे मन में एक ऐसे महान वैज्ञानिक की छवि उभरती है जिसने विज्ञान और तकनीकी के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। टेस्ला का जीवन संघर्ष, कठिनाइयों और असीम सफलता की कहानी है। आइए, उनके जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर एक नजर डालते हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

निकोल टेस्ला का जन्म 10 जुलाई 1856 को सर्बिया के स्मिलजान नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता, मिलुटिन टेस्ला, एक पादरी थे और माता, जॉरिका टेस्ला, एक गृहिणी थीं। टेस्ला के माता-पिता ने उनके शिक्षा के प्रति विशेष ध्यान दिया और उन्हें वैज्ञानिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।

शिक्षा और आरंभिक करियर

टेस्ला ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्राज तकनीकी विश्वविद्यालय और प्राग विश्वविद्यालय से प्राप्त की। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने टेलीफोन कंपनी में काम करना शुरू किया। उनके वैज्ञानिक मन ने उन्हें हमेशा नए-नए आविष्कार करने के लिए प्रेरित किया।

अमेरिका की यात्रा और सफलता

1884 में टेस्ला अमेरिका पहुंचे और थॉमस एडिसन के साथ काम करना शुरू किया। हालांकि, उनके और एडिसन के बीच मतभेद थे और वे जल्द ही अलग हो गए। इसके बाद, टेस्ला ने खुद की कंपनी बनाई और कई महत्वपूर्ण आविष्कार किए। टेस्ला कॉइल, एसी (आल्टरनेटिंग करंट) पावर सिस्टम, और वायरलेस ट्रांसमिशन जैसी तकनीकें उन्हीं की देन हैं।

आविष्कार और योगदान

टेस्ला के आविष्कारों ने विद्युत उर्जा और ट्रांसमिशन के क्षेत्र में क्रांति ला दी। उन्होंने लगभग 300 पेटेंट प्राप्त किए और उनके आविष्कारों ने विद्युत उर्जा के वितरण को सुलभ और प्रभावी बनाया।

निजी जीवन और संघर्ष

टेस्ला का निजी जीवन सरल और संयमी था। उन्होंने अपने जीवन को पूरी तरह से विज्ञान को समर्पित कर दिया और व्यक्तिगत जीवन में काफी संघर्ष किया। आर्थिक तंगी और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों ने उन्हें प्रभावित किया, लेकिन उन्होंने अपने वैज्ञानिक खोजों को जारी रखा।

अंतिम दिन और विरासत

7 जनवरी 1943 को न्यूयॉर्क शहर में निकोल टेस्ला का निधन हुआ। उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है और उन्हें आधुनिक विद्युत युग का जनक माना जाता है। उनकी विरासत आज भी वैज्ञानिक और तकनीकी समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत है।

निकोला टेस्ला की खोज

एसी पावर सिस्टम

टेस्ला का सबसे प्रसिद्ध आविष्कार है एसी (आल्टरनेटिंग करंट) पावर सिस्टम। इस तकनीक ने विद्युत उर्जा के वितरण को अधिक प्रभावी और सस्ता बनाया। आज, विश्वभर में ज्यादातर विद्युत ग्रिड इसी तकनीक का उपयोग करते हैं।

टेस्ला कॉइल

टेस्ला कॉइल, एक प्रकार का ट्रांसफार्मर सर्किट, ने उच्च वोल्टेज, निम्न धारा और उच्च आवृत्ति वाली विद्युत धारा उत्पन्न करने में सक्षम बनाया। इस आविष्कार ने रेडियो और वायरलेस संचार की नींव रखी।

रेडियो

हालांकि रेडियो के आविष्कार का श्रेय अक्सर गुग्लिएल्मो मार्कोनी को दिया जाता है, टेस्ला ने भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पहले ही रेडियो तरंगों के ट्रांसमिशन और रिसेप्शन के लिए पेटेंट फाइल कर दिया था।

वायरलेस ट्रांसमिशन

टेस्ला ने वायरलेस उर्जा ट्रांसमिशन पर भी व्यापक रूप से काम किया। उनका मानना था कि बिजली को बिना तारों के लंबी दूरी तक भेजा जा सकता है। इसके लिए उन्होंने ‘वॉर्डनक्लिफ टॉवर’ का निर्माण किया, जो कि वायरलेस उर्जा ट्रांसमिशन का प्रोटोटाइप था।

रेडार तकनीक

टेस्ला ने रेडार तकनीक के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके सिद्धांतों ने बाद में रेडार प्रणाली के विकास में मदद की, जिसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ।

निष्कर्ष

निकोल टेस्ला की जीवनी हमें यह सिखाती है कि समर्पण, कठिन परिश्रम और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हम किसी भी कठिनाई को पार कर सकते हैं। टेस्ला की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि असफलता केवल एक सीढ़ी है सफलता की ओर बढ़ने की।

निकोल टेस्ला जैसे महान वैज्ञानिक की जीवनी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि हम अपने सपनों का पीछा करें और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें।

2024 बिहार की छुट्टियों का कैलेंडर- Bihar Calender 2024 Public Holiday PDF Free Download

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2024 बिहार की छुट्टियों का कैलेंडर – Bihar Calender 2024

बिहार सामान्य प्रशासन विभाग ने साल 2024 का (Bihar Sarkar Calender 2024) बिहार के सरकारी कर्मचारियों के लिए छुट्टियों की घोषणा कर दी है। मुख्यमंत्री नितीश कुमार की अध्यक्षता में हुयी कबिनेट की मीटिंग में इसकी मंजूरी दी गयी . साल 2024 के कैलेंडर (Bihar Sarkar Calender 2024) के अनुसार 36 सार्वजनिक अवकाश और तीन ऐच्छिक छुट्टियाँ सहित कुल 39 छुट्टियाँ घोषित की गयी है . इस साल 36 सार्वजनिक छुट्टियों में से 6 छुट्टियाँ रविवार को ही पड़ रही है . यानि इस साल बिहार सरकार के कर्मचारी रविवार को छोड़कर कुल 33 छुट्टियों का ही उपभोग कर पाएंगे . इन छुट्टियों में से 5 छुट्टियां शनिवार को पड़ रही है । इस बार साल की शुरुआत यानी 1 जनवरी सोमवार से हो रही है ।कैलेंडर 2024 में बिहार राजस्व दंडाधिकारी न्यायालयों के तहत 15 दिन , ऐच्छिक छुट्टी कुल 20 दिन और एन आई ए के तहत कुल 21 दिन छुट्टी होगी .

