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आदमी की सबसे अच्छी नस्ल युद्धों में नष्ट हो गई
आदमी की सबसे अच्छी नस्ल युद्धों में नष्ट हो गई हिंदी कविता – सुदामा पाण्डेय “धूमिल “ बुद्ध की आँख से खून चू रहा था नगर के मुख्य चौरस्ते पर शोकप्रस्ताव पारित हुए हिजड़ो ने भाषण दिए लिंग-बोध पर वेश्याओं ने कविताएँ पढ़ीं आत्म-शोध पर प्रेम में असफल छात्राएँ अध्यापिकाएँ बन गई हैं और…
बाकी बच गया अण्डा (कविता ) – बाबा नागार्जुन
बाकी बच गया अण्डा प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो अलग हो गया उधर एक, अब…
पिछड़ा आदमी – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना
पिछड़ा आदमी हिंदी कविता – सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जब सब बोलते थे वह चुप रहता था, जब सब चलते थे वह पीछे हो जाता था, जब सब खाने पर टूटते थे वह अलग बैठा टूँगता रहता था, जब सब निढाल हो सो जाते थे वह शून्य में टकटकी लगाए रहता था लेकिन जब गोली…
वह कहता था, वह सुनती थी – शरद कोकास
वह कहता था, वह सुनती थी शरद कोकास वह कहता था, वह सुनती थी, जारी था एक खेल कहने-सुनने का। खेल में थी दो पर्चियाँ। एक में लिखा था ‘कहो’, एक में लिखा था ‘सुनो’। अब यह नियति थी या महज़ संयोग? उसके हाथ लगती रही वही पर्ची जिस पर लिखा था ‘सुनो’। वह…
पुष्प की अभिलाषा – माखनलाल चतुर्वेदी
पुष्प की अभिलाषा रचनाकार – माखनलाल चतुर्वेदी चाह नहीं मैं सुरबाला केगहनों में गूँथा जाऊँ, चाह नहीं, प्रेमी-माला मेंबिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं, सम्राटों के शवपर हे हरि, डाला जाऊँ, चाह नहीं, देवों के सिर परचढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ। मुझे तोड़ लेना वनमाली!उस पथ पर देना तुम फेंक,मातृभूमि पर शीश चढ़ानेजिस पथ जावें…
SHAKTI AUR KSHAMA -RAMDHARI SINGH DINAKAR
शक्ति और क्षमा (कविता ) रामधारी सिंह “दिनकर” क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर…
