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Thursday, March 19, 2026
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DEEPTI SHARMA BIOGRAPHY IN HINDI

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दीप्ती शर्मा (भारतीय महिला क्रिकेटर )

DEEPTI SHARMA (INDIAN WOMAN CRICKETER)

एक लड़की कोने में बैठ कर ध्यान से प्लेयर्स का प्रैक्टिस  देख रही थी . इसी बीच एक बॉल उसकी तरफ आई, कुछ बच्चों ने वो बॉल वापस करने को कहा. उसने बॉल उठाया और निशाना साधकर विकटों पर दे मारा, गिल्लियां बिखर गईं और सबकी नज़रे जम गईं, उस लड़की पर. उस समय पूर्व भारतीय महिला खिलाड़ी हेमलता कला भी वहां प्रैक्टिस कर रहीं थी. उन्होंने पूछा ये लड़का कौन है? सुमित ने कहा मैम ये मेरी बहन है. बॉयकट लुक में ये लड़की आज की टीम इंडिया की धांसू ओपनर दीप्ति शर्मा थी. 

आगरा में रेलवे क्लर्क भगवान शर्मा के सात बच्चों में सबसे छोटी बेटी बहुत जिद्दी थी l बेटा क्रिकेट सीखने जाता तो साथ चलने की जिद करती. रोज मना किया जाता, मगर वो हार नहीं मानती. फिर एक दिन सबसे हार मान ली और भाई सुमित के साथ क्रिकेट ग्राउंड पहुंच गई. पहले दिन जब इस नौ साल की लड़की ने एक बड़ा मैदान देखा तो देखती रह गई l चारों ओर  प्लेयर्स गेंद-बल्लों से प्रैक्टिस कर रहे थे. कोने में बैठ कर ध्यान से देखने लगी. इसी बीच एक बॉल उसकी तरफ आई, कुछ बच्चों ने वो बॉल वापस करने को कहा l
उसने बॉल उठाया और निशाना साधकर विकटों पर दे मारा, गिल्लियां बिखर गईं और सबकी नज़रे जम गईं, उस लड़की पर l उस समय पूर्व भारतीय महिला खिलाड़ी हेमलता कला भी वहां प्रैक्टिस कर रहीं थीl उन्होंने पूछा ये लड़का कौन है? सुमित ने कहा मैम ये मेरी बहन है. बॉयकट लुक में ये लड़की आज की टीम इंडिया की धांसू ओपनर दीप्ति शर्मा थीl कहा जाता है कि दस साल पहले हेमलता ने उसे कह दिया था कि वो आगे चलकर बड़ी प्लेयर बन सकती है और यहीं से दीप्ति को क्रिकेट की ट्रेंनिंग मिलनी शुरू हो गई.
क्रिकेट में  बनाया कैरियर
हेमलता की कही उस बात के बाद दीप्ति ने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया. उनके बेसिक पर बहुत ज्यादा काम नहीं करना पड़ा क्योंकि दीप्ति एक नेचुरल टैलंट वाली क्रिकेटर हैं. अगले दो सालों में उन्होंने यूपी अंडर-19 के ट्रायल्स भी दिए लेकिन उनकी उम्र कम होने की वजह से टीम में नहीं लिया गया. इस बीच हेमलता कला के साथ वो अपनी कला में निखार ला रही थीं. फिर आया साल 2010 और इस साल अंडर-19 ट्रायल मैच में दीप्ति ने 65 रन बनाने के साथ ही अपने मीडियम पेस बॉलिंग से 3 विकेट भी लिए. इस धाकड़ ऑलराउंड परफॉरमेंस की बदौलत उन्हें उत्तर प्रदेश अंडर-19 टीम में चुन लिया गया.
कानपुर में विदर्भ के खिलाफ बनाए उनके 114 रन ने सीनियर स्टेट टीम के लिए उनकी दावेदारी पेश कर दी. उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ ने मात्र 15 साल की उम्र में उन्हें सीनियर स्टेट टीम में शामिल कर लिया. यहां से उनकी नेशनल टीम में जगह बनाने की फाइट शुरू हुई. इसमें उनका साथ दिया उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ की अध्यक्ष और नेशनल सेलेक्टर रीता डे ने. रीता दीप्ति के टैलेंट को भांप गईं थी.
टीम इंडिया में डेब्यू
दीप्ति शुरू से ही मीडियम पेसर थी. लेकिन रीता को लगता था कि उनकी बॉलिंग उनके इंडियन टीम में सेलेक्शन में रोड़ा बनेगी. क्योंकि दीप्ति की लंबाई कुछ ज्यादा नहीं थी इसलिए वो मीडियम से अच्छा स्पिन फेंक सकती थी. रीता के कहने पर दीप्ति ऑफस्पिन  करने लगीं. 2014  में दीप्ति को इंडिया A टीम में चुना गया जहां उन्होंने नाबाद 53 रन की पारी खेली. उनकी इस पारी के बाद उन्हें इसी साल टीम इंडिया से कॉल आ गया.  साउथ अफ्रीका के खिलाफ सीरीज के आखिरी मैच के लिए दीप्ति को बुलाया गया. अपने पहले मैच में बैटिंग में तो कुछ खास नहीं कर पाईं लेकिन 2 विकेट लेकर अपना सेलेक्शन जस्टीफाई किया.
188 रन की खेली सबसे यादगार पारी
दीप्ति ने बेहद कम समय में अपनी बैटिंग, बॉलिंग और चुस्त फील्डिंग से टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की कर ली है. उन्होंने दुनिया भर में अपने अच्छे प्रदर्शन से अपने टैलेंट का लोहा मनवाया है. इसी की बानगी थी उनकी  पूनम राउत के साथ 320 रन की ओपनिंग पार्टनरशिप जिसमें दीप्ति ने 188 रन पारी खेली. सबसे खास बात ये कि उस पारी में इस लेफ्टहैंड बल्लेबाज ने 27 चौके और दो छक्के जड़े थे. ये वीमन्स क्रिकेट में किसी भी वनडे पारी में लगाए गए चौकों का रिकॉर्ड है. सहवाग के 25 चौकों वाली पारी से भी ज्यादा है. दीप्ति ने ये पारी 17 मई को आयरलैंड के खिलाफ खेली थी जो महिला क्रिकेट का दूसरी सबसे बड़ी पारी है.
दीप्ति और पूनम की जोड़ी ने इस दौरान महिला क्रिकेट में इंग्लैंड की सारा और कैरोलीन की 229 रन की साझेदारी का रिकॉर्ड तोड़ा. वहीं पुरुषो में श्रीलंका के उपुल थरंगा और सनथ जयसूर्या के 286 रन के पहले विकेट की साझेदारी का रिकॉर्ड ध्वस्त किया. इस माइलस्टोन पर वीरेन्द्र सहवाग ने भी उन्हें ट्विटर करके बधाई दी.
गेंदबाजी में भी ढाया कहर
यही नहीं गेंदबाजी में भी उन्होंने कहर ढहा रखा है. 2016 में श्रीलंका के खिलाफ हुए मुकाबले में उन्होंने एक मैच में 20 रन खर्च कर 6 विकेट लिए. जिसके बाद 5 या उससे अधिक विकेट लेने वाली इंडिया (महिला-पुरुष मिलाकर) की सबसे कम उम्र की क्रिकेटर बन गई हैं. दीप्ति अपना पहला वर्ल्ड कप खेल रही हैं और जिस तरह की इनकी अब तक की परफॉर्मेस रही है वो उन्हें लम्बी रेस का घोड़ा साबित करने के लिए काफी है.

