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Thursday, March 19, 2026
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MEIRA KUMAR BIOGRAPHY IN HINDI

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लोकसभा की पहली महिला अध्यक्ष मीरा कुमार

 
MEIRA KUMAR -मीरा कुमार  

 

अपने पिता स्वर्गीय जगजीवन राम के अधूरे सपने और संकल्प को पूरा करने के लिए भारतीय विदेश सेवा की नौकरी छोड़कर राजनीति में आईं मीरा कुमार स्वभाव से अत्यंत सौम्य, मृदुभाषी और मिलनसार हैं।राजीतिक पृष्ठभूमि वाली  मीरा कुमार को गुस्सा नहीं आता है। गुस्से में भी वह नहीं चीखती हैं। सौम्य हैं। हंसमुख हैं। पढ़ाकू भी हैं। मीरा कुमार अब तक पांच बार सांसद बन चुकी हैं वर्ष 2017 में मीरा कुमार को यूपीए द्वारा अपना राष्ट्रपति उम्मीदवार बनाया गया पर वो रामनाथ कोविंद से हार गयी 

 

प्रारंभिक जीवन 

मीरा कुमार का जन्म 31 मार्च, 1945 को बाबू जगजीवन राम और इन्द्राणी देवी के यहाँ सासाराम बिहार में हुआ था मीरा कुमार की प्रारंभिक शिक्षा दिल्ली के महारानी गायत्री देवी स्कूल में हुई। मीरा कुमार ने दिल्ली के इन्द्रप्रस्थ और मिरांडा हाउस कॉलेजों से एम ए और एल एल बी तक शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1973 में वह भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) के लिए चुनी गईं। कुछ वर्षो तक स्पेन, ब्रिटेन और मॉरीशस में उच्चायुक्त रहीं लेकिन उन्हें अफसरशाही रास नहीं आई और उन्होंने राजनीति में कदम बढ़ाने का फैसला किया। मीरा कुमार अंग्रेजी, स्‍‍पेनिश, हिंदी, संस्कृत, भोजपुरी भाषाओ में निपुण है। मीरा कुमार वर्ष 1968 में बिहार की पहली महिला कैबिनेट मंत्री सुमित्रा देवी के बड़े पुत्र मंजुल कुमार से परिणय सूत्र में बंधी।मीरा कुमार के एक पुत्र (अंशुल) एवं दो पुत्रियाँ (स्‍‍वाति और देवांगना) हैं।

राजनीतिक सफर –

मीरा कुमार ने अपना राजनीतिक सफर की शुरुआत उत्तर प्रदेश से किया। भारतीय राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित करने वाले बाबू जगजीवन राम के घर में पली-बढ़ी मीरा कुमार कांग्रेस के टिकट पर पहली बार 1985 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर लोकसभा क्षेत्र से उप चुनाव लड़ी और तब उन्होंने मायावती और रामविलास पासवान को पराजित कर राजनीति में धमाकेदार शुरुआत की ।हालांकि इसके बाद हुए चुनाव में वह बिजनौर से पराजित हुई। इसके बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला और 11 वीं तथा 12 वीं लोकसभा के चुनाव में वह दिल्ली के करोलबाग संसदीय क्षेत्र से विजयी होकर फिर संसद पहुंचीं।

कांग्रेस कमेटी का महासचिव पद भी संभाला

मीरा कुमार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रयास से 1990 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव बनीं। 1996 में वे दूसरी बार सांसद बनीं और तीसरी पारी उन्होंने 1998 में शुरु की। 2004 में बिहार के सासाराम से लोक सभा सीट जीती। उस समय इन्हें पहली बार केन्द्र में मंत्री पद भी प्राप्त हुआ और सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया।

राजग की हवा में भी सासाराम सीट को बरकरार रखा

15 वीं लोकसभा चुनाव में बिहार में जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की हवा बह रही थी, उसमें भी मीरा कुमार ने सासाराम सीट को बरकरार रखा तथा अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मुनिलाल को 45 हजार से ज्यादा मतों से पराजित किया। फलस्वरूप केन्द्र में उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा देते हुए जल संसाधन मंत्रालय सौंपा गया था।

पहली महिला स्पीकर

संसद के स्पीकर पद पर पहुंचने वाली वे पहली महिला हैं। वह भी दलित। इक्कीसवीं सदी में दुनिया के 187 मौजूदा लोकतांत्रिक देशों में से केवल 32 देशों में ही महिलाएं इस पद तक पहुंचने में सफल हो पाई हैं । आस्ट्रिया दुनिया का पहला देश है, जहां किसी महिला को संसद का स्पीकर चुना गया। द्वितीय विश्वयुद्ध से पहले आस्ट्रियाई संसद बंदुेस्रात में पहली बार महिला स्पीकर पद पर आसीन हुई थी।

MIERA KUMAR BIHAR

प्रिय पुस्तक अभिज्ञान शांकुतलम्

मीरा कुमार कहती है कि मैं हमेशा कुछ न कुछ पढ़ती रहती हूं और मेरी प्रिय पुस्तक महाकवि कालिदास की अभिज्ञान शांकुतलम् है। पहली बार इस सदन की सदस्य बनने पर मैं पीछे की बेंच पर बैठा करती थी। जब मैं स्कूल की छात्रा थी, तब कई बार दर्शक दीर्घा से मैंने लोकसभा की कार्यवाही को देखा । उस समय स्वतंत्रता संग्राम के पुरोधा इस सदन में बैठकर देश के लोगों के हित में फैसले लेते थे। खासकर दलितों, वंचितों और कमजोर तथा हाशिए पर खड़े लोगों के लिए वह बड़ी मशक्कत करते थे।

कला और साहित्य से  विशेष लगाव 

भारतीय इतिहास में विशेष रुचि रखने वाली मीरा कुमार को कला और साहित्य से भी विशेष लगाव है।उन्हें देश-विदेश की ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करने का भी शौक है। विदेश सेवा में कार्यरत होने के कारण बड़े पैमाने पर उन्होंने विदेश यात्राएं की हैं। हस्तशिल्प प्रेमी होने के अलावा मीरा कुमार एक अच्छी कवियित्री भी हैं. वह अपना खाली समय किताबें पढ़ने और शास्त्रीय संगीत सुनने में व्यतीत करती हैं। उनकी लिखी कई कविताएं प्रकाशित भी हुई हैं।

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देखिये बिहार के दुर्गा पूजा की एक झलक -28 सितम्बर 2017

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BIHAR DURGA PUJA -2017

बिहार के दुर्गा पूजा के माता की तस्वीरे एवं पंडाल की झलक देखिये 

हरिसभा चौक, मुज़फ़्फ़रपुर ,पटना  (HARISABHA CHOUK , MUZAFFARPUR,PATNA )


हरिसभा चौक, मुज़फ़्फ़रपुर ,पटना  (HARISABHA CHOUK , MUZAFFARPUR,PATNA )


आई जी एम एस ,राजा बाज़ार ,पटना (IGMS ,RAJA BAZAR,PATNA )