बिहार कैलेंडर 2024 को HD में देखने के लिए यहाँ क्लिक करे

Bihar Sarkar Calender 2024 – रविवार को पड़ रही 6 छुट्टियां

साल 2024 में बहुत सारे पर्व त्योहार रविवार को पड़ रहे है जिनकी विवरणी निम्न है –

24 मार्च – होली

14 अप्रैल – भीमराव आंबेडकर जयंती

21 अप्रैल – महावीर जयंती

25 अगस्त – चेहल्लुम

13 अक्टूबर – दुर्गा पूजा

3 नवम्बर – चित्रगुप्त पूजा

Bihar Calender 2024 – शनिवार को पड़ रही 6 छुट्टियां

रविवार के साथ साथ शनिवार को भी कुछ छुट्टियां पड़ रही है जिनमे निम्नलिखित छुट्टियाँ है –

24 फरवरी 2024 – संत रविदास जंयती

22 जून 2024 – कवीर जयंती

12 अक्टूबर 2024  – दशहरा / विजयादशमी

अनुसूची 1

बिहार सरकार के अधीन सभी कार्यालयों और सभी राजस्व दंडाधिकारी न्यायालयों के लिए वर्ष 2024 में कार्यपालक आदेश के तहत्‌ घोषित सामान्य अवकाश

क्रमांक तारीख सप्ताह के दिन पर्व / अवकाश का नाम
1 17 जनवरी 2024 बुधवार गुरु गोविन्द सिंह जयंती
2 14 फरवरी 2024 बुधवार वसंत पंचमी
3 24 फरवरी 2024 शनिवार संत रविदास जंयती
4 26 फरवरी 2024 सोमवार शब-ए-बरात
5 08 मार्च 2024 शुक्रवार महाशिवरात्रि
6 16 अप्रैल 2024 मंगलवार सम्राट अशोक अष्टमी
7 21 अप्रैल 2024 रविवार महावीर जयंती
8 23 अप्रैल 2024 मंगलवार वीर कुंवर सिंह जयंती
9 17 मई 2024 शुक्रवार जानकी नवमी
10 23 मई 2024 गुरूवार बुद्ध पूर्णिमा
11 22 जून 2024 शनिवार कवीर जयंती
12 25 अगस्त 2024 रविवार चेहल्लुम
13 16 सितम्बर 2024 सोमवार हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन
14 10 अक्टूबर 2024 गुरूवार दशहरा / सप्तमी
15 03 नवम्बर 2024 रविवार भैया दूज / चित्रगुप्त जयंती

अनुसूची 2

वर्ष 2023 के लिए बिहार सरकार के कर्मियों के लिए ऐच्छिक / प्रतिबंधित अवकाशों की सूचि (पुरे वर्ष में इनमे से किन्ही तीन का उपभोग किया जा सकता है )

क्रमांक तारीख सप्ताह के दिन पर्व / अवकाश का नाम
1 01 जनवरी 2024 सोमवार नववर्ष
2 15 जनवरी 2024 सोमवार मकर संक्रांति
3 24 जनवरी 2024 बुधवार कर्पूरी ठाकुर जंयती
4 24 मार्च 2024 रविवार होली
5 05 अप्रैल 2024 शुक्रवार रमजान का अंतिम जुम्मा
6 12 अप्रैल 2024 शुक्रवार ईद उल फितर (ईद )
7 18 जून 2024 मंगलवार अनुग्रह नारायण सिन्हा जयंती
8 18 जून 2024 मंगलवार ईद-उल-जोहा (बकरीद)
9 18 जुलाई 2024 गुरूवार मुहर्रम
10 19 अगस्त 2024 सोमवार अंतिम श्रावणी सोमवार
11 19 अगस्त 2024 सोमवार रक्षा बंधन
12 17 सितम्बर 2024 मंगलवार विश्वकर्मा पूजा
13 17 सितम्बर 2024 मंगलवार अनंत चतुर्दशी
14 03 अक्टूबर 2024 गुरूवार दुर्गा पूजा कलश स्थापना
15 11 अक्टूबर 2024 शुक्रवार जय प्रकाश नारायण जयंती
16 13 अक्टूबर 2024 रविवार दुर्गा पूजा
17 21 अक्टूबर 2024 सोमवार श्री कृष्ण सिंह जयंती
18 06 नवम्बर 2024 बुधवार छठ पूजा (खरना )
19 03 दिसंबर 2024 मंगलवार डॉ राजेंद्र प्रसाद जयंती
20 24 दिसंबर 2024 मंगलवार क्रिसमस इव

अनुसूची 3

वर्ष 2024 के लिए बिहार राज्य में एन आई एक्ट 1881 के तहत घोषित अवकाश की सूचि

क्रमांक तारीख सप्ताह के दिन पर्व / अवकाश का नाम
1 26 जनवरी 2024 शुक्रवार गणतंत्र दिवस
2 22 मार्च 2024 शुक्रवार बिहार दिवस
3 26 मार्च 2024 मंगलवार होली
4 27 मार्च 2024 बुधवार होली
5 29 मार्च 2024  शुक्रवार गुड फ्राइडे
6 11  अप्रैल 2024  गुरूवार ईद उल-फितर
7 14 अप्रैल 2024  रविवार अंबेडकर जयंती
8 17 अप्रैल 2024  बुधवार राम नवमी
9 01 मई 2024  बुधवार मई दिवस
10 17  जून 2024  सोमवार ईद-उल-जोहा (बकरीद)
11 17 जुलाई 2024  बुधवार मुहर्रम
12 15 अगस्त 2024  गुरूवार स्वतंत्रता दिवस
13 26 अगस्त 2024  सोमवार श्री कृष्णा जन्माष्टमी
14 02 अक्टूबर 2024  बुधवार महात्मा गांधी जयंती
15 11  अक्टूबर 2024  शुक्रवार दशहरा / महाअष्टमी
16 11  अक्टूबर 2024  शुक्रवार दशहरा / महानवमी
17 12 अक्टूबर 2024  शनिवार दशहरा / विजयादशमी
18 31 अक्टूबर 2024  गुरूवार दीपावली
19 07 नवम्बर 2024  गुरूवार छठ पूजा
20 08 नवम्बर 2024  शुक्रवार छठ पूजा
21 25 दिसंबर 2024  बुधवार क्रिसमस

 

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Saweety Boora Biography in Hindi – स्वीटी बूरा का जीवन परिचय , Height, Weight, Marriage

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Saweety Boora Biography in Hindi