दीप्ति शर्मा का प्रदर्शन 
साभार -LALANTOP
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कुछ रह तो नहीं गया

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कुछ रह तो नहीं गया ?

 3 महीने के बच्चे को दाई के पास रखकर जॉब पर जानेवाली माँ को,
दाई ने पूछा… कुछ रह तो नहीं गया ?
पर्स, चाबी सब ले लिया ना ?
अब वो कैसे हाँ कहे ?
पैसे के पीछे भागते भागते… सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है ,
*वह ही रह गया है…..*
 शादी में दुल्हन को बिदा करते ही शादी का हॉल खाली करते हुए दुल्हन की बुआ ने पूछा…
“भैया, कुछ रह तो नहीं गया ना ?
चेक करो ठीक से ।
.. बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे।
सब कुछ तो पीछे रह गया…
25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड से…
वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था, वो नाम भी पीछे रह गया अब …
“भैया, देखा ?
कुछ पीछे तो नहीं रह गया ?”
बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला….
पर दिल में एक ही आवाज थी…
*सब कुछ तो यही रह गया...*
 बडी तमन्नाओ के साथ बेटे को पढ़ाई के लिए विदेश भेजा था और वह पढ़कर वही सैटल हो गया ,
पौत्र जन्म पर बमुश्किल 3 माह का वीजा मिला था और चलते वक्त बेटे ने प्रश्न किया सब कुछ चैक कर लिया कुछ रह तो नही गया ?
क्या जबाब देते कि
*अब छूटने को बचा ही क्या है ….*
 60 वर्ष पूर्ण कर सेवानिवृत्ति की शाम पी ए ने याद दिलाया चेक कर ले सर कुछ रह तो नही गया,
थोडा रूका और सोचा पूरी जिन्दगी तो यही आने- जाने मे बीत गई !
*अब और क्या रह गया होगा ?*
 *”कुछ रह तो नहीं गया ?*
” शमशान से लौटते वक्त किसी ने पूछा, नहीं कहते हुए वो आगे बढ़ा…
पर नजर फेर ली,
एक बार पीछे देखने के लिए….पिता की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया ।
भागते हुए गया , पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया ।
दोस्त ने पूछा… कुछ रह गया था क्या?
भरी आँखों से बोला…
*नहीं कुछ भी नहीं रहा अब…*
*और जो कुछ भी रह गया है वह सदा मेरे साथ रहेगा* ।।
 एक बार समय निकालकर सोचे , शायद पुराना समय याद आ जाए, आंखें भर आएं और *आज को जी भर जीने का मकसद मिल जाए*।
……..मैं अपने सभी दोस्तों से ये ही बोलना चाहता हूँ…….
*यारों क्या पता कब*
*इस जीवन की शाम हो जाये…….*
इससे पहले ऐसा हो सब को गले लगा लो, दो प्यार भरी बातें कर लो…..
*ताकि कुछ छूट न जाये …..*
*कुछ रह न जाये ।….*
साभार   -व्हाट्सएप पोस्ट

KABHI YUN MILE KOI -BASHIR BADR

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Mh_Bashir_Badr

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो

  बशीर बद्र (BASHIR BADR )

कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो
मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो
वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन
वो ग़ुलाब बन के खिलेगा क्या, जो चिराग़ बन के जला न हो
कभी धूप दे, कभी बदलियाँ, दिलो-जाँ से दोनों क़ुबूल हैं
मगर उस नगर में न क़ैद कर, जहाँ ज़िन्दगी का हवा न हो
वो हज़ारों बाग़ों का बाग़ हो, तेरी बरक़तों की बहार से
जहाँ कोई शाख़ हरी न हो, जहाँ कोई फूल खिला न हो
तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे
यूँ दुआयें मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो
कभी हम भी जिस के क़रीब थे, दिलो-जाँ से बढ़कर अज़ीज़ थे
मगर आज ऐसे मिला है वो, कभी पहले जैसे मिला न हो

UMMUL KHER BIOGRAPHY IN HINDI

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 उम्मुल खेर  झुग्गी से सिविल सेवा तक का सफ़र 