आई जी एम एस ,राजा बाज़ार ,पटना (IGMS ,RAJA BAZAR,PATNA )

बोर्ड अपर ,नोखा रोहतास (BOARD UPPER,NOKHA ,ROHTAS)

 
बोर्ड अपर ,नोखा रोहतास (BOARD UPPER,NOKHA ,ROHTAS)

पुलिस लाइन ,पटना  (POLICE LINE ,PATNA )

 

पुलिस लाइन ,पटना  (POLICE LINE ,PATNA )

 

 बोरिंग रोड चौराहा ,पटना (BOARING ROAD CHOURAHA,PATNA)


बोरिंग रोड चौराहा ,पटना (BOARING ROAD CHOURAHA,PATNA)

 

दानापुर ,पटना (DANAPUR PATNA )



दानापुर ,पटना (DANAPUR PATNA )


पंचमुखी हनुमान मंदिर ,बोरिंग रोड ,पटना (PANCHMUKHI HANUMAN MANDIR,BOARING ROAD ,PATNA )



पंचमुखी हनुमान मंदिर ,बोरिंग रोड ,पटना (PANCHMUKHI HANUMAN MANDIR,BOARING ROAD ,PATNA )


हाउसिंग बोर्ड ,हनुमान नगर ,पटना (HOUSING BOARD ,HANUMAN NAGAR,PATNA)



हाउसिंग बोर्ड ,हनुमान नगर ,पटना (HOUSING BOARD ,HANUMAN NAGAR,PATNA)


होटल सिटी सेंटर , पटना (HOTEL CITY CENTER,PATNA)

 

होटल सिटी सेंटर , पटना (HOTEL CITY CENTER,PATNA)


नूरसराय ,बिहार (NOORSARAI ,BIHAR )

नूरसराय ,बिहार (NOORSARAI ,BIHAR )

इसलामपुर, नालँदा, बिहार (ISLAMPUR ,NALANDA,BIHAR)


इसलामपुर, नालँदा, बिहार (ISLAMPUR ,NALANDA,BIHAR)

भैंसासुर, बिहारशरीफ (BHAINSASUR,BIHARSHARIF)

भैंसासुर, बिहारशरीफ (BHAINSASUR,BIHARSHARIF)

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चौदह साल का लड़का बना इंग्लैंड के यूनिवर्सिटी का प्रोफेसर

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YASHA YESLE ( याशा एस्ले )

चौदह साल की उम्र में जब बच्चे किशोरावस्था में कदम रखते है तो उस समय बहुत सारी बाते उन्हें मालूम नहीं होती है . इस उम्रे में मस्ती मजाक खेल कूद में ज्यादा मजा आता है लेकिन यदि हम आपसे कहे की तेरह साल की उम्र में कोई लड़का प्रोफेसर बन कर लोगो को पढ़ा रहा है तो क्या आप यकीन करेंगे नहीं न लेकिन ये सच है

 ह्यूमन कैलकुलेटर के  नाम से है प्रसिद्ध 

इरानी मूल के इस बच्चे का नाम है याशा एस्ले जिन्हें ह्यूमन कैलकुलेटर कहा जाता है । गणित के अविश्वसनीय ज्ञान से लैस वह इंग्लैंड की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में छात्रों को पढ़ा रहे हैं, साथ ही अपनी डिग्री की पढ़ाई भी पूरी कर रहे हैं। दुनिया के सबसे नन्हे प्रोफेसर याशा एस्ले ने साबित कर दिया कि किसी भी काम को करने के लिए उम्र कोई मायने नहीं रखती है।

बचपन से ही गणित में है रूचि 

याशा के पिता मूसा एस्ले बताते हैं कि याशा को शुरू से ही गणित में रुचि थी। वे उन्हे रोज गाड़ी में यूनिवर्सिटी छोड़ने जाते हैं। वह अपना डिग्री कोर्स खत्म करने के करीब है और जल्द ही अपनी पीएचडी शुरू करने वाला है।

यूनिवर्सिटी  पैनल भी  गणित के ज्ञान को देखकर था  हैरान 

याशा एस्ले का यहाँ तक का सफ़र आसान नहीं रहा । याशा का अनोखा गणित ज्ञान देखकर उनके पिता ने यूनिवर्सिटी से संपर्क किया था। उस वक्त इसकी उम्र सिर्फ तेरह साल थी।उसके बाद इसे यूनिवर्सिटी में बुलाया गया। याशा बताते हैं कि पहली मुलाकात के वक्त यूनिवर्सिटी के पैनल ने उनकी कम उम्र को देखते हुए कई तरह के सवाल किए थे, लेकिन मैंने उन्हे लाजवाब कर दिया । यूनिवर्सिटी का पैनल भी इसके गणित के ज्ञान को देखकर हैरान हो उठा।

मानव संसाधन विकास विभाग से लेनी पड़ी विशेष अनुमति 

उन्हें अतिथि शिक्षक के रूप में नियुक्त कर लिया गया। अतिथि शिक्षक पद पर नियुक्ति से पहले उन्हें मानव संसाधन विकास विभाग से विशेष अनुमति लेनी पड़ी। यूनिवर्सिटी ने जब यह अनुमति लेस्टर परिषद के सामने रखी तो परीषद के अधिकारीयों को भी यकीन नहीं हुआ। जब वे याशा से मिले तो वे भी आश्चर्यचकित रह गए । अब किसी 14 साल के बच्चे को यूनिवर्सिटी जाते देखना और वहां जाकर अपने से बड़े बच्चों की क्लास लेना उन्हें बड़ा सुखद लगता है।

याशा का कहना है कि उन्हें नौकरी करने से भी अधिक खुशी वहां के छात्रों को पढ़ाने में मिलती है। याशा कहते हैं कि मैं दूसरे छात्रों की मदद करना चाहता हूं और उनके ज्ञान को बढ़ाने में मदद कर सकता हूं

अमिताभ-शाहरूख संग काम कर चुकी बिहार की यह बेटी, अब हॉलीवुड में करेगी एंट्री

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दीपिका और कंगना भी है बिहार की सांची की दीवानी..

