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पाँव बढ़ाना चलते जाना – सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
पाँव बढ़ाना चलते जाना – हिंदी कविता सर्वेश्वरदयाल सक्सेना हँसा ज़ोर से जब, तब दुनिया बोली इसका पेट भरा है और फूट कर रोया जब तब बोली नाटक है नखरा है जब गुमसुम रह गया, लगाई तब उसने तोहमत घमंड की कभी नहीं वह समझी इसके भीतर कितना दर्द भरा है दोस्त कठिन है…
वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है
वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है अदम गोंडवी वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है कोई भी…
क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए -निर्मला पुतुल
क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए – हिंदी कविता निर्मला पुतुल क्या हूँ मैं तुम्हारे लिए…? एक तकिया कि कहीं से थका-मांदा आया और सिर टिका दिया कोई खूँटी कि ऊब, उदासी थकान से भरी कमीज़ उतारकर टाँग दी या आँगन में तनी अरगनी कि कपड़े लाद दिए घर कि सुबह निकला और शाम लौट आया…
पुनः नया निर्माण करो- द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
पुनः नया निर्माण करो – हिंदी कविता द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी उठो धरा के अमर सपूतो पुनः नया निर्माण करो। जन-जन के जीवन में फिर से नई स्फूर्ति, नव प्राण भरो। नया प्रात है, नई बात है, नई किरण है, ज्योति नई। नई उमंगें, नई तरंगे, नई आस है, साँस नई। युग-युग के मुरझे सुमनों…
बाकी बच गया अण्डा (कविता ) – बाबा नागार्जुन
बाकी बच गया अण्डा प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन पाँच पूत भारतमाता के, दुश्मन था खूँखार गोली खाकर एक मर गया, बाक़ी रह गए चार चार पूत भारतमाता के, चारों चतुर-प्रवीन देश-निकाला मिला एक को, बाक़ी रह गए तीन तीन पूत भारतमाता के, लड़ने लग गए वो अलग हो गया उधर एक, अब…
अकाल और उसके बाद (कविता ) – नागार्जुन
अकाल और उसके बाद प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन कई दिनों तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास कई दिनों तक कानी कुतिया सोई उनके पास कई दिनों तक लगी भीत पर छिपकलियों की गश्त कई दिनों तक चूहों की भी हालत रही शिकस्त। दाने आए घर के अंदर कई दिनों के बाद धुआँ…