From slum to IAS, the moving story of Ummul Kher

आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी साहसी लड़की के बारे में जिसने झुग्गी झोपडी से आईएस तक का  सफ़र तय किया | जिसके ट्युशन पढाने से पुरे परिवार का खर्च चलता था ,आठवी कक्षा में आने के बाद ही जिसपर निकाह का दबाव पड़ने लगा | जिसे हड्डियों की बहुत ही गंभीर बीमारी थी ,जरा सा चोट लगने पर भी जिसकी हड्डिया टूट जाया करती थी उसने कैसे किया आईएस तक का सफ़र आईये जाने ………………

राजस्थान के पाली में जन्मी उम्मुल की मां बहुत बीमार रहती थीं। पापा उन्हें छोड़कर दिल्ली आ गए। मां ने कुछ दिन तो अकेले संघर्ष किया, पर सेहत ज्यादा बिगड़ी, तो बेटी को पापा के पास दिल्ली भेज दिया। तब उम्मूल पांच साल की थीं।

 दिल्ली आकर पता चला कि पापा ने दूसरी शादी कर ली है। वह अपनी नई बीवी के साथ एक झुग्गी में रहते हैं। नई मां का व्यवहार शुरू से अच्छा नहीं रहा। पापा निजामुद्दीन स्टेशन के पास पटरी पर दुकान लगाते थे। मुश्किल से गुजारा चल पाता था। उम्मुल के आने के बाद खर्च बढ़ गया। यह बात नई मां को बिल्कुल अच्छी नहीं लगी।पापा ने झुग्गी के करीब एक स्कूल में उनका दाखिला करा दिया।
बरसात के दिनों में घर टपकने लगता, तो पूरी रात जागकर गुजारनी पड़ती। आस-पास गंदगी का अंबार होता था। मां की बड़ी याद आती थी। बाद में पता चला मां नहीं रहीं। उम्मुल का पढ़ाई में खूब मन लगता था, पर नई मां चाहती थीं कि वह घर के कामकाज में हाथ बंटाएं। स्कूल से लौटने के बाद वह किताबें लेकर बैठ जातीं। यह बात नई मां को बिल्कुल अच्छी नहीं लगती।
 उम्मुल बताती हैं, बस्ती में पढ़ने-लिखने का माहौल न था। बहुत कम बच्चे स्कूल जाते थे। ऐसे में, मेरा किताबों से चिपके रहना अजीब बात थी, इसलिए डांट पड़ती थी। उन दिनों उम्मुल कक्षा सात में पढ़ रही थीं। अचानक पुलिस का अभियान चला और पापा की दुकान हटा दी गई। कमाई का जरिया पूरी तरह बंद हो गया। झुग्गी भी उजाड़ दी गई। परिवार बेघर हो गया। मजबूरी में वे लोग निजामुद्दीन छोड़ त्रिलोकपुरी बस्ती में रहने आ गए।
पापा ने छोटा सा कमरा किराये पर ले लिया। उम्मुल परिवार की दिक्कतों को समझ रही थीं। वह बस्ती में रहने वाले छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगीं। एक बच्चे से पचास-साठ रुपये फीस मिलती थी। उम्मुल बताती हैं, दोपहर तीन बजे स्कूल से लौटने के बाद बच्चों को पढ़ाने बैठ जाती थी। रात नौ बजे तक ट्यूशन क्लास चलती थी। इसके बाद रात में खुद की पढ़ाई करती थी। उनकी कमाई से घर का खर्च चलने लगा।
 वह घर चलाने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही थीं, पर नई मां खुश नहीं थीं। उनको बेटी के स्कूल जाने पर घोर आपत्ति थी। जैसे ही उन्होंने आठवीं कक्षा पास की, मम्मी ने चेतावनी दे दी कि अब तुम स्कूल जाना बंद कर दो। हम तुम्हारे निकाह की तैयारी कर रहे हैं। पर उम्मुल शादी के लिए बिल्कुल राजी न थीं। वह पढ़-लिखकर अच्छी नौकरी करना चाहती थीं।
 सबसे दुखद बात यह थी कि पापा ने भी मम्मी का साथ दिया। जब वह नहीं मानी, तो पापा ने कह दिया कि अगर तुम पढ़ाई नहीं छोड़ोगी, तो तुम्हें वापस राजस्थान भेज देंगे। यह सुनकर उम्मुल घबरा गईं। लगा एक बार गांव वापस गई, तो पढ़ना-लिखना असंभव हो जाएगा।
 उम्मुल बताती हैं, मेरा परिवार पुराने ख्यालात का था। उन्हें लगता था कि स्कूल जाने वाली लड़कियां बड़ों का सम्मान नहीं करती हैं। बेटी की पढ़ाई को लेकर परिवार में आए दिन हंगामा होने लगा। उनको राजस्थान भेजने की तैयारी होने लगी। पर अब उम्मुल बागी हो चुकी थीं। उन्होंने परिवार से अलग रहकर पढ़ाई करने का फैसला किया। ट्यूशन से इतनी कमाई होने लगी थी कि उनके जरूरी खर्चे निकल जाते। वह उसी बस्ती में किराये पर घर लेकर रहने लगीं। बेटी इस तरह बागी हो जाएगी, किसी ने नहीं सोचा था। पर उम्मुल को किसी की परवाह नहीं थी। उनका पूरा फोकस अपनी पढ़ाई पर था।
 बस्ती के कुछ लोग उन पर तंज कसने लगे। देखो, कैसी लड़की है, मां-बाप से अलग रहती है? पढ़ाई में होशियार थी, इसलिए स्कूल से स्कॉलरशिप मिल गई। इस दौरान उम्मुल के पैरों में काफी तकलीफ रहने लगी। डॉक्टर ने बताया कि उन्हें हड्डियों की गंभीर बीमारी है। उम्मुल बताती हैं, मेरी हड्डियां इतनी कमजोर हैं कि जरा सी चोट लगने पर टूट जाती हैं। कई बार मेरी हड्डियां टूट चुकी हैं। काफी समय ह्वील-चेयर पर रहना पड़ा।
तमाम मुश्किलों के बावजूद 10वीं व 12वीं में कॉलेज टॉप किया। चूंकि बोर्ड में अच्छे अंक मिले थे, इसलिए दिल्ली यूनिवर्सिटी में आसानी से दाखिला मिल गया। उम्मुल ने अप्लाइड साइकोलॉजी में बीए किया। इसके बाद जेएनयू से इंटरनेशनल रिलेशन्स में एमए। जेएनयू में आने के बाद उन्होंने बस्ती छोड़ दी।
उम्मुल बताती हैं, जेएनयू ने मेरी जिंदगी बदल दी। यहां मुङो अच्छे माहौल में रहने का मौका मिला। मेस में बढ़िया खाना मिलने लगा। इस दौरान मैंने दिव्यांग बच्चों के लिए काफी काम किया। सामाजिक कार्यो के दौरान कई बार विदेश जाने का मौका भी मिला। फिर उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। सपना पूरा हुआ। इस साल पहली ही कोशिश में उनका आईएएस बनने का सपना पूरा हो गया। उम्मूल कहती हैं- नतीजे आने के बाद मैंने पहला फोन मम्मी-पापा को किया। अब मैं उन्हें अपने साथ रखूंगी। मेरी कामयाबी पर उनका पूरा हक है।