स्वीटी बूरा की बायोग्राफी , जीवन परिचय, भारतीय महिला बॉक्सर, उम्र, परिवार, पति , इंस्टाग्राम, गोल्ड मेडल, लम्बाई , वेट, मैरिज, नेटवर्थ, बहन, भाई, माता, पिता, न्यूज़ [Saweety Boora Biography in Hindi] (Indian Women Boxer, Age, Family, Husband, Instagram, State, Gold Medal, Height, Weight, Marriage, Net worth, Sister, Brother)

 

हमारी भारतीय बेटियों को अगर मौका दिया जाए तो ये क्या कुछ नहीं कर सकती हैं ऐसी ही हमारी भारत की एक होनहार बेटी स्वीटी बूरा ने ये कर के सिर्फ दिखाया ही नही बल्कि ये साबित भी किया है कि अगर हमारी भारत की बेटियों को मौका दिया जाए तो ये कुछ भी हासिल कर सकती हैं।

आज स्वीटी बूरा हमारे देश की महिलाओं के लिए केवल एक प्रेरणा दायक उदाहरण ही नही बल्कि हमारे भारत देश का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर गौरव से ऊंचा कर दिखाया है। आज जहां हमारे देश में शादी के बाद बहुत सी बहु बेटियां शादी के एक मात्र बंधन में बंध कर रह जाती है वही कुछ ऐसी भी बहु बेटियां हैं जो स्वीटी बूरा की तरह कुछ कर गुजर जाती हैं जिन्होंने फिर दूसरी बार भारत के लिए महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल लेकर आई हैं।

Saweety Boora Biography in Hindi

नाम स्वीटी बूरा
जन्म तिथि 10 जनवरी 1993
उम्र 30 वर्ष
जन्म स्थान हिसार, हरियाणा
पेशा बॉक्सर
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पति का नाम दीपक हुड्डा
पिता का नाम महेंद्र सिंह बूरा
राष्ट्रीयता भारतीय
धर्म हिंदू
लंबाई 5 फुट 7 इंच (5.7 feet)
वजन 75 kg
कुल संपत्ति 10 करोड़

 

Saweety Boora (स्वीटी बूरा) कौन हैं।

स्वीटी बूरा एक महिला बॉक्सर खिलाड़ी हैं जो भारत के लिए बॉक्सिंग करती हैं । स्वीटी बूरा का सफलता का सफर बहुत कठिनाइयों से भरा हुआ है इन्होंने सफलता केवल रिंग के अंदर ही नही बल्कि रिंग के बाहर भी हासिल की हैं। स्वीटी बूरा ने 2019 में हरियाणा पुलिस को एक कांस्टेबल के तौर पे join किया । बॉक्सिंग की तैयारी और पुलिस की नौकरी दोनो को बैलेंस कर पाना आसान नहीं था  लेकिन इनके परिवार और दोस्तो के तरफ से लगातार सपोर्ट मिलने से इन्होंने खूब कड़ी मेहनत करके अपनी इस बॉक्सिंग चैंपियनशिप की प्रतियोगिता की प्रैक्टिस को जारी रखा ।

इन्होंने अपने बॉक्सिंग करियर में बहुत सारे अवॉर्ड्स को जीता है जिसमे राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 10 गोल्ड मेडल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड मेडल्स को जीता है। और अभी हाल ही में इन्होंने world boxing championship 2023 में इन्होंने दोबारा गोल्ड मेडल जीता है।

स्वीटी बूरा  का प्रारंभिक जीवन – Saweety Boora Early Life

स्वीटी बूरा का जन्म 10 जनवरी 1993 में हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्र हिसार के एक जाट किसान परिवार में हुआ था इनके पिता श्री महेंद्र सिंह बूरा है जो राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल खेल चुके हैं . स्वीटी बूरा बॉक्सिंग में अपना करियर बनाने से पहले राज्य स्तर पर कबड्डी  भी खेल चुकी हैं जहां इन्होंने कबड्डी में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया था।

स्वीटी बूरा की शिक्षा (Saweety Boora Education)

स्वीटी बूरा ने अपनी स्कूली शिक्षा हिसार के एक स्थानीय स्कूल से है उसके बाद  रोहतक में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री हासिल की।

स्वीटी बूरा करियर (Saweety Boora Career)

स्वीटी बूराने 2023 में विश्व महिला बॉक्सिंग चैंपियनशिप के 81 किग्रा भारवर्ग में अपने विरोधी चीनी महिला बॉक्सर लीना वांग को फाइनल में हरा कर न केवल अपने जोरदार प्रतिभा का प्रदर्शन किया बल्कि इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल को जीत कर पूरे देश का नाम रोशन किया है। यह पहली बार नहीं है जब स्वीटी बूराने गोल्ड मेडल जीत कर लाई है बल्कि इसके पहले भी स्वीटी बूरा ने गोल्ड मेडल जीत कर लाया है भारत के लिए महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप का यह दूसरा गोल्ड मेडल है।

स्वीटी बूरा की शिक्षा (Saweety Boora Education)

स्वीटी बूरा ने अपनी स्कूली शिक्षा हिसार के एक स्थानीय स्कूल से है उसके बाद  रोहतक में महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय से कला स्नातक की डिग्री हासिल की।

शादी के 10 दिन बाद ही शुरू प्रैक्टिस

स्वीटी बूरा के इस कामयाबी के पीछे छिपी है इनकी मेहनत और डेडीकेशन . स्वीटी बूरा के इस कामयाबी के पीछे इनके पति का भी एक बहुत बड़ा हाथ है। स्वीटी बूरा की शादी दीपक हुड्डा से हुई है . दीपक हुड्डा कबड्डी के माहिर खिलाड़ी है.  इन्होंने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी कठिनाइयों से अपना करियर बनाया है।

क्यूंकि दीपक हुड्डा एक खिलाड़ी हैं इसलिए इन्हे ट्रेनिंग की अहमियत भलीभाती पता थी. इसलिए इन्होंने स्वीटी बूरा को प्रैक्टिस के लिए अनुमति दे दी . जिसके बाद हुआ यूं की स्वीटी बूरा ने अपने ट्रेनिंग को जारी रखा और पूरी लगन से मेहनत किया और इनके इस पूरे सफर में दीपक हुड्डा ने स्वीटी के साथ खड़े रहे। हालाकि स्वीटी बूरा को बहुत सारी चुनौतियों का सामना करना पढ़ा.  शादी के बाद जिमदारियां आईं लेकिन स्वीटी और उनके पति दीपक दोनो ने मिल कर इन चुनौतियों का सामना किया. जिसके बाद आगे चल कर स्वीटी ने अपना और अपने देश का नाम रौशन किया।