दोस्तों आज हम बात कर रहे है एक ऐसी छोटी बच्ची के बारे में जो इतनी छोटी उम्र में ही कई बड़े बड़े बॉलीवुड सितारों के साथ काम कर चुकी है । बिहार की इस चाइल्‍ड मॉडल व एक्‍ट्रेस के आदर्श भारत के प्रधनमंत्री नरेन्द्र मोदी है और वह बड़ा होकर वह पीएम मोदी की तरह ही देश की कमान संभालना चाहती है।


पिता ने  देखा था एक्टर बनने का सपना 

हम बात कर रहे हैं बिहार के नक्सल ग्रस्त रोहतास जिले के एक छोटे से गांव काशिगवा से मुंबई पहुंचे राकेश तिवारी की छह साल की बेटी सांची की। 15 साल पहले साँची के पिता ने एक्टर बनने का सपना देखा था और उसे पूरा करने की चाहत में मायानगरी मुंबई का रुख किया था। राकेश तिवारी का यह सपना उसकी बेटी ने पूरा कर दिया।

ऐसे मिला था पहला काम

राकेश ने बताया कि एक बार वे बेटी सांची को लेकर फिल्मिस्तान स्टूडियो गए थे। उसकी चंचलता और गतिविधियों को देख एक विज्ञापन प्रोड्यूसर ने उसे गोद में उठा लिया। दो महीने बाद एक शीतल पेय के विज्ञापन में उसे कम करने का मौका मिल गया । इसके बाद सांची ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

SANCHI -CHILD ACTRESS

शाहरूख के साथ की पहली विज्ञापन फिल्‍म

सांची ने अपनी पहली विज्ञापन फिल्‍म शाहरूख खान के साथ की थी। उस विज्ञापन फिल्‍म में शाहरूख के साथ एक शीतल पेय का विज्ञापन किया था । सांची अमिताभ बच्चन, ओमपुरी, फरहान अख्तर, कंगना राणावत, दीपिका पादुकोण जैसी फिल्मी हस्तियों के साथ भी काम कर चुकी है। अब उसे हॉलीवुड की एक फिल्म में ओमपुरी के साथ काम करने का मौका मिला है। रोहतास जिले के नक्सल प्रभावित काशिगवा से निकली बिहार की यह नन्ही परी मायानगरी पर अपनी अमिट छाप छोड़ रही है।

कई टीवी सीरियलों व फिल्‍मों में  कर चुकी है  काम 

बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्‍चन व किंग खान शाहरूख खान के साथ काम कर चुकी यह बच्‍ची कई टीवी सीरियलों व फिल्‍मों में भी भूमिकाएं कर चुकी है। सांची ने ‘क्राइम पेट्रोल‘, ‘सीआइडी‘, ‘सावधान इंडिया‘ जैसे सीरियलों में काम कर चुकी है । ‘शपथ‘, ‘डोली अरमानों की‘ में भी उसके अभिनय को सराहा गया है । हाॅरर सीरियल ‘आहट‘ में भी वह दिखी। सांची फरहान अख्तर के साथ फिल्म ‘वजीर‘, दीपिका पादुकोण के साथ ‘पीकू‘, कंगना राणावत के साथ ‘रज्जो‘ में भी काम कर चुकी है। फिलहाल सांची के पास कई टीवी सीरियल व फिल्‍में हैं।

 

SANCHI -CHILD ACTRESS

मुंबई में तीसरी कक्षा की छात्रा

सांची के पिता राकेश तिवारी ने बताया कि वे कभी मुंबई अभिनेता बनने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली । मुंबई में रहने के लिए उन्‍होंने टीवी सीरियलों व फिल्मों में छोटे छोटे रोल किए। घर लौटे तो शादी हो गई। सालों बाद वे पत्नी व बच्ची को लेकर फिर मुंबई पहुंचे और वहीं रह गए। सांची मुंबई के अंधेरी के समीप एक कान्वेंट स्कूल में तीसरी क्लास की छात्रा है।

बेटी पर है गर्व 

सांची की मां ने कहा कि बेटी पर नाज है। ऐसी एक बेटी पर सौ बेटों कुर्बान है। गाँव से निकल हमारी बेटी मुंबई में सफलता की झंडा गाड़ रही है। जिले के साथ-साथ बिहार का भी नाम रौशन कर रही है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।

पीएम मोदी की जबरदस्‍त फैन

सांची प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जबरदस्‍त फैन है। वह पीएम मोदी की तरह ही देश के सर्वोच्च स्थान पर पहुंचना चाहती है।

 

मछली पकड़ते-पकड़ते स्वीमिंग चैम्पियन बन गई बिहार की बेटी

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मछुआरे की बेटी – विश्व तैराकी में जीत चुकी है  गोल्ड मेडल

 
किसी ने सच ही कहा है की मन में अगर लग्न और तीव्र इच्छा शक्ति हो तो रस्ते की कोई भी रुकावट आपको मंजिल तक पहुचने से नहीं रोक सकती है । यूं तो उसके ढेर सारे उदाहरण हैं, परंतु, आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी बिहार की बेटी के बारे में जिसका जन्म  गरीब-नि:सहाय परिवार में हुआ लेकिन अपनी मेहनत के बल पर वो आज  कई लड़कियों की  लिए रोल मॉडल बन गई है। यह नाम है बेगुसराय जिला से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित सरौंजा निवासी फदौर सहनी की पुत्री बेबी कुमारी का।

मछली पकड़ते-पकड़ते तैराकी की तमाम बारीकियां जानी 

गांव के पोखर से तैराकी कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली बेबी कुमारी वीरपुर प्रखंड के सरौंजा निवासी एक छोटे से मछुआरे फौदार सहनी के पांच संतानों में दूसरी संतान  है। बचपन में पिता के साथ गांव के छोटे से तालाब में मछली पकड़ते-पकड़ते वह तैरने की तमाम बारीकियों को जानी। गांव के प्राइमेरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर एसबीएसएस कॉलेज से स्नातक कर रही है।

 दर्जनों गोल्ड मेडल किया है अपने नाम 

गांव से निकल छोटी-छोटी प्रतियोगिताओं में भाग लेती हुई बेबी नेशनल और इंटरनेशनल स्तर तक की प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का जौहर बिखेर चुकी है। दर्जनों गोल्ड मेडल के साथ ही करीब ढाई दर्जन सिल्वर और कांस्य पदक प्राप्त किया।

  वल्र्ड तैराकी प्रतियोगिता 2016 में जीता गोल्ड मेडल

इसमें अब तक की इसकी सबसे बड़ी उपलब्धि गोवा में आयोजित वल्र्ड तैराकी प्रतियोगिता 2016 में गोल्ड मेडल जीतना है। इस स्वीमिंग प्रतियोगिता में बेबी ने इंग्लैंड, श्रीलंका, नेपाल सहित अन्य देशों के प्रतिभागियों को पछाड़ते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाने में सफल हुई थीं। बेबी को इसी उपलब्धि के इनाम के रूप में सीआरपीएफ में नौकरी मिली है। फिलहाल वह पंजाब में ट्रेनिंग ले रही है।

 पढ़ने मे भी बचपन से है  मेधावी 

बेबी के एक भाई और एक अन्य बहन भी तैराकी मे अपना नाम कमा चुके हैं. बेबी न सिर्फ तैराकी में बल्कि पढ़ने मे भी बचपन से ही मेधावी रही है. बेबी की शिक्षक अपनी शिष्या की इस कामयाबी पर फूले नही समां रही हैं. शिक्षिका का भी मानना है की अगर इसके प्रतिभा को निखारने के लिए सरकार आगे आए तो नजारा कुछ और हो सकता है.

