क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए -निर्मला पुतुल
क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए – हिंदी कविता निर्मला पुतुल क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए…? एक तकिया कि कहीं से थका-मांदा आया और सिर टिका दिया कोई खूँटी कि ऊब, उदासी थकान से भरी कमीज़ उतारकर टाँग दी या आँगन में तनी अरगनी कि कपड़े लाद दिए घर कि सुबह निकला और शाम लौट आया…