स्वीटी बूरा की उम्र – Saweety Boora Age

स्वीटी बूरा आज कल social media पे काफी तेजी से trend कर रही है जिसके कारण इनके चाहने वाले इनकी age जानना चाहते हैं। स्वीटी बूरा का जन्म 10 जनवरी 1993 में हुआ था इस इस जन्म तिथि के मुताबिक स्वीटी बूरा की age 2023 में 30 साल है।

स्वीटी बूरा की कुल संपत्ति – Saweety Boora Net Worth

स्वीटी बूरा का net worth 2023 में total 10 करोड़ है . स्वीटी बूरा एक अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग खिलाड़ी है इस लिए इनके income का मुख्य source बॉक्सिंग है और जबकि इन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खेला है तो इनके social media पे इनके बहुत सारे fans है जिसके वजह से ये brand प्रमोशन से भी यह काफी अच्छा पैसा कमाती हैं।

Saweety Boora height, weight

स्वीटी बूरा एक एथलीट है यह अपनी हेल्थ को लेकर काफी जागरूक है . यह अपनी सेहत को बनाए रखने के लिए अपना खास खयाल रखती है जिसमे ये healthy diet और exercise पे विश्वास रखती हैं। स्वीटी बूरा की height 5 फुट 7 इंच (5.7 feet)  है और इनका weight 75Kg हैं।

स्वीटी बूरा का परिवार – Saweety Boora Family

स्वीटी बूरा का जन्म एक एथलीट परिवार में हुआ है इनके पिता महेंद्र सिंह बूरा खुद एक बास्केटबांल के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रह चुके हैं.  इनकी माता जी का नाम अभी इंटरनेट सामने नहीं आया है लेकिन कुछ सूत्रों की माने तो इनकी माता एक हाउस वाइफ हैं . स्वीटी बूरा की एक छोटी बहन भी है जिनका नाम siwi boora है यह भी पेशे से एक बॉक्सर हैं। saweety boora और siwi boora दोनो ने एक साथ ट्रेनिंग ली है।

स्वीटी बूरा मैरिज – Saweety Boora Marriage

स्वीटी बूरा एक विवाहित महिला है इनकी शादी 7 जुलाई 2022 को दीपक हुड्डा के साथ हुई है इनके पति दीपक हुड्डा एक प्रसिद्ध कबड्डी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हैं।

स्वीटी बूरा द्वारा जीते गए मेडल्स

यूथ बॉक्सिंग ट्रेनिंग कंपीटिशन 2011 गोल्ड मेडल
एआईबीए वर्ल्ड वूमेन बॉक्सिंग चैंपियनशिप साउथ कोरिया 2014 सिल्वर मेडल
एबीएसी एशियन कॉन्फेडरेशन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2015 सिल्वर मेडल
इंडिया-आस्ट्रेलिया प्रतियोगिता 2015 सिल्वर मेडल
प्रथम ओपन इंडिया इंटरनेशनल प्रतियोगिता 2018 सिल्वर मेडल
69 वें सतरंजा कप 2018 सिल्वर मेडल
उमाखानोव मेमोरियल टूर्नामेंट रुस 2018 गोल्ड मेडल
एशिया चैंपियनशिप 2021 ब्रॉन्ज मेडल
महिला विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप 2023 गोल्ड मेडल
नेशनल लेवल पे लगभग 9+ से ज्यादा गोल्ड मेडल जीता

 

स्वीटी बूरा सोशल मीडिया (Saweety Boora Social Media)

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FAQ : Saweety Boora

बिहार दिवस की शुभकामनाये || 50 Happy Bihar Diwas Quotes , Images , Slogan , Status

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Happy Bihar Diwas

HAPPY BIHAR DIWAS -QUOTES, IMAGES SLOGAN , STATUS , WISHES

आज बिहार दिवस (22 मार्च ) है . आज ही के दिन 1912 को बंगाल प्रान्त से अलग होकर बिहार एक स्वतंत्र राज्य के रूप में देश के मानचित्र पर उभर कर आया . ब्रिटिश शासन में बिहार बंगाल का हिस्सा था , जिसके शासन की बागडोर कलकत्ता में थी .  हालांकि इस दौरान पूरी तरह से बंगाल का दबदबा रहा लेकिन इसके बावजूद बिहार से कुछ ऐसे नाम निकले, जिन्होंने राज्य और देश के गौरव के रूप में अपनी पहचान बनाई. 1912 में बंगाल प्रांत से अलग होने के बाद बिहार और उड़ीसा एक समवेत राज्य बन गए, जिसके बाद भारतीय सरकार के अधिनियम, 1935 के तहत बिहार और उड़ीसा को अलग-अलग राज्य बना दिया गया.

बिहार का जितना इतिहास पुराना है उतना बिहार दिवस का इतिहास पुराना नहीं है . बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार की पहल पर 2010 में बिहार दिवस मनाया गया . 22 मार्च 1912 को बड़े बंगाल प्रेसीडेंसी से बिहार अलग हुआ था यही वजह है कि 22 मार्च को ‘बिहार दिवस’ के रूप में  मनाया जाता है .

Bihar Diwas Image

happy bihar diwas 2023

Bihar Diwas Slogan in Hindi

मैं सुकून लिखूं

तुम गाँव समझ लेना…..
मैं प्यार लिखूं

तुम “बिहार” समझ लेना..!!❤️

#बिहार_दिवस


#बिहार भारत का गौरव है,

जिसने अपने ज्ञान और सभ्यता से

देश की प्रगति में सदा महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सभी को #बिहार_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


Bihar Diwas Wishes in Hindi

Bihar Diwas Status in Hindi

“दिलों जान से करते हैं दोस्ती यारी,
इज्जत से कहो, हम हैं बिहारी..
बिहारवासियों को #बिहार_दिवस की शुभकामनाएं!