प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के हाथों भी मिल चूका है सम्मान 

बेबी कुमारी को यूं तो सैकड़ों सम्मान मिले हैं। परंतु, बेबी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम नीतीश कुमार से मिले सम्मान की चर्चा हर जगह करना नहीं भूलती। बेबी बताती हैं कि वह 2007 से लेकर 2014 तक बिहार चैंपियन रही हैं। अपनी इस कामयाबी के लिए गुजरात के तात्कालिक मुख्यमंत्री और वर्तमान में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही नहीं बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं।

ओलंपिक में हिस्सा लेने की है ख्वाहिश

सीमित संसाधनो के बाबजूद बिहार और देश का नाम रौशन करनेवाली बेबी 2018 मे आयोजित होने वाली ओलंपिक मे हिस्सा लेकर देश का नाम रौशन करना चाहती है। दूरभाष पर बेबी ने बताया कि फिलहाल वे पूरा फोकस ट्रेनिंग पर दे रही है। जल्द ही उसकी ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी।
ट्रेनिंग के साथ ही वह मौका मिलते ही किसी स्वीमिंग पुल में जाकर प्रैक्टिस करती है। बेबी कहती है कि वह भारत की तरफ से ओलंपिक में भाग लेना चाहती है। बताते चलें कि 2018 में होने वाले ओलंपिक में स्वीमिंग प्रतिभागी के तौर पर बेबी सबसे मजबूत दावेदार हैं।
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‘बंधन तोड़’ ऐप के जरिए बिहार में बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा रोकने की मुहिम शुरू

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सिर्फ कानून बनाने से बाल विवाह और दहेज प्रथा पर रोक संभव नहीं

भारत में दहेज एक पुरानी प्रथा है । मनुस्मृति मे ऐसा उल्लेख आता है कि माता-कन्या के विवाह के समय दाय भाग के रूप में धन-सम्पत्ति, गउवें आदि कन्या को देकर वर को समर्पित करे ।यह भाग कितना होना चाहिए, इस बारे में मनु ने उल्लेख नहीं किया । समय बीतता चला गया स्वेच्छा से कन्या को दिया जाने वाला धन धीरे-धीरे वरपक्ष का अधिकार बनने लगा और वरपक्ष के लोग तो वर्तमान समय में इसे अपना जन्मसिद्ध अधिकार ही मान बैठे हैं ।
 

बाल विवाह और दहेज प्रथा सिर्फ देश की प्रमुख समस्या तो है ही साथ ही महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा है। सरकार और लोगो के संयुक्त प्रयास से ही इसे खत्म किया जा सकता है।राज्यसरकार 2 अक्टूबर से बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रही है।बिहार में बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए एक अनोखी पहल के तहत ऐप लॉन्च किया गया है।

इस एप्प से   दहेज प्रथा के प्रति  लोगों को किया जायेगा जागरूक

संयुक्त राष्ट्र पॉप्युलेशन फंडद्वारा समर्थित इस ऐप को 270 सिविल सोसाइटी ऑर्गनाइजेशन ने मिलकर तैयार किया है। जेंडर अलायंस बिहार पहल के तहत लॉन्च किए गए इस ऐप का नाम ‘बंधन तोड़’ है। संयुक्त राष्ट्र संघ की इकाई यूएनएफपीए के थिंक टैंक जेंडर अलायंस द्वारा जारी किए गए इस मोबाइल एप बंधन तोड़ का लोकार्पण रविवार को उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने किया। इस एप को गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल किया जा सकता है। इस एप से बाल विवाह दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करने और कानूनी जानकारी देने के साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। इस एप से बिजली बिल जमा करने पर छूट भी मिलेगी।

24 घंटे मदद कराई जाएगी  उपलब्ध

इस समारोह में बंधन तोड़ मोबाइल ऐप, कॉफी टेबल बुक और बंधन तोड़ थीम सांग को भी लॉन्च किया गया। इस मौके पर सुशील मोदी ने कहा कि माता-पिता को भी समझना होगा कि जब लड़की आर्थिक रूप से सशक्त होगी, तो दहेज नहीं देना पड़ेगा। लड़के भी ऐलान करें कि वे दहेज नहीं लेंगे। बिहार में पंचायत चुनावों में महिलाओं को आरक्षण देने भर से बेहद तेजी से महिलाओं का सशक्तीकरण हुआ। जब मां शिक्षित होगी, तो उसके बच्चे भी शिक्षित होंगे। इस ऐप के जरिए बाल विवाह और दहेज प्रथा जैसी समस्याओं के बारे में जागरूकता तो फैलेगी ही साथ में पीड़ित लड़कियों और महिलाओं को 24 घंटे मदद भी उपलब्ध कराई जाएगी।

दहेज प्रथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी साल मई में बाल विवाह के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर चर्चा करते हुए कहा था कि गांधी जयंती से बाल विवाह और दहेज प्रथा के विरुद्ध सशक्त अभियान चलाया जाएगा। उसी के तहत ये कोशिश की जा रही है। सीएम ने कहा था कि हर गांव में 12वीं स्तर का स्कूल खोला जाएगा। जिससे धीरे-धीरे प्रजनन दर भी कम की जा सकेगी। बंधन तोड़ कैंपेन की लॉन्चिंग के वक्त यूनिसेफ के बिहार प्रमुख असदुर रहमान ने कहा कि बाल विवाह और दहेज प्रथा महिला सशक्तीकरण की दिशा में बड़ी बाधा है। सरकार और सिविल सोसाइटी के संयुक्त प्रयास से इसे खत्म किया जा सकता है।

एप्प की मदद से लड़कियों को किया जायेगा शिक्षित 

बंधन तोड़ मोबाइल ऐप से बाल विवाह और दहेज प्रथा को रोकने के साथ लड़कियों को शिक्षित भी किया जाएगा। इसके तहत लोगों को आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर बाल विवाह और दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूक किया जाएगा। समारोह में बाल विवाह से इनकार कर शिक्षा हासिल कर रही कई बच्चियों को सम्मानित भी किया गया। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से इंस्टॉल किया जा सकता है। इसके बाल विवाह दहेज प्रथा के प्रति लोगों को जागरूक करने और कानूनी जानकारी देने के साथ विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी जाएगी। इस एप से बिजली बिल जमा करने पर छूट भी मिलेगी।

