KABHI YU BHI AA-BASHIR BADRA
कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो बशीर बद्र (BASHIR BADR) कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है मुझे ये सिफ़तभी अताकरे तुझे भूलने की दुआ…