महावीर और बुद्ध की धरती,
गंगा जी है हर दुख हरती
गुरु गोबिंद सिंह की जन्मभूमि ये
चंपारण आंदोलन की कर्मभूमि ये

इसे कहते हैं आईएएस की खदान
देश रत्न राजेंद्र बाबू, हमारी शान
हमारा लिट्टी चोखा सब पर भारी है
हाँ हम बिहारी हैं।


आप सभी बिहारियों को

#बिहार_दिवस की ढेरो शुभकामनाए—

हमारा प्यारा बिहार शांति, सद्भाव और मोहब्बत के साथ

ऐसे ही प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ता रहे, यही कामना है—

“गर्व है, हम बिहारी है”


बिहार दिवस स्लोगन

bihar diwas quotes in hindi

चाणक्य की नीति हूँ
आर्यभट्ट का अविष्कार हूँ
महावीर की तपस्या हूँ
बुद्ध का अवतार हूँ
जी हाँ #बिहार हूँ मै
जनक की नगरी हूँ
सीता की भूमि हूँ
विद्यापति का संसार हूँ
गंगा का श्रृंगार हूँ
जी हाँ बिहार हूँ मैं


विश्व का प्रथम गणराज्य, अहिंसा, सद्भाव करुणा

और प्रेम का संदेश देने वाली ज्ञान, संघर्ष, शक्ति

और संस्कृति के अद्वितीय इतिहास की भूमि

“#बिहार” के स्थापना दिवस आप सभी बिहार वासियों

को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं|🙏


Bihar Diwas Wishes in Hindi

चंद्रगुप्त का साहस हूँ, अशोक की तलवार हूँ।
बिंदुसार का शासन हूँ, मगध का आकार हूँ।
अजी हाँ! बिहार हूँ ।।

दिनकर की कविता हूँ, रेणु का सार हूँ।
नालंदा का ज्ञान हूँ, पर्वत मन्धार हूँ।
अजी हाँ! बिहार हूँ ।।


जन्म लिया जिस मिट्टी पर,
उस मिट्टी का आभारी हूँ ,
सबसे सुंदर है ,बिहार मेरा
और मैं एक गर्वित बिहारी हूँ !


Bihar Diwas ki Shubhkamnaye


शौर्य, ज्ञान , पराक्रम और पर्वत के समान

विराट धैर्य की धरती बिहार

प्रगति के पथ पर सदैव अग्रसर रहे
समस्त बिहारवासियों को

#बिहार_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।


वाल्मिकी की रामायण हूँ,

मिथिला का संस्कार हूँ

मैं पाणिनी का व्याकरण हूँ,

ज्ञान का भण्डार हूँ मैं बिहार हूँ मैं।
बिहार दिवस की शुभकामनाएं।


बिहार प्यार  है हमारा,

शारदा सिन्हा के गाने, छठ के ठेकुएं,

मांझी का पहाड़, लिट्टी चोखा वाला प्यार,

मुजफ्फरपुर के लीची, मिथिला के पेंटिंग,

वैशाली का बौद्ध स्तूप, महावीर मंदिर का प्रसाद..

#बिहार_दिवस की शुभकामनाएं🙏


दुनिया के किसी भी कोने में चला जाऊं,

कहीं भी जाकर बस जाऊं लेकिन अंदर से

“बिहार और बिहारीपन” ख़त्म नहीं हो सकता

क्योंकि इंसान का कर्मभूमि तो कोई भी और कहीं भी हो सकता है

लेकिन जन्मभूमि तो एक ही होता है और मेरा जन्मभूमि बिहार है।

#बिहार_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं


Bihar Diwas Par Slogan

अशोक से जयप्रकाश तक,गौरव का आधार हूँ…
इतिहास के कपाल पर, हाँ मैं स्वर्णिम बिहार हूँ…
बिहार दिवस की शुभकामनाएं


जहवाँ के लड़कन न माने हार।।
वही तो है अपना बिहार।।।


Bihar Diwas Quotes in Hindi

ऐ बिहार, तू बेमिसाल
तुझ से हैं हम तुझमें मगन! 
हरियाली तेरे कदम चूमती, बहती पावन पवित्र गंगा, सीमा पर तुझको घेरे है
अवध झारखंड और बंगा, देकर कुर्बानी प्राणों की, 
सचिवालय पर लहरा दिया तिरंगा
आओ संभालें इसका चैन औ’ अमन
शत शत नमन तुझे शत शत नमन| हार्दिक शुभकामनाएं.

#BiharDiwas


जहाँ प्रेम में काट देते हैं,
‘पहाड़’
उसी मिट्टी को कहते हैं
‘#बिहार‘


Bihar Diwas ki Shubhkamnaye in Hindi

ऐ बिहार, तू बेमिसाल
तुझ से हैं हम तुझमें मगन! 
हरियाली तेरे कदम चूमती, बहती पावन पवित्र गंगा, सीमा पर तुझको घेरे है
अवध झारखंड और बंगा, देकर कुर्बानी प्राणों की, 
सचिवालय पर लहरा दिया तिरंगा
आओ संभालें इसका चैन औ’ अमन
शत शत नमन तुझे शत शत नमन| हार्दिक शुभकामनाएं.


विश्व को लोकतंत्र की राह दिखाने वाले

ज्ञान व संस्कृति की भूमी

बिहार की समस्त जनता को

बिहार दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

#BiharDiwas


Bihar Diwas Status

ज्ञान, स्वाभिमान और परिश्रम की भूमि बिहार प्रदेश के सभी वासियों को की हार्दिक शुभकामनाएं। अपने गौरवशाली इतिहास से बिहार न सिर्फ देश के प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्रों में से एक रहा बल्कि भारतवर्ष के विकास और निर्माण में भी बिहार का अद्वितीय योगदान रहा है।


Happy Bihar Diwas To The

Manufacturer/Producer/Creator Of

Most Of The IAS, IPS

And The Bank PO’s In The Country


Bihar Diwas Quotes

Everyone started from 1 But we started from zero… Yes we the people of Bihar…. Chankya..aryabhatt all are the superpower of our country belongs to the land of diverse culture means Bihar.


Bihar often considered as a land of labourers. But we should appreciate the fact that they are hardy enough to adapt themselves to any situations. Fact proves that Bihar is the state which is considered as the 2nd most IAS producing factory. Proud to be BIHARI Happy


Greetings to the people of Bihar on the occasion of . May the State continue to achieve new milestones, on its journey towards development and prosperity. It was on this day when the British carved out the State of Bihar from Bengal Presidency in 1912


Bihari, is not an insult,it’s my identity
Take pride in being a Bihari.
#BiharDiwas


हम हैं बिहारी

सारे जग में हम भारत की शान

मेहनत अपना दीन धरम मेहनत है ईमान

बिहार दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाए जय बिहार


वईसे तो हम बिहारी 365 दिन,

सब पर भारी

फिर भी रस्मी तौर पर

हम सब बिहरियन को

बिहार दिवस की बधाई ..