इस एप्लीकेशन की खास बाते

  • अगर कहीं बाल विवाह हो रहा है तो इसे रोकने और लड़की तक तुरंत मदद पहुंचाने के लिए इस एप में एसओएस बटन होगा।
  • अगर किसी नाबालिग लड़की की शादी हो रही है, तो वह इसके जरिए मदद मांग सकती है। उसके मदद मांगते ही इसकी जानकारी जेंडर अलाएंस मुख्यालय, विभिन्न सिविल सोसाइटी, एनजीओ आदि के पास पहुंच जाएगी।
  • बाल विवाह का एक बड़ा कारण पढ़ाई का बीच में छूट जाना होता है। ऐसे में इस एप पर चर्चित शिक्षकों के 7वीं से 12वीं कक्षा के वीडियो लेक्चर हिंदी में मौजूद रहेंगे।
  •  इसकी मदद से शहरी इलाके के आम छात्र भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ले सकते हैं।
  •  यह लेक्चर बिहार बोर्ड के सिलेबस के मुताबिक होंगे। इसे गांव की जागरूक महिलाओंके साथ भी जोड़ा जाएगा। महिलाओं के समूह के जरिए इसका सही इस्तेमाल हो सकता है।
  • इस ऐप की एक खास बात और यह है कि इसे इंस्टॉल करने पर यूजर को सौ रुपए का डिजिटल अमाउंट भी उसके मोबीक्यूक वॉलेट में मिलेगा।
  • इसके अलावा यदि कोई इसके दूसरे को इंस्टॉल करने के लिए रेफर करेगा तो इनस्टॉल होने के बाद उसे 50 रुपए और मिलेंगे।
  •  इसमें सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी भी मुहैया कराई जाएगी।साथ ही साथ दहेज प्रथा और बाल विवाह से संबंधित कानूनी जानकारी भी दी जाएगी।
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विमान से दुनिया का अकेले चक्कर लगाने वाली अफगान की पहली महिला पायलट की प्रेरणादायक कहानी

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मेरे जैसा कोई भी बन सकता है – Shaesta Waiz

दोस्तों आज हम बात कर रहे है एक ऐसी महिला के बारे में जिसका जन्म काबुल के शरणार्थी कैंप में हुआ । जंग के कारण उनके परिवार को भागकर अमेरिका जाना पड़ा । थोड़ी बड़ी हुई, तो पढ़ाई छोड़ने का दबाव बना । लेकिन उसने हार नहीं मानी। परिवार के विरोध के बावजूद अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं । 29 साल की उम्र में अकेले दुनिया का चक्कर लगाने के सफर पर निकली ।

सन 1987 में अफगानिस्तान में सोवियत सेना और मुजाहिदीन के बिच भयंकर लड़ाई चल रही थी | बहुत सारे अफगानी नागरिक देश छोड़कर जा रहे थे | हजारो लोग शरणार्थी कैंपों में नारकीय जिंदगी गुजारने के लिए विवश थे । उसी कैंप में शाइस्ता (shaista) का जन्म हुआ । इन कैंपों में भोजन, पानी और दवाई की बभी सही से व्यवस्था नहीं थी ।कब किस पल किसकी मौत आ जाएगी कोई नहीं जनता था । इसलिए शाइस्ता के परिवार को देश छोड़ना पड़ा ।

अफगानिस्तान छोड़कर आना पड़ा अमेरिका

शाइस्ता की माँ अपनी छह बेटियों को लेकर अमेरिका चली आईं। उनक परिवार बड़ा था पर आमदनी नहीं थी । शाइस्ता कैलिफोर्निया के रिचमंड इलाके के पास ही के एक स्कूल में पढ़ने लगीं। स्कूल में पढाई की व्यवस्था सही नहीं थी । अधिकांश गरीब परिवार के बच्चे ही पढने आते थे । स्कूल में बहुत कम किताबे थीं, जिन्हें बच्चे आपस में बांटकर पढ़ते थे।

बंद हुयी धमाकों और फायरिंग की आवाजें

शाइस्ता खुश थी क्युकी वो जानती थी मेरे पापा की इतनी कमाई नहीं थी कि वह हमें अच्छे स्कूल में पढ़ा पाते । परिवार भी खुश था क्युकी कैलिफोर्निया में अफगानिस्तान की तरह बम धमाकों और फायरिंग की आवाजें नहीं सुनाई देती थीं ।धीरे धीरे जिंदगी पटरी पर लौटने लगी।

परिवार की पिछड़ी सोच बनी रास्ते की रुकावट

अमेरिका में रहने के बाद भी बेटियों को लेकर परिवार की सोच पिछड़ी रही। बेटियों के बड़े होते ही परिवार के लोगो को उसकी शादी की चिंता सताने लगती । लेकिन शाइस्ता बड़े होकर कुछ बनना चाहती थीं । पर उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्युकी उनके घर का माहौल अमेरिकी समाज की तरह खुला नहीं था बल्कि अभी भी कट्टर अफगान परंपरा से जुड़ा हुआ था । शाइस्ता को अमेरिकी लड़कियों की तरह हर तरह की आजादी नहीं थी बल्कि हमेशा याद दिलाया जाता था कि लडकियों को अपने दायरे में रहना चाहिए ।

हार नहीं मानी

इंटर की परीक्षा पास करने के बाद शाइस्ता को पढ़ाई छोड़ने को बोला गया , पर शाइस्ता ने हार नहीं मानी और जिद करके यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया । वह परिवार की पहली बेटी हैं जिन्होंने स्नातक की डिग्री हासिल की है ।

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता कहती हैं- हमारे यहाँ रिवाज था कि लड़कियां हाईस्कूल पास करने के बाद शादी करें और बच्चे पैदा करें। मगर मैं तो आसमान में उड़ना चाहती थी, इसलिए पायलट बनने का फैसला किया।

परिवारवालों ने किया पायलट बनने का विरोध

जब दादी ने यह खबर सुना कि पोती पायलट बनेगी, तो उनकी चिंता बढ़ गई। उन्होंने पूछा, हवाई जहाज चलाने वाली लड़की से कौन शादी करेगा? चाचा भी इस फैसले के खिलाफ थे । उनका मानना था कि पायलट जैसे काम महिलाओं के लिए नहीं हैं।मगर शाइस्ता ने किसी की नहीं सुनी।

अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं

28 साल की उम्र में वह अमेरिका में अफगान मूल की पहली सिविलियन पायलट बनीं। पहली बार वह जब हवाई जहाज की कॉकपिट में पहुंचीं, तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि उनका सपना सच हो गया है। उनका बचपन से ही आसमान में उड़ने का सपना था लेकिन जिस तरह उनके परिवार के आर्थिक हालत थे उन्होंने कभी नहीं सोचा था की उनका यह सपना किसी दिन्सच हो जायेगा । शाइस्ता बताती हैं, की हम लोकल बस या ट्रेन में सफर करते थे। हवाई जहाज में सफर करना हमारे लिए बहुत बड़ी बात थी।

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

शाइस्ता वैज-Shaesta Waiz

मै अक्सर ये सोचती हु की एक शरणार्थी होने के बावजूद मुझे अपना सपना पूरा करने मौका मिला, तो दुनिया की बाकी बेटियों को यह अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए?