Some Lesser Known Facts About Ummul Kher

  • Ummul is suffering from the fragile bone disorder since childhood. Her parents disowned her when she said she wants to study further after class 8th.
  • She got All India Rank 420 in the UPSC 2016 exams. She hoped for getting IAS under disability quota. She secured 1,001 marks in the exam.
  • She has got 16 fractures and 8 surgeries until now, due to her disease.
  • Ummul’s family came to Delhi from Rajasthan when she was 5 years old, they used to live in a slum near Hazrat Nizamuddin where his father used to sell clothes on street.
  • After she completed her 8th class, her parents forced her to stop studying as she was a girl. Ummul left home and started living in a Jhopri in Trilokpuri, Delhi. She used to earn money from tuitions.
  • Ummul used to teach kids of slums and earn her livelihood.
  • Her schooling was backed by her school, Amar Jyoti Charitable Trust. She secured 91% in class 12th.
  • In 2012, Ummul met with a minor accident which made her confined to a wheelchair for a year due to her bone disorder disease.
  • In 2013, she cracked Junior Research Fellowship (JRF) which got her 25,000 INR per month scholarship.
  • Ummul is in contact with her family and says she has built a good relationship with her family again in last 2 years.
  • Ummul was working in Shinjuku, Japan in “Duskin Leadership Training” as a trainee since September 2014.

साभार -हिंदुस्तान अख़बार

RAMNATH KOVIND BIOGRAPHY IN HINDI

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NDA's presidential nominee Ram Nath Kovind
New Delhi: NDA's presidential nominee Ram Nath Kovind arrives to attend an NDA meeting at Parliament in New Delhi on Friday. PTI Photo by Subhav Shukla (PTI6_23_2017_000151B)

रामनाथ कोविंद (RAMNATH KOVIND)

भारत के तत्कालीन  राष्ट्रपति 

(PRESIDENT OF INDIA)

केआर नारायणन के बाद दलित समुदाय से देश के दूसरे राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि एक छोटे से गांव में मिट्टी के घर में पले-बढ़े और उनकी यात्रा बहुत लंबी रही है। यह यात्रा अकेले उनकी नहीं बल्कि हमारे देश और समाज की यही गाथा रही है। कोविंद ने कहा कि सवा सौ करोड़ नागरिकों ने जो विश्वास उन पर जताया है उस पर खरा उतरने का वचन देते हैं। साथ ही डा राजेंद्र प्रसाद, डा सर्वपल्ली राधाकृष्णन, एपीजे अब्दुल कलाम और अपने पूववर्ती प्रणब मुखर्जी के पदचिन्हों पर चलने का भी भरोसा देते हैं।

जानिए  रामनाथ कोविन्द जी के बारे में …

राम नाथ कोविन्द भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेताओं में से एक हैं। हैं। वह राज्यसभा सदस्य और बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं। इस समय वह भारत के 14 राष्ट्रपति   हैं।

रामनाथ कोविंद का जीवन परिचय

राम नाथ कोविंद का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले की (वर्तमान में कानपुर देहात जिला), तहसील डेरापुर के एक छोटे से गांव परौंख में  1 अक्टूबर 1945 को   हुआ था. कोविंद का सम्बन्ध कोरी या कोली जाति से है जो उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति के अंतर्गत आती है.

दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस

 कानपुर विश्वविद्यालय से एलएलबी करने के बाद श्री कोविन्द ने दिल्ली हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में करीब 16 वर्ष सन् 1993 तक वकालत की।वकील रहने के दौरान कोविंद ने गरीब दलितों के लिए मुफ़्त में क़ानूनी लड़ाई लड़ी।

संसदीय जीवन

 इनका संसदीय जीवन भी सुदीर्घ रहा। सन् 1994 में उत्तर प्रदेश से निर्वाचित होकर राज्यसभा गये और अगले बारह वर्ष, मार्च 2006 तक संसद के उच्च सदन में रहे। संयुक्त राष्ट्रसंघ में भी इन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया और अक्टूबर 2002 में संयुक्त राष्ट्र संघ को संबोधित किया। भारतीय जनता पार्टी में भी लम्बे समय तक राष्ट्रीय संगठन में प्रमुख भूमिका निभाई। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और दलित प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में अपनी पहचान इन्होंने बड़ी की। वह भाजपा दलित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय कोली समाज अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1986 में दलित वर्ग के कानूनी सहायता ब्युरो के महामंत्री भी रहे।

कई कमेटियों के रह चुके है  चेयरमैन

आदिवासी, होम अफ़ेयर, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, सामाजिक न्याय, क़ानून न्याय व्यवस्था और राज्यसभा हाउस कमेटी के भी चेयरमैन रहे। कोविंद गवरनर्स ऑफ इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट के भी सदस्य रहे हैं। 2002 में कोविंद ने संयुक्त राष्ट्र के महासभा को भी संबोधित किया था। इसके अलावा वो बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी रह चुके हैं।

घाटमपुर से लड़ चुके हैं लोकसभा चुनाव

कोविंद को पार्टी ने वर्ष 1990 में घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन वह चुनाव हार गए. वर्ष 1993 व 1999 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश से दो बार राज्यसभा में भेजा. पार्टी के लिए दलित चेहरा बन गये कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे.