Happy Bihar Diwas

जोश है, होश है, हौसलों से यारी है।

दुःख से, दर्द से, उबरने की बारी है।

गर्व से, शौर्य से, बोल तू “बिहारी” है।

हां हम “बिहारी” है।।


बिहार दिवस सिर्फ बिहार के लिए नही अपितु पुरे देश के हर्ष का दिन है ।
उस हर बिहारी को सलाम जो मजदूर हो सकता है पर मजबूर नहीं हो सकता
देश की हर इमारत को बनाने में किसी बिहारी का खून पसीना जरूर लगता है

#BiharDiwas


सीधी-सादी बोली अपनी, सीधे-सादे लोग,

लालच, झूठ और मक्कारी के हमको नहीं हैं रोग|

अपने अंदर जिन्दा रक्खा है हमने इंसान,

हम हैं बिहारी, सारे जग में हम भारत की शान,

मेहनत अपना दीन धरम है, मेहनत है ईमान||


पीछे का इतिहास देख लो, आगे की तैयारी हूँ।

हाँ, मैं बिहारी हूँ।

दिवस की शुभकामनाएँ।


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अमरजीत जयकर का जीवन परिचय | Amarjeet Jaikar Biography in Hindi

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Amarjeet Jaikar Biography in Hindi

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अमरजीत जयकर जन्म और परिवार (Amarjeet Jaikar Birth and Amarjeet Jaikar  family)

अमरजीत जयकर का जन्म बिहार के समस्तीपुर जिले के एक छोटे से गांव शाहपुर पटोरी में हुआ था। इनके पिता जी का नाम रोहित ठाकुर है जो सैलून चलाते हैं। अमरजीत के साथ-साथ इनके पिता जी को भी गाने का शौक है. अमरजीत के माता का नाम बेबी देवी है जो पेशे से हाउसवाइफ है। अमरजीत के अलावे इनके परिवार में एक छोटा भाई और एक छोटी बहन है। अपने पिताजी की कमाई से ही अमरजीत ने मोबाइल फोन खरीद कर सोशल मीडिया के सहारे अपने हुनर को पहुंचाया है।

अमरजीत जयकर प्रारंभिक जीवन, शिक्षा (Amarjeet Jaikar Early life and Education )

अमरजीत जयकर को पढ़ाई में ज्यादा रुचि नहीं है। वह एक बार दसवीं की परीक्षा में भी फेल हो चुके हैं। फिलहाल वे अभी ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर के छात्र हैं। अमरजीत सरकारी नौकरी नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि उनके पिताजी इतनी पढ़ाई करने के बाद भी सरकारी नौकरी नहीं कर सके और अब वे अपना दुकान संभाल रहे हैं। अमरजीत का मेन फोकस सिंगिंग पर है और वे अपनी आवाज के दम पर कुछ करना चाहते हैं।

अमरजीत से अमरजीत जयकर बनने की कहानी (Amarjeet Jaikar Biography in Hindi )

अमरजीत के नाम के पीछे भी काफी रोचक कहानी है। शुरू में इनका नाम अमरजीत था लेकिन आशिकी 2 मूवी देख कर इन्होंने अपने नाम के साथ जयकर टाइटल लगा लिया। क्योंकि उस फिल्म में हीरो का नाम राहुल जयकर था।

बचपन से गाने का शौक 

अमरजीत को गाने का इतना शौक है कि वह खेतों या सुनसान जगह पर जाकर भी गाना गाते थे और फिर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते थे। लोगों के बीच गाने पर उन्हें पागल तक कहा जाता था। पढ़ाई में कमजोर होने की वजह से कई बार लोग उन्हें गाना गाने के लिए ताना भी मारते थे। लेकिन वे लोगों की परवाह किए बिना अपने रियाज पर ध्यान देते थे।

वेटर  बनकर जाते थे फंक्शन में गाने 

अमरजीत का कहना है कि उनके गाने की शुरुआत तब हुई। जब उन्होंने बड़े घरों के फंक्शन के दौरान गाना गाना शुरू किया। वह गाना गाने के लिए ही वहां वेटर के काम के लिए जाते थे। जिसके बदले उन्हें 200 से ₹250 मिलते थे । यहीं से उन्हें सिंगिंग का अनुभव मिला। 17 साल की उम्र में ही वह बिहार आइडल के विनर बन चुके हैं। अमरजीत का सपना इंडियन आइडल के मंच पर जाना है , वह इसके तीसरे राउंड से बाहर हो गए थे।

अमरजीत के वायरल होने की कहानी 

अमरजीत की तकदीर उस वक्त बदल गई जब उन्होंने एक गाने “दिल दे दिया है जान तुम्हें देंगे” गाना को हाथ में ब्रश लेकर बिहारी ठेठ अंदाज में फिल्माया। उनके इस वीडियो को छपरा जिला नाम के एक टि्वटर अकाउंट ने ट्विटर पर डाल दिया । फिर देखते ही देखते उनका वीडियो वायरल हो गया। फिल्मी दुनिया की बड़ी-बड़ी हस्तियों में सोनू सूद और अभिनेत्री नीतू चंद्रा आदि के द्वारा भी उनके वीडियो को ट्वीट किया गया। अमरजीत के गानों के पीछे का सुदूर देहाती बैकग्राउंड , खेत खलिहान और उनकी मीठी आवाज लोगों को इतनी पसंद आई कि वह सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगे। सोनू सूद ने ना सिर्फ उनके गायन की तारीफ की बल्कि अपनी फिल्म फतेह में गाने का ऑफर भी दिया। अभी उनका हिमेश रेशमिया के साथ एक एल्बम “तेरी आशिकी ने मारा 2.0″भी रिलीज हुआ है जो यूट्यूब पर टॉप ट्रेंडिंग में है।

अमरजीत जयकर अफेयर्स, गर्लफ्रेंड, पत्नी (Amarjeet Jaikar Affairs, wife, Amarjeet Jaikar girlfriend name)

अमरजीत जयकर की उम्र अभी 18 साल है और इनकी शादी नहीं हुई है। हालांकि एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि इनकी एक गर्लफ्रेंड है जिन से मुलाकात उनकी फेसबुक के माध्यम से हुई थी उसी ने उन्हें गिटार भी भेंट की थी।

पसंदीदा सिंगर 

अमरजीत जयकर के पसंदीदा सिंगर अरिजीत सिंह, सोनू निगम और किशोर कुमार है। प्रीतम दा और ए आर रहमान इनके पसंदीदा संगीतकार है। इन्हें गाने के साथ साथ गाना लिखने और कंपोज करने का भी शौक है।

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केंद्र सरकार की छुट्टियों का कैलेंडर 2023 – Central Government Office Holiday 2023 PDF Free Download

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Central Government Office Holiday 2023
Central Government Office Holiday 2023

Central Government Office Holiday 2023

भारत सरकार, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने 16.6.2022 को पूरे भारत में स्थित केंद्र सरकार के कार्यालयों और कर्मचारियों के लिए वर्ष 2023 के लिए केंद्र सरकार की छुट्टियों की सूचि जारी किया है। इन छुट्टियों की सूची का लगभग सभी राज्य सरकार और उसके प्रशासनिक कार्यालयों, राष्ट्रीयकृत बैंकों, डाकघरों और रेलवे बोर्ड आदि द्वारा अनुसरण किया जाता है।