लडकियों को आगे बढ़ने के लिए शुरू किया अभियान

बेटियों को पढ़ने और आगे बढ़ने की प्रेरणा देने के लिए उन्होंने एक वैश्विक अभियान शुरू किया। 29 साल की शाइस्ता वाइज विमान से अकेले दुनिया का चक्कर लगाने के सफर पर निकली । अभियान के तहत उन्होंने 18 देशों का हवाई दौरा किया। इस अफगानी युवती ने अपने सफर की शुरुआत अमेरिका के फ्लोरिडा में डेटोना बीच से की थी । इस 90 दिन की यात्रा में उन्होंने 25,800 किलोमीटर का सफर तय किया।

बच्चो को पढने के लिए किया प्रेरित

इस दौरान वह 33 जगहों पर रुकीं और वहां के बच्चों से मुलाकात कर उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।उन्होंने बच्चों में साइंस, गणित तकनीक जैसे विषयों में रुचि जगाने की कोशिश की और समझाया कि ये विषय कठिन नहीं, बल्कि मजेदार हैं। शाइस्ता बताती हैं, मैं स्पेन, मिस्र, भारत, सिंगापुर और ऑस्टेलिया के बच्चों से मिली। हर बच्चे में प्रतिभा है। बस उन्हें सही रास्ता दिखाने की जरूरत है। इस यात्र के दौरान वह अफगानिस्तान भी गईं और अपने रिश्तेदारों से मिलीं। वह एक भावुक लम्हा था। रिश्तेदार अपनी बेटियों को लेकर उनसे मिलने आए।

काबुल में लड़कियों के लिए खोलेंगी कॉलेज

शाइस्ता ने तय किया कि वह काबुल में एक कॉलेज खोलेंगी, जहां लड़कियों को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि उन्हें अपना मनचाहा करियर चुनने में कोई दिक्कत न हो । शाइस्ता कहती हैं, अफगान बच्चियो की आंखों में भी मेरी तरह बहुत सारे सपने है । कुछ कर गुजरने का हौसला है । मेरा ख्वाब तो पूरा हो गया, अब मैं उनके लिए कुछ करना चाहती हूं।

कोई भी मेरे जैसा बन सकता है

अपने गैर लाभकारी संगठन ड्रीम्स सोर की वेबसाइट पर वे लिखती हैं, जब भी मैं किसी विमान का दरवाजा खोलती हूं, तो खुद से पूछती हूं-मेरी पृष्ठभूमि वाली कोई लड़की इतनी खुशकिस्मत कैसे हो सकती है? लेकिन, सच्चाई यह है कि कोई भी मेरे जैसा बन सकता है।

BEST HINDI QUOTES ( PAGE-4)

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BEST HINDI QUOTES (PAGE -4)

अनमोल वचन – अनमोल विचार

“Many people fail because they conclude that fundamentals simply do not apply in their case.” – M. L. Cichon

“बहुत से लोग असफल इसलिये होते हैं क्योंकि वे यह निष्कर्ष निकाल लेते हैं कि आधारभूत नियम उनके मामले में लागू नहीं होते।” – एम. एल. चिचॉन

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“It is not enough to know about virtue, then, but we must endeavour to possess it, and to use it, or to take any other steps that may make us good.” – Aristotle

“नैतिकता के बारे में जानना ही पर्याप्त नहीं होता, इसे ग्रहण करना, अपनाना तथा स्वयं को अच्छा बनाने के लिये अन्य कोई भी कदम उठाना भी आवश्यक है। ” – अरस्तु

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“Those who make peaceful revolution impossible will make violent revolution inevitable.” – John F Kennedy

“जो शांतिपूर्ण क्रांति को असंभव कर देते हैं वे हिंसक क्रांति को अपरिहार्य बना रहे होते हैं। ” – जॉन एफ़ कैनेडी

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“Jumping to conclusions seldom leads to a happy landings.” – S Siporin

“सीधे ही किसी निष्कर्ष पर कूद पड़ना कभी कभार ही ख़ुशहाल पड़ाव पर पहुँचाता है।” – एस िसपॉरिन

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“That carpenter is not the best who makes more chips than all the rest.” – A Gutterman

“वो बढ़ई अच्छा नहीं है जो बाकी सभी से ज्यादा छीलन निकाले।” – ए गटरमैन

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A failure is a man who has blundered, but is not able to cash in on the experience.” – E Hubbard

“असफ़ल व्यक्ति वह है जिसने भूलें की लेकिन इनके अनुभव से लाभ नहीं उठाया। ” – ई हब्बार्ड

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“Lots of folks confuse bad management with destiny.” – E. Hubbard

“कई लोग कुव्यवस्था को प्रारब्ध मानने का भ्रम पाल लेते हैं। ” – ई हब्बार्ड

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“The genius of a good leader is to leave behind him a situation which common sense, without the grace of genius, can deal with successfully.” – W Lippmann

“एक अच्छे मार्गदर्शक की निपुणता इसमें है कि वह अपने पीछे ऐसी स्थिति छोड़ कर जाए कि किसी निपुण की कृपा के बिना भी व्यावहारिक बुद्धि से उसे सफ़लता के साथ संभाला जा सके। ” – डब्ल्यू लिप्पमैन

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“We aim above the mark to hit the mark.” – Ralph Waldo Emerson

“हम लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लक्ष्य से ऊपर निशाना लगाते हैं।” – राल्फ वाल्डो इमर्सन

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“The entrepreneur is essentially a visualizer and an actualizer. He can visualize something, and when he visualizes it he sees exactly how to make it happen.” – Robert L. Schwartz

“उद्यमी अनिवार्य रूप से कल्पनाशील और कार्यान्वित करने वाला होता है। वह कुछ कल्पना कर सकता है, तो जब वह कल्पना करता है तो यह भी साफ देख पाता है कि उसका कार्यान्वयन कैसे हो सकता है। ” – रॉबर्ट एल श्वार्ज़

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“Not everything that can be counted counts, and not everything that counts can be counted.” – Albert Einstein

“जो गिना जा सकता है आवश्यक नहीं कि उसकी गिनती हो, और आवश्यक नहीं कि जिसकी गिनती हो उसे गिना जा सकता हो। ” – अल्बर्ट आइन्सटीन

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“Great thoughts speak only to the thoughtful mind, but great actions speak to all mankind.” – Theodore Roosevelt

“महान विचार केवल विचारशील व्यक्ति की समझ में आते हैं, लेकिन महान कर्म समस्त मानवता को समझ आते हैं। ” – थियोडोर रूज़वेल्ट

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“Hold fast to dreams, for if dreams die, life is a broken winged bird that cannot fly.” – Langston Hughes

“अपने सपनों को थामे रहिए, क्योंकि सपने अगर मर जाएंगे तो जीवन एक पंखहीन पंछी की तरह हो जाएगा जो उड़ नहीं सकता। ” – लैंग्स्टन ह्यूग्ज़

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“I know the price of success: dedication, hard work, and an unremitting devotion to the things you want to see happen. ” – Frank Lloyd Wright

“मैं सफलता की कीमत जानता हूं: समर्पण, कड़ी मेहनत, और जो आप होते देखना चाहते है उनमें अनवरत श्रद्धा।” – फ्रैंक लॉयड राइट

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“No matter how good you get you can always get better and that’s the exciting part.” – Tiger Woods

“आप चाहे कितना भी अच्छा क्यों न कर लें, आप हमेशा और बेहतर कर सकते हैं और यही तो रोमांच की बात है। ” – टाइगर वुड्स