घाटमपुर से चुनाव लड़ने के बाद कोविंद लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं से संपर्क में रहे. राज्यसभा सदस्य के रूप में क्षेत्र के विकास में लगातार सक्रिय रहने का ही परिणाम है कि उनके राज्यपाल बनने की खबर सुनते ही लोग फोन पर बधाई देने लगे.

वर्ष 2007 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए.

आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता

परौख गांव में 1945 में जन्मे रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लाक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई. कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी कॉम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की.

अाईएएस एलाइड सेवा के लिए चुने गए

मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी. जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनने पर वे वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव रहे थे. जनता पार्टी की सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया.

बेदाग छवि और कानून के बड़े जानकार हैं कोविन्द

एनडीए के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी व बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविन्द की छवि बेदाग और निष्पक्ष तथा निरपेक्ष है। कानून के वे बड़े जानकार हैं। 8 अगस्त 2015 को बिहार के राज्यपाल के रूप में उनकी नियुक्ति हुई थी और 16 अगस्त को उन्होंने पदभार संभाला था। करीब 22 महीने के कार्यकाल में इन्होंने राज्य सरकार से आदर्श और गरिमापूर्ण संबंध बनाए रखा। न सत्तापक्ष, न विपक्ष किसी की इनसे कोई शिकायत नहीं रही। गंभीर व ज्वलंत मुद्दों को भी इन्होंने बहुत ही सरल ढंग से सुलझाया। राज्यपाल के रूप में श्री कोविन्द ने एक मिसाल कायम की तथा अपनी बेहतरीन छवि बनायी।

सरकार के रचनात्मक फैसलों के साथ खड़े रहे

 बिहार के राज्यपाल के रूप में रामनाथ कोविन्द विकास के तमाम प्रयासों में राज्य सरकार के साथ खड़े रहे। उनके पद संभालने के तीन माह बाद ही बिहार में विधानसभा का शांतिपूर्ण चुनाव हुआ। उन्होंने चौथी बार मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार तथा उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों को गांधी मैदान में शपथ दिलायी। उसके बाद से सरकार के सभी रचनात्मक विधेयक और अध्यादेश पर अपनी मुहर लगायी। कभी सरकार तथा राजभवन के बीच गतिरोध या टकराव की स्थिति नहीं दिखी। वहीं, चांसलर के रूप में भी श्री कोविन्द ने राज्य के विश्वविद्यालयों में कई कारगर हस्तक्षेप किये, जिनमें से कई हस्तक्षेपों के परिणाम भी सामने आने लगे हैं।
’ राज्य सरकार के शराबबंदी के फैसले के साथ खड़े रहे। इसके लिए बने कानून पर मुहर लगायी। शराबबंदी को लेकर ऐतिहासिक मानव श्रृंखला की तारीफ की तथा शराबबंदी को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में बिहार सरकार की कारगर पहल करार दिया’ राज्य सरकार के परामर्श से सर्च कमेटी की अनुशंसा पर राज्य के विश्वविद्यालयों में कुलपति और प्रतिकुलपतियों की नियुक्ति की ’ बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन को हरी झंडी दी। इससे राज्य में दो नये पाटलिपुत्र और पूर्णिया विश्वविद्यालय की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ’ विकास पर चर्चा के लिए विधानमंडल सत्र के दौरान हर सुबह एक- एक प्रमंडल के विधायकों से मिलने की परंपरा शुरू की। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी ऐसी हर बैठक में मौजूद रहे

योगासन और घंटे भर की सैर से शुरू होती है दिनचर्या

एनडीए द्वारा राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी घोषित किए गए बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद की दिनचर्या अहले सुबह घंटेभर की सैर से शुरू होती है। फिर इतनी ही देर वह विपश्यना और योग करते हैं। इसके बाद सहज-सुलभ कोविन्द आम लोगों से मिलते हैं।सुबह दस बजे के करीब नियमित रूप से राजभवन के ऊपरी तल से नीचे दफ्तर में बैठते हैं और सात-आठ मुलाकातियों से मिलते हैं। मुलाकातियों में राजनीतिक कार्यकर्ता, विद्वान, कलाकार, कवि, साहित्यकार समेत विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोग, जिसने भी मिलने की इच्छा जताई, आग्रह पत्र भेजा उन्हें निश्चित समय मिलता है।

राजधानी पटना समेत राज्य के हर हिस्से में अधिकाधिक कार्यक्रमों में शामिल होना उनका शगल था। कैमूर, जहानाबाद, मुंगेर, गया समेत प्राय: सभी प्रमुख शहरों के समारोहों में वे गए। विशुद्ध रूप से शाकाहारी भोजन, वह भी बिना मसाला, तेल का। चाय भी ग्रीन टी, बिना शक्कर के लेते हैं। आयोजकों को साफ निर्देश रहता था कि वे छाछ और नारियल पानी ही लेंगे। रात दस बजे सोने के लिए जाते हैं और सुबह पांच-साढ़े पांच बजे उठते हैं। पढ़ने की भी खूब आदत है। व्यक्तित्व केंद्रित किताबें उनकी टेबल पर हमेशा रहती हैं।
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ADARSH PREM -HARIVANSH RAI BACHCHAN

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आदर्श प्रेम / हरिवंशराय बच्चन