केंद्र  सरकार द्वारा यह  निर्णय लिया गया है कि दिल्ली/नई दिल्ली स्थित केंद्र सरकार के सभी प्रशासनिक कार्यालयों में इस कार्यालय ज्ञापन के Annexure-I में जारी  किये गए अवकाश लागु होंगे । इसके अलावा, प्रत्येक कर्मचारी को भी Annexure-II में निर्दिष्ट प्रतिबंधित छुट्टियों की सूची में से उसके द्वारा चुने जाने वाले किन्हीं दो छुट्टियों का लाभ उठाने की अनुमति दी गई है।

Central Govt Office Holiday List 2023 in India PDF | Holiday Calendar 2023 for Central Govt Offices

दिल्ली/नई दिल्ली के बाहर स्थित केंद्र सरकार के प्रशासनिक कार्यालयों में पैरा 3.1 में नीचे दर्शाई गई 12 वैकल्पिक छुट्टियों में से तीन छुट्टियों के अलावा निम्नलिखित अवकाश अनिवार्य रूप से शामिल होंगे:

1. REPUBLIC DAY
2. INDEPENDENCE DAY
3. MAHATMA GANDHI’S BIRTHDAY
4. BUDDHA PURNIMA
5. CHRISTMAS DAY
6. DUSSEHRA (VIJAY DASHMI)
7. DIWALI (DEEPAVALI)
8. GOOD FRIDAY
9. GURU NANAK’S BIRTHDAY
10. IDU’L FITR
11. IDU’L ZUHA
12. MAHAVIR JAYANTI
13. MUHARRAM
14. PROPHET MOHAMMAD’S BIRTHDAY (ID-E-MILAD)

पैरा 3.1 – नई दिल्ली/दिल्ली में स्थित कार्यालयों के लिए, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग द्वारा तीन छुट्टियों का चयन किया जाता है और दिल्ली/नई दिल्ली के बाहर स्थित कार्यालयों के लिए तीन छुट्टियों का चयन केंद्र सरकार की कर्मचारी कल्याण समन्वय समिति द्वारा राज्यों की राजधानियों में किया जाता  है. यदि आवश्यक हो, तो राज्य में अन्य स्थानों पर समन्वय समितियों के परामर्श से नीचे दी गई सूची से संबंधित राज्य के भीतर सभी केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए समान रूप से लागू अंतिम सूची को तदनुसार अधिसूचित किया जाएगा और उसके बाद कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।

यह भी स्पष्ट किया जाता है कि इसके बाद पैरा 5.1 और 5.2 में दर्शाए गए कुछ अपवादों को छोड़कर, त्योहारों और तारीखों में किसी भी बदलाव की अनुमति नहीं है.  जैसा कि अनुसूची -1 और अनुसूची -2 में दर्शाया गया है। पैरा 3.1 में  दर्शाई गई 12 वैकल्पिक छुट्टियां इस प्रकार हैं (इनमे से 3 छुट्टियाँ देय होंगी ):

Central Government Office Holiday 2023

1. AN ADDITIONAL DAY FOR DUSSEHRA
2. HOLI
3. JANAMASHTAMI (VAISHNAVI)
4. RAM NAVAMI
5. MAHA SHIVRATRI
6. GANESH CHATURTHI / VINAYAK CHATURTHI
7. MAKAR SANKARANTI
8. RATH YATRA
9. ONAM
10. PONGAL
11. SRI PANCHAMI / BASANT PANCHAMI
12. VISHU/ VAISAKHI / VAISAKHADI / BHAG BIHU / MASHADI UGADI / CHAITRA SUKLADI / CHETI CHAND / GUDI PADAVA / 1ST NAVRATRA / NAORAZ / CHHATH POOJA / KARVA CHAUTH.

2023 Holiday Calendar Central Government India | Central Govt Gazetted Holiday Calendar 2023 PDF | Central Government Office Holiday 2023

अनुसूची 1 ( Annexure-II )

केंद्र सरकार (भारत सरकार ) के अधीन  दिल्ली/नई दिल्ली स्थित प्रशासनिक कार्यालयों में वर्ष 2023 में घोषित सामान्य अवकाश की सूची वर्ष (LIST OF HOLIDAYS FOR THE YEAR 2023 TO BE OBSERVED IN THE ADMINISTRATIVE OFFICES OF CENTRAL GOVERNMENT LOCATED AT DELHI / NEW DELHI)

क्रमांक तारीख सप्ताह के दिन पर्व / अवकाश का नाम
1 26 जनवरी 2023 गुरूवार गणतंत्र दिवस (Republic Day )
2 08 मार्च  2023 बुधवार होली (Holi)
3 30 मार्च 2023 गुरूवार राम नवमी (Ram Navami)
4 04 अप्रैल 2023 मंगलवार महावीर जयंती (Mahavir Jayanti)
5 07 अप्रैल 2023 शुक्रवार गुड फ्राइडे (Good Friday)
6 22 अप्रैल 2023 शनिवार ईद उल-फितर (Id-Ul-Fitr)
7 05 मई 2023 शुक्रवार बुद्ध पूर्णिमा (Budha Purnima)
8 29 जून 2023 गुरूवार ईद-उल-जोहा (बकरीद)Id-ul-uha(Bakarid)
9 29 जुलाई 2023 शनिवार मुहर्रम (Muharram)
10 15 अगस्त 2023 मंगलवार स्वतंत्रता दिवस (Independence Day)
11 06 सितम्बर 2023 बुधवार श्री कृष्णा जन्माष्टमी (Janmashtmi)
12 28 सितम्बर 2023 गुरूवार हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन (Milad-un-nabi)
13 02 अक्टूबर 2023 सोमवार महात्मा गांधी जयंती (Mahatma Gandhi Birthday)
14 24 अक्टूबर 2023 मंगलवार दशहरा / विजयादशमी (Dussehra)
15 12  नवम्बर 2023 रविवार दीपावली (Diwali)
16 27 नवम्बर 2023 सोमवार गुरु नानक जयंती (Guru nanak 
17 24  दिसंबर 2023 सोमवार क्रिसमस (Christmas Day)

 

अनुसूची 2 ( Annexure-II )

केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली/नई दिल्ली स्थित प्रशासनिक कार्यालयों  में वर्ष 2023 के लिए प्रतिबंधित छुट्टियों की सूची (पुरे वर्ष में इनमे से किन्ही 2 का उपभोग किया जा सकता है ) LIST OF RESTRICTED HOLIDAYS FOR THE YEAR 2023 IN RESPECT OF ADMINISTRATIVE OFFICES OF CENTRAL GOVERNMENT LOCATED AT DELHI / NEW DELHI 