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“The world is a book, and those who do not travel read only one page. ” – St. Augustine

“दुनिया एक पुस्तक है, और जो कोई यात्रा नहीं करते वे सिर्फ एक ही पृष्ठ पढ़ते हैं।” – संत ऑगस्टीन

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“In a gentle way, you can shake the world.” – Mahatma Gandhi

“आप नम्र तरीके से दुनिया को हिला सकते हैं।” – महात्मा गांधी

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“Guidelines for bureaucrats: When in charge, ponder; when in trouble, delegate; when in doubt, mumble.” – J. Boren

“दफ़्तरशाहों के लिये मार्गदर्शन – प्रभारी हों तो मनन करें, संकट में हों तो अपने कर्तव्य दूसरों को सौंपें और संशय में हों तो बुदबुदाएं।” – जे. बॉरेन

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“The person who uses a lot of big words is not trying to inform you; he is trying to impress you.” – O. Miller

“कई क्लिष्ट शब्दों को काम में लेना वाला व्यक्ति आपको जानकारी देने का नहीं बल्कि प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है ।” – ओ. मिलर

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“There is great ability in knowing how to conceal ability.” – François de La Rochefoucauld

“योग्यता को छुपाने की कला जानना ही सबसे बड़ी योग्यता है।” – फ्रेंकोइस डे ला रोशेफोकोल्ड

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“Take care of the means and the end will take care of itself.” – Mahatma Gandhi

“साधनों पर ध्यान दें और साध्य स्वयं अपना ध्यान रख लेंगे।” – महात्मा गाँधी

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“Better a little with contentment than a lot with contention.” – Benjamin Franklin

“विवादों से घिरे बहुत कुछ की तुलना में संतोषयुक्त बहुत कम अच्छा है।” – बेंजामिन फ्रैंकलिन

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“Do not take life too seriously; you will never get out of it alive.” – E. Hubbard

“जीवन को बहुत गंभीरता से न लें, आप इसमें से कभी जीवित नहीं निकल सकेंगे।” – ई. हब्बार्ड

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By working faithfully eight hours a day, you may eventually get to be a boss and work twelve hours a day.” – R. Frost

“प्रतिदिन आठ घंटे निष्ठापूर्वक काम करने के फलस्वरूप आपको संभवतः प्रबंधकर्ता बन कर प्रतिदिन बारह घंटे काम करने का अवसर मिल सकता है।” – आर. फ्रॉस्ट

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“There’s more credit and satisfaction in being a first-rate driver than a tenth rate executive.” – B. C. Forbes

“एक निकम्मे प्रबंधाधिकारी के बजाय एक उत्कृष्ट ड्राइवर बनने में अधिक प्रतिष्ठा और संतुष्टि है।” – बी. सी. फ़ोर्ब्स

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“Greed enables a person to buy things money can buy while losing the things money cannot buy.” – Laurence J. Peter

“लालच व्यक्ति को वे वस्तुएं खरीदने की क्षमता देता है जो पैसे से खरीदी जा सकती हैं लेकिन साथ ही वे वस्तुएं छीन लेता है जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकतीं।” – लॉरेंस जे. पीटर

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“There are two things to aim at in life: first, to get what you want; and, after that, to enjoy it. Only the wisest of mankind achieve the second.” – L. Smith

“जीवन के दो लक्ष्य हैं, पहला, जो आप चाहते हैं वह आप प्राप्त करें और दूसरा जो पाएं उसका आप आनंद उठा सकें। मानवजाति के केवल चतुरतम व्यक्ति ही दूसरा लक्ष्य प्राप्त कर पाते हैं।” – एल. स्मिथ

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“Real joy comes not from ease or riches or from the praise of men, but from doing something worthwhile.” – W. Grenfell

“वास्तविक प्रसन्नता साधन सुगमता, संपन्नता या यशगान करने या सुनने से नहीं बल्कि कुछ उपयोगी कार्य करने से मिलती है।” – डब्ल्यू. ग्रैनफ़ैल

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“There is something that is much more scarce, something more far, something rarer than ability. It is the ability to recognize ability.” – E. Hubbard

“प्रतिभा से भी अति अल्प, अति दूर और दुर्लभ एक चीज़ होती है और वह है प्रतिभा को पहचानने की योग्यता। ” – ई. हब्बार्ड

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“Remember, no one can make you feel inferior without your consent.” – Eleanor Roosevelt

“याद रखें कि अपकी सहमति के बिना कोई आपको तुच्छ समझने की प्रतीति नहीं करा सकता है। ” – एलेनॉर रूज़वेल्ट

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“He who trims himself to suit everybody will soon whittle himself away.” – R. Hull

“जो व्यक्ति सबकी आकांक्षाओं के अनुरूप ढलता जाता है वह स्वयं जल्दी ही कट कट कर समाप्त हो जाता है। ” – आर. हल

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“The greatest mistake a man can make is to sacrifice health for any other advantage. ” – A. Schopenhauer

“सबसे बड़ी भूल, जो कोई मनुष्य कर सकता है, वह है, किसी भी प्रकार के फ़ायदे या हित साधन के लिये स्वास्थ्य का बलिदान करना। ” – ए. शोपनहॉवर

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“Every man has in himself a continent of undiscovered character. Happy he who acts as the Columbus to his own soul.” – J Stephen

“हर व्यक्ति अपने में एक अज्ञात प्रकृति का पूरा महाद्वीप लिये बैठा है। प्रसन्न वह रहता है जो इसमें से अपनी आत्मा को ढूँढने के लिये कोलंबस का रूप धरता है।” – जे स्टिफ़न

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“The greatest way to live with honour in this world is to be what we pretend to be. ” – Socrates

“इस दुनिया में सम्मान के साथ जीने के लिए सबसे बड़ा तरीका है कि हम वे बनें जो हम होने का दिखावा करते हैं। ” – सुकरात

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“Do not let the behavior of others destroy your inner peace.” – Dalai Lama

“दूसरों के व्यवहार को आप अपने मन की शांति को नष्ट न करने दें। ” – दलाई लामा

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“Have the courage to follow your heart and intuition because they somehow already know what you truly want to become. ” – Steve Jobs

“अपने मन और अंतर्दृष्टि का अनुसरण करने का साहस करें क्योंकि उन्हें किसी तरह से पहले से पता है कि आप सच में क्या बनना चाहते हैं। ” – स्टीव जॉब्स

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“To hell with circumstances; I create opportunities.” – Bruce Lee

“मैं परिस्थतियों की परवाह नहीं करता; मैं अवसरों को पैदा कर देता हूँ।” – ब्रूस ली

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“The person who won’t read is no better than the person who can’t read.” – Mark Twain

“जो व्यक्ति पढ़ता नहीं, वह उस व्यक्ति से बेहतर नहीं जो पढ़ ही नहीं सकता।” – मार्क ट्वेन

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“It’s better to die on your feet than to live on your knees.” – Emiliano Zapata

