कुछ रह तो नहीं गया
कुछ रह तो नहीं गया ?
पर्स, चाबी सब ले लिया ना ?
पैसे के पीछे भागते भागते… सब कुछ पाने की ख्वाईश में वो जिसके लिये सब कुछ कर रही है ,
*वह ही रह गया है…..*
चेक करो ठीक से ।
.. बाप चेक करने गया तो दुल्हन के रूम में कुछ फूल सूखे पड़े थे।
सब कुछ तो पीछे रह गया…
25 साल जो नाम लेकर जिसको आवाज देता था लाड से…
वो नाम पीछे रह गया और उस नाम के आगे गर्व से जो नाम लगाता था, वो नाम भी पीछे रह गया अब …
कुछ पीछे तो नहीं रह गया ?”
बुआ के इस सवाल पर आँखों में आये आंसू छुपाते बाप जुबाँ से तो नहीं बोला….
पर दिल में एक ही आवाज थी…
पौत्र जन्म पर बमुश्किल 3 माह का वीजा मिला था और चलते वक्त बेटे ने प्रश्न किया सब कुछ चैक कर लिया कुछ रह तो नही गया ?
क्या जबाब देते कि
*अब छूटने को बचा ही क्या है ….*
थोडा रूका और सोचा पूरी जिन्दगी तो यही आने- जाने मे बीत गई !
*अब और क्या रह गया होगा ?*
पर नजर फेर ली,
एक बार पीछे देखने के लिए….पिता की चिता की सुलगती आग देखकर मन भर आया ।
भागते हुए गया , पिता के चेहरे की झलक तलाशने की असफल कोशिश की और वापिस लौट आया ।
*नहीं कुछ भी नहीं रहा अब…*
*और जो कुछ भी रह गया है वह सदा मेरे साथ रहेगा* ।।
*इस जीवन की शाम हो जाये…….*
*कुछ रह न जाये ।….*