क्रमांक तारीख सप्ताह के दिन पर्व / अवकाश का नाम
1 01 जनवरी 2023 रविवार नववर्ष
2 14 जनवरी  2023 शनिवार मकर संक्रांति/बिहू
3 15 जनवरी  2023 रविवार पोंगल
4 26 जनवरी  2023 शनिवार बसंत पंचमी
5 05 फरवरी 2023 रविवार हजरत अली जयंती , गुरु रविदास जयंती
6 15 फरवरी 2023 बुधवार स्वामी दयानंद जयंती
7 18 फरवरी 2023 शनिवार महा शिवरात्रि
8 19 फरवरी 2023 रविवार शिव जी जयंती
9 07 मार्च 2023 मंगलवार होलिका दहन , डोलयात्रा
10 22 मार्च 2023 बुधवार चैत्र शुक्ल , गुड़ी पड़वा
11 09 अप्रैल 2023 रविवार ईस्टर रविवार
12  14 अप्रैल 2023 शुक्रवार वैशाखी
13 15 अप्रैल 2023 शनिवार बेंगल
14 21 अप्रैल 2023 शुक्रवार जमात उल विदा
15 09 मई 2023 मंगलवार गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर जयंती
16 20  जून  2023 मंगलवार रथ यात्रा
17 16 अगस्त  2023 गुरुवार पारसी नववर्ष
18 20 अगस्त  2023 रविवार विनायक चतुर्थी
19 29 अगस्त  2023 मंगलवार ओणम
20 30 अगस्त  2023 बुधवार रक्षा बंधन
21 06  सितम्बर 2023 बुधवार जन्माष्टमी
22 19  सितम्बर 2023 मंगलवार गणेश चतुर्थी
23 21 अक्टूबर 2023 शनिवार दशहरा (सप्तमी)
24 22 अक्टूबर 2023 रविवार दशहरा (महा अष्ठमी )
25 23 अक्टूबर 2023 सोमवार दशहरा (महा नवमी )
26 28 अक्टूबर 2023 शनिवार महर्षि वाल्मीकि जयंती
27 01 नवम्बर  2023 बुधवार करवा चौथ
28 12 नवम्बर  2023 रविवार नरक चतुर्दशी
29 13 नवम्बर  2023 सोमवार गोवर्धन पूजा
30 15  नवम्बर 2023 बुधवार भैया दूज
31 19  नवम्बर 2023 रविवार छठ पूजा
32 24 नवम्बर 2023 शुक्रवार गुरु तेग बहादुर शहादत दिवस
33 24  नवम्बर 2023 रविवार क्रिसमस इव

 

5.1 दिल्ली/नई दिल्ली में कार्यालयों के लिए, ईदुल फितर, ईदुल जुहा, मुहर्रम और ईद-ए-मिलाद के संबंध में छुट्टियों की तारीख में कोई भी बदलाव, यदि आवश्यक हो, चंद्रमा के दर्शन के आधार पर, मंत्रालय द्वारा घोषित किया जाएगा।

5.2 दिल्ली/नई दिल्ली से बाहर के कार्यालयों के लिए,उल-फितर, ईद-उल-जुहा, मुहर्रम और ईद-ए-मिलाद की  छुट्टियों  के लिए राज्य की राजधानियों में केंद्र सरकार की कर्मचारी कल्याण समन्वय समितियाँ संबंधित राज्य सरकारों/संघ शासित प्रदेशों के निर्णय के आधार पर, यदि आवश्यक हो, छुट्टी की तारीख को बदलने के लिए अधिकृत हैं

5.3 ऐसा हो सकता है कि उपरोक्त अवसरों के संबंध में तिथि में परिवर्तन की घोषणा बहुत ही कम समय में की जानी है। ऐसे में P.I.B/T.V./A.I.R./समाचार पत्रों के माध्यम से घोषणा की जा सकती है और केंद्र सरकार के विभाग/कार्यालय के प्रमुख औपचारिक आदेश की प्रतीक्षा किए बिना, तिथि परिवर्तन के बारे में ऐसी घोषणा के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।

Central Government Office Holiday 2023

6. 2023 के दौरान, दिवाली (दीपावली) रविवार, 12 नवंबर, 2023 (कार्तिका 21) को पड़ती है। कुछ राज्यों में, इस अवसर को एक दिन पहले यानी “नरक चतुर्दशी दिवस” ​​पर मनाने की प्रथा है। इसे देखते हुए, यदि किसी राज्य में केंद्र सरकार के कार्यालयों में “नरक चतुर्दशी दिवस (दीपावली दिवस के स्थान पर) पर दीपावली के कारण अवकाश मनाया जाता है, तो उस राज्य में केवल उस दिन को अनिवार्य अवकाश के रूप में घोषित किया जाता है, इसमें कोई आपत्ति नहीं है।

7. केंद्र सरकार के संगठन जिनमें औद्योगिक, वाणिज्यिक और व्यापारिक प्रतिष्ठान शामिल हैं, एक वर्ष में तीन राष्ट्रीय छुट्टियों सहित 16 छुट्टियों तक का पालन करेंगे। अनिवार्य अवकाश के रूप में गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और महात्मा गांधी का जन्मदिन। वर्ष 2023 के लिए शेष अवकाश/अवसर ऐसे प्रतिष्ठानों/संगठनों द्वारा स्वयं निर्धारित किए जा सकते हैं, जो उपरोक्त पैरा 3.2 के अधीन है।

8. केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन इस संबंध में गृह मंत्रालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार छुट्टियों की सूची तय करेंगे।

9. विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के संबंध में, इस विभाग के कार्यालय ज्ञापन में निहित निर्देशों के अनुसार छुट्टियों की संख्या अधिसूचित की जाए। क्रमांक 12/5/2002-जेसीए दिनांक 17 दिसंबर, 2002। दूसरे शब्दों में, उनके पास सूची में तीन राष्ट्रीय अवकाश और ईद-उल-फितर शामिल करने के बाद ही अपनी खुद की 14 (चौदह) छुट्टियों का चयन करने का विकल्प होगा। , मुहर्रम और दिवाली अनिवार्य छुट्टियों की सूची में शामिल हैं और साप्ताहिक अवकाश के दिनों में आते हैं।

10. बैंकों के संबंध में, छुट्टियों को वित्तीय सेवा विभाग, वित्त मंत्रालय द्वारा जारी मौजूदा निर्देशों के अनुसार विनियमित किया जाएगा।

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