प्यार किसी को करना लेकिन
कह कर उसे बताना क्या
अपने को अर्पण करना पर
और को अपनाना क्या
गुण का ग्राहक बनना लेकिन
गा कर उसे सुनाना क्या
मन के कल्पित भावों से
औरों को भ्रम में लाना क्या
ले लेना सुगंध सुमनों की
तोड उन्हे मुरझाना क्या
प्रेम हार पहनाना लेकिन
प्रेम पाश फैलाना क्या
त्याग अंक में पले प्रेम शिशु
उनमें स्वार्थ बताना क्या
दे कर हृदय हृदय पाने की
आशा व्यर्थ लगाना क्या
~ आदर्श प्रेम / हरिवंशराय बच्चन

BEST HINDI QUOTES ( PAGE-1)

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 BEST HINDI QUOTES (PAGE -1)

अनमोल वचन – अनमोल विचार

“Think big, think fast, think ahead. Ideas are no one’s monopoly. ” – Dheerubhai Ambani
“बड़ा सोचें, जल्दी सोचें, आगे की सोचें। विचारों पर किसी का एकाधिकार नहीं है।” धीरूभाई अंबानी
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“Who gossips with you will gossip of you.” – Irish saying
“जो आप के साथ गप्प लगाता है, वह दूसरों के साथ आप के बारे में गप्प लगाएगा।” – आयरलैंड की कहावत
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“Circumstances are beyond human control, but our conduct is in our own power.” – Benjamin Disraeli
“परिस्थितियाँ मानव नियंत्रण से बाहर हैं, लेकिन हमारा आचरण हमारे ही नियंत्रण में है।” – बेंजामिन डिसरायलि
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“You use a glass mirror to see your face; you use works of art to see your soul.” – George Bernard Shaw
“आप कांच के दर्पण में अपना चेहरा देख सकते हैं; और कलात्मक रचनाओं में आप अपनी आत्मा को देख सकते हैं।” – जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
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“Life isn’t about finding yourself. Life is about creating yourself.” – George Bernard Shaw
“जीवन अपने आप को खोजने के बारे में नहीं है। जीवन अपना निर्माण स्वयं करने के बारे में है।” – जॉर्ज बर्नार्ड शॉ
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“The tragedy of life doesn’t lie in not reaching your goal. The tragedy lies in having no goals to reach.” – Benjamin Mays
“जीवन की त्रासदी यह नहीं है कि आप अपने लक्ष्य तक नहीं पहुँच पाए। त्रासदी तो पहुँचने के लिए लक्ष्य ही न होने में है।” – बेंजामिन मेस
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“A good head and a good heart are always a formidable combination.” – Nelson Mandela
“तेज दिमाग और सच्चे दिल के जोड़ से जीतना दूभर है।” – नेल्सन मंडेला
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“He who fears being conquered is sure of defeat.” – Napoleon Bonaparte
“जिसे हार जाने का डर होता है उसकी हार निश्चित होती है।” – नेपोलियन बोनापार्ट
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“If you tell the truth, you don’t have to remember anything.” – Mark Twain
“यदि आप हमेशा सच कहते हैं, तो आपको कुछ याद रखने की जरूरत नहीं रहेगी।” – मार्क ट्वैन
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“A man is great by deeds, not by birth.” – Chanakya
“व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है, अपने जन्म से नहीं।” – चाणक्य
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“Being ignorant is not so much a shame, as being unwilling to learn.” – Benjamin Franklin
“अज्ञानी होना उतनी शर्म की बात नहीं है जितना कि सीखने की इच्छा न रखना.” – बेंजामिन फ्रैंकलिन
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“Choose a job you love, and you will never have to work a day in your life.” – Confucius
“उस पेशे का चयन कीजिये जिसे आप पसंद करते हों, फिर आप पूरी ज़िन्दगी एक भी दिन नौकरी नहीं करेंगे।” – कन्फ्यूशियस
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“A superior man is modest in his speech, but exceeds in his actions.” – Confucius
“एक श्रेष्ठ व्यक्ति कथनी में कम, लेकिन करनी में ज्यादा होता है।” – कन्फ्यूशियस
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“By failing to prepare, you are preparing to fail.” – Benjamin Franklin
“सफलता के लिए तैयारी न करना असफलता के लिए तैयारी करने के समान है।” – बेंजामिन फ्रैंकलिन
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“Success is a lousy teacher. It seduces smart people into thinking they can’t lose.” – Bill Gates
“सफलता एक घटिया शिक्षक है। यह लोगों में यह सोच विकसित कर देता है कि वे असफल नहीं हो सकते।” – बिल गेट्स
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“The uncreative mind can spot wrong answers but it takes a creative mind to spot wrong questions.” – A. Jay
“अरचनात्मक मस्तिष्क ग़लत उत्तरों को पकड़ सकता है लेकिन ग़लत प्रश्नों को पकड़ने के लिये रचनात्मक मष्तिष्क चाहिये।” – ए. जे.
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“Faith is taking the first step even when you don’t see the whole staircase.” – Martin Luther King, Jr.
“पूरी पंक्तियां नहीं दिखाई देने के बाद भी पहला कदम बढ़ा लेना आस्था है। ” – मार्टिन लूथर किंग, जूनियर
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“Forget about competitors, just focus on your customers.” – Jack Ma
“प्रतिस्पर्धियों को भूल जाएं, और केवल अपने ग्राहकों पर ध्यान लगाएं। ” – जैक मा
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“If you cannot do great things, do small things in a great way.” – Napolean Hill
“अगर आप महान काम नहीं कर सकते तो छोटे काम महान तरीके से करें।” – नेपोलियन हिल
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“The greatest enemy of knowledge is not ignorance, it is the illusion of knowledge.” – Stephen Hawking
“ज्ञान का सबसे बड़ा शत्रु अज्ञान नहीं है, बल्कि ज्ञान का मिथ्याभास है। ” – स्टीफन हॉकिंग
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“Success is not a random act. It arises out of predictable and powerful sets of circumstances and opportunities. ” – Malcolm Gladwell
“सफलता एक आकस्मिक घटना नहीं होती। यह तो अपेक्षित और शक्तिशाली परिस्थितियों और अवसरों के समूह से उत्पन्न होती है। ” – मैल्कम ग्लैडवेल
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“Death is so terribly final, while life is full of possibilities.” – Tyrion Lannister
“मृत्यु भयावह तरीके से निर्णायक होती है, जबकी जीवन सम्भावनाओं से भरा होता है। ” – टायरियन लैनिस्टर
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“To think too long about doing a thing often becomes its undoing.” – Eva Young
“किसी काम को करने के बारे में बहुत देर तक सोचते रहना अक़सर उस के बिगड़ जाने का कारण बनता है।” – ईवा यंग
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“Character is much easier kept than recovered.” – Thomas Paine
“चरित्र को बनाए रखना आसान है, उस के भ्रष्ट हो जाने के बाद उसे सुधारना कठिन है।” – टॉमस पेन
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“Fall seven times, stand up eight!” – Japanese Proverb
“यदि आप सात बार गिरते हैं, तो आठ बार खड़ें हों!” – जापानी कहावत
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“Nothing is enough to the man for whom enough is too little.” – Epicurus
“जिस व्यक्ति को पर्याप्त भी कम लगता हो उसके लिये कितनी भी उपलब्धता अपर्याप्त है।” – एपिक्युरस
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“To profit from good advice requires more wisdom than to give it.” – J. Collins
“किसी को राय देने की तुलना में किसी अच्छी राय से फ़ायदा उठाने के लिये अधिक बुद्धिमत्ता की आवश्यकता होती है।” – जे. कॉलिंस
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“A tomb now suffices him for whom the whole world was not sufficient.” – Epitaph for Alexander the Great
“जिसके लिये पूरी दुनिया कम पड़ती थी उसके लिये एक समाधि अब पर्याप्त है।” – सिकंदर महान के लिये समाधिलेख
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“No great man ever complains of want of opportunity.” – Ralph Waldo Emerson
“कोई भी महान व्यक्ति अवसरों की कमी की शिकायत नहीं करता।” – राल्फ वाल्डो इमर्सन
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SHAKTI AUR KSHAMA -RAMDHARI SINGH DINAKAR

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शक्ति और क्षमा (कविता )

 रामधारी सिंह “दिनकर”

क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल
सबका लिया सहारा
पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे
कहो, कहाँ, कब हारा?
क्षमाशील हो रिपु-समक्ष
तुम हुये विनत जितना ही
दुष्ट कौरवों ने तुमको
कायर समझा उतना ही।
अत्याचार सहन करने का
कुफल यही होता है
पौरुष का आतंक मनुज
कोमल होकर खोता है।
क्षमा शोभती उस भुजंग को
जिसके पास गरल हो
उसको क्या जो दंतहीन
विषरहित, विनीत, सरल हो।
तीन दिवस तक पंथ मांगते
रघुपति सिन्धु किनारे,
बैठे पढ़ते रहे छन्द
अनुनय के प्यारे-प्यारे।
उत्तर में जब एक नाद भी
उठा नहीं सागर से
उठी अधीर धधक पौरुष की
आग राम के शर से।
सिन्धु देह धर त्राहि-त्राहि
करता आ गिरा शरण में
चरण पूज दासता ग्रहण की
बँधा मूढ़ बन्धन में।
सच पूछो, तो शर में ही
बसती है दीप्ति विनय की
सन्धि-वचन संपूज्य उसी का
जिसमें शक्ति विजय की।
सहनशीलता, क्षमा, दया को
तभी पूजता जग है
बल का दर्प चमकता उसके
पीछे जब जगमग है।
~ शक्ति और क्षमा / रामधारी सिंह “दिनकर”

HINDU YA MUSLIM KE AHSAS KO MAT CHHEDIYE ADAM GONDVI

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हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये – अदम गोंडवी

हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये
अपनी कुरसी के लिए जज्बात को मत छेड़िये
हममें कोई हूण, कोई शक, कोई मंगोल है
दफ़्न है जो बात, अब उस बात को मत छेड़िये
ग़र ग़लतियाँ बाबर की थीं; जुम्मन का घर फिर क्यों जले
ऐसे नाजुक वक्त में हालात को मत छेड़िये
हैं कहाँ हिटलर, हलाकू, जार या चंगेज़ ख़ाँ
मिट गये सब, क़ौम की औक़ात को मत छेड़िये
छेड़िये इक जंग, मिल-जुल कर गरीबी के ख़िलाफ़
दोस्त, मेरे मजहबी नग्मात को मत छेड़िये
~ हिन्दू या मुस्लिम के अहसासात को मत छेड़िये / अदम गोंडवी

JASVINDER SANGHERA BIOGRAPHY IN HINDI

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जसविंदर संघेरा 

(ब्रिटेन में  सामजिक कार्यकर्ता )

पंद्रह साल की उम्र में मेरी शादी तय कर दी गई।
 इनकार किया, तो कमरे में कैद कर दिया गया।
 स्कूल जाना बंद हो गया। मैं क्या करती?
 घर छोड़कर भागना पड़ा।
 परिवार ने मुङो त्याग दिया, 
लेकिन मुझे  अपने फैसले पर किसी तरह की शर्म या पछतावा नहीं है।
 
 

वह 1950 का दौर था। जसविंदर के पिता काम की तलाश में ब्रिटेन आए और यहीं बस गए। परिवार ब्रिटेन के डर्बी इलाके में रहने लगा। यहीं जसविंदर का जन्म हुआ। मम्मी-पापा को हमेशा अपनी पांच बेटियों की चिंता रहती थी। वे जल्द से जल्द उनकी शादी करके जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते थी। बड़ी तीन बेटियों की शादी 14 या 15 साल की उम्र में करा दी गई थी। अब जसविंदर की बारी थी।

बेटियों को मायके में ससुराल की शिकायत करने की इजाजत नहीं थी। जब भी वे सास-ससुर के जुल्म या पति की शिकायत करतीं, तो उन्हें सलाह दी जाती कि वे हर हाल में ससुरालवालों को खुश रखें। मायके में तो बस वे मेहमान हैं। यह सुनकर बेटियां चुप रह जातीं। मगर जसविंदर का मिजाज जुदा था। बहनों की तरह चुप रहकर दर्द सहना उनके स्वभाव में नहीं था। वह पढ़-लिखकर एक स्वतंत्र जिंदगी जीना चाहती थीं।
उस समय वह 15 साल की थीं। एक दिन मां उन्हें बड़े प्यार से अपने कमरे में ले गईं। एक लड़के की फोटो दिखाते हुए कहा कि हमने यह लड़का पसंद किया है। इससे तुम्हारी शादी होगी। यह सुनते ही जसविंदर चीखीं, मैं नहीं करूंगी शादी। अब मां का लहजा सख्त हो गया। उन्होंने कहा, शादी तो करनी होगी। जब मैं तुम्हारी उम्र की थी, तो मेरी भी शादी हो गई थी। मगर बेटी अड़ गई, नहीं करूंगी शादी, चाहे जो हो जाए।
 अगले दिन से जसविंदर का स्कूल जाना बंद हो गया। उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया। मां ने साफ कह दिया, जब तक तुम शादी के लिए राजी नहीं हो जाती, इसी कमरे में कैद रहोगी। सुबह-शाम कमरे में खाना मिल जाता था और फिर दरवाजा बंद कर दिया जाता। करीब छह हफ्ते यूं ही बीत गए। जसविंदर मौके की तलाश में थीं।
एक दिन कमरे की खिड़की खुली रह गई। रात के समय वह चुपके से भाग निकलीं। जाने से पहले पापा के नाम खत लिखा, मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं, पर मैं वैसी बेटी नहीं बन सकती, जैसा आप मुङो बनाना चाहते हैं।घर से निकलने के बाद उन्होंने कुछ रातें पार्क की बेंच पर गुजारीं। इसके बाद स्कूल के दोस्त जेसी से मदद मांगी और उसके परिवार के साथ रहने लगीं।
जसविंदर बताती हैं, जेसी का परिवार खुले विचारों का था। उन्होंने मुझे  बहुत प्यार दिया। सोचती थी कि काश, मेरे परिवार के लोग भी ऐसे होते। इधर घर में हंगामा मच गया। बेटी के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने जल्द ही उन्हें खोज लिया। उन्होंने पुलिसवाले से कहा, मुझे   घर मत भेजिए। मम्मी-पापा मेरी जबरदस्ती शादी करवा देंगे।
 पुलिस वालों ने कहा, हम तुम्हें घर नहीं भेजेंगे, मगर तुम्हें घर पर फोन करके बताना होगा कि तुम सुरक्षित हो। जसविंदर बताती हैं- मम्मी ने फोन उठाया। मैंने सोचा कि वह कहेंगी, बेटी घर लौट आओ, पर उन्होंने कहा कि तुमने हमारी पंसद के लड़के से शादी न की, तो हम मान लेंगे कि तुम मर गई हो।मां की बात सुनने के बाद उन्होंने तय कर लिया कि चाहे जो हो जाए, अब घर नहीं लौटूंगी। रिश्तेदारी में खूब बदनामी हुई। लोग पिता को ताना मारने लगे कि इनकी बेटी भाग गई है। मजबूरी में परिवार ने जसविंदर की छोटी बहन से उस लड़के की शादी करा दी।
 उधर भागी हुई बेटी को परिवार की याद सताने लगी। कई बार वह चुपके से घर के बाहर आकर परिवार के लोगों को देखती। जसविंदर बताती हैं, मैं पापा को घर से बाहर जाते देखती, तो मन रो पड़ता। भाई-बहनों को देखती, तो मन करता कि उनके गले लग जाऊं। मगर हिम्मत नहीं पड़ी।
 इस बीच खबर मिली कि बड़ी बहन रोबिना ने आग लगाकर आत्महत्या कर ली है। यह सुनकर वह खूब रोईं। वह पहले से जानती थीं कि बहन को ससुराल में काफी सताया जा रहा था। एक बार जब रोबिना ने मां-पापा को बताया कि पति बहुत पीटता है, तो मां ने उससे कहा था कि ससुराल छोड़कर मत आना। बदनामी होगी।बहन के अंतिम संस्कार में जसविंदर घर तो पहुंचीं, पर किसी ने उनसे बात नहीं की। कहा गया कि दोबारा कभी मत आना। परिवार वालों को लगता था कि जसविंदर की वजह से उनकी काफी बदनामी हुई है। परिवार से उनकी दूरी बढ़ती गई।
 वह पढ़ाई के साथ नए मिशन से जुड़ गईं। उन्होंने कर्म निर्वाण नाम की संस्था बनाई। यह संस्था वैवाहिक उत्पीड़न व जबरदस्ती शादी के शिकार बने लोगों की मदद करती है। उन्होंने हजारों महिलाओं को उत्पीड़न से बचाया।
वर्ष 2007 में उन्हें सबसे प्रतिष्ठित महिला होने का खिताब मिला। 2009 में आई उनकी किताब डॉटर्स ऑफ शेम को बहुत पसंद किया गया। इस किताब में इज्जत के नाम पर बेटियों के संग होने वाले जुल्म को बयां किया गया है। 2009 में उन्हें द प्राइड ऑफ ब्रिटेन अवॉर्ड मिला।
 2013 में कमांडर ऑफ ब्रिटिश एम्पायर का सम्मान मिला। जसविंदर कहती हैं, मैं आज दो बेटियों की मां हूं। मैंने उन्हें पढ़ने और जीने की पूरी आजादी दी है। मैं खुश हूं कि मैंने बेटियों पर जुल्म करने वाली परंपरा को तोड़ने की हिम्मत दिखाई।
साभार – हिंदुस्तान अख़बार