“अपने पैरों पर खड़े रहते मरना घुटने टेक कर जीने से बेहतर है।” – एमिलियानो ज़पाटा

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“It is not because things are difficult that we do not dare; it is because we do not dare that they are difficult.” – Seneca

“हम हौंसला नहीं करते इसलिए नहीं कि कुछ करना दुष्कर है; कुछ करना दुष्कर इसलिए होता है कि हम हौंसला नहीं करते।” – सेनेका

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“A reader lives a thousand lives before he dies. The man who never reads lives only one.” – George Martin

“पुस्तकें पढ़ने वाला मरने से पहले हजार जीवन जी लेता है। जो पढ़ता नहीं, वह सिर्फ एक बार जीता है। ” – जॉर्ज मार्टिन

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“Would you like you, if you met you?” – Anonymous

“यदि आप अपने आप से मिलें, तो क्या आप अपने को पसंद करेंगे?” – अज्ञात

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“Truth, like gold, is to be obtained not by its growth, but by washing away from it all that is not gold.” – Leo Tolstoy, novelist and philosopher (1828-1910)

“सत्य, जैसे स्वर्ण, की प्राप्ति उसकी वृद्धि से नहीं होती, बल्कि वह सब धो देने से होती है जो स्वर्ण नहीं है। ” – लियो टॉल्स्टॉय, उपन्यासकार और दार्शनिक (1828-1910)

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“If ambition doesn’t hurt you, you haven’t got it.” – K. Norris

“यदि महत्वाकांक्षा से आपको ठेस नहीं लगती है तो आप महत्वाकांक्षी हैं ही नहीं।” – के. नोरिस

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“You are not in charge of the universe, you are in charge of yourself.” – A. Bennett

“सारे विश्व का भार आप पर नहीं है, आप केवल अपने प्रभारी हैं।” – ए. बैनेट

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“the true test of civilization is not the census, nor the size of cities, nor the crops, but the kind of man the country turns out.” – ralph waldo emerson

“किसी सभ्यता की सही कसौटी जनगणना या शहरों का फैलाव या फ़सलें नहीं हैं बल्कि यह है कि वहाँ लोग किस तरह के हैं” – राल्फ वाल्डो एमरसन

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“an expert is one who knows more and more about less and less.” – n. Butler

“कम से कम के बारे में अधिक से अधिक जानने वाले को विशेषज्ञ कहते हैं।” – एन बटलर

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“Ambition is a lust that’s never quenched, Grows more inflated, and madder by enjoyment.” – T Otway

“महत्वाकांक्षा कभी न शांत होने वाली वाली लालसा है, यदि आप इसका आनंद लें तो यह और बढ़ती है व पगलाती है।” – टी. ओटवे

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“The real purpose of books is to trap the mind into doing its own thinking.” – C. Morley

“पुस्तकों का वास्तविक उद्देश्य दिमाग को स्वयं का चिंतन करने के लिये बाध्य करना है।” – सी. मोर्ले

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“I am thankful for all of those who said no to me, its because of them, I am doing it myself.” – Albert Einstein

“मैं उन सबका आभारी हूँ जिन्होंने मुझे “ना” कहा, क्योंकि उन्हीं के कारण मैं स्वयं यह कर रहा हूँ।” – एलवर्ट आइंस्टीन

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“Live as if you were to die tomorrow. Learn as if you were to live forever.” – Mahatma Gandhi

“ऐसे जीएं मानो आप कल तक ही जीवित रहने वाले हैं। सीखें ऐसे मानो आप हमेशा के लिये जीवित रहने वाले हैं।” – महात्मा गांधी

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“Do not begin today with broken pieces of yesterday.” – Anonymous

“आज की शुरुआत कल के टूटे टुकड़ों से न करें।” – अज्ञात

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Are you in earnest? If yes, then seize this very minute. What you can do, or dream you can, begin it.” – E H Chapin

“क्या आप वाकई गंभीर हैं – यदि हाँ तो इसी क्षण को कब्ज़े में करें। आप जो कर सकते हैं या करने का सपना देखते हैं, प्रारंभ करें।” – ई एच चैपिन

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“Vigilance in watching opportunity; tact and daring in seizing upon opportunity; force and persistence in crowding opportunity to its utmost of possible achievement – these are the martial virtues which must command success.” – Austin Phelps

“मौके का सतर्कता से ध्यान रखना; मौके को हिम्मत और तरक़ीब से कब्ज़े में लेना और हाथ आए मौके से पूरे ज़ोर व धुन के साथ अधिकतम उपलब्धि हासिल करना – ये ही सफ़लता प्राप्त करने के सामरिक गुण हैं।” – ऑस्टिन फ़ेल्प्स

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“The fragrance of flowers spreads only in the direction of the wind. But the goodness of a person spreads in all directions.” – Chanakya

“फूलों की सुगंध केवल हवा के प्रवाह की दिशा में फैलती है लेकिन किसी व्यक्ति की अच्छाइयाँ सभी दिशाओं में फैलती हैं।” – चाणक्य

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“Do not be too timid and squeamish about your actions. All life is an experience.” – Ralph Waldo Emerson

“अपने कर्मों के प्रति बहुत ज्यादा संकोची और हिचकिचाहटपूर्ण मत बनिए। पूरा जीवन एक अनुभव है।” – राल्फ वाल्डो एमरसन

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“Experience tells you what to do; confidence allows you to do it.” – Stan Smith

“अनुभव आपको बताता है कि क्या करना है; आत्मविश्वास आपको इसे करने की क्षमता प्रदान करता है।” – स्टॅन स्मिथ

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“Keep away from people who try to belittle your ambitions. Small people always do that, but the really great make you feel that you, too, can become great.” – Mark Twain

“उन लोगों से दूर रहें जो आप आपकी महत्वकांक्षाओं को तुच्छ बनाने का प्रयास करते हैं. छोटे लोग हमेशा ऐसा करते हैं, लेकिन महान लोग आपको इस बात की अनुभूति करवाते हैं कि आप भी वास्तव में महान बन सकते हैं.” – मार्क ट्वेन

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“Life’s challenges are not supposed to paralyze you; they’re supposed to help you discover who you are.” – Bernice Johnson Reagon

“जीवन की चुनौतियों का अर्थ आपकी विकलांगता नहीं है; उनका उद्देश्य आपको इस बात की खोज में सहायता करना है कि आप कौन हैं।” – बर्नेस जानसन रीगन

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1965 की जंग के हीरो मार्शल अर्जन सिंह का निधन

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air force marshal arjan singh

 एक घंटे में पाक पर किया था हमला 

अर्जन सिंह को जब वायु सेना प्रमुख बनाया गया था तो उनकी उम्र उस वक्त महज 44 साल थी और आजादी के बाद पहली बार लड़ाई में उतरी भारतीय वायुसेना की कमान उनके ही हाथ में थी. 1965 में पहली बार जब एयरफोर्स ने जंग हिस्सा लिया तो अर्जन सिंह ही उसके चीफ थे। जंग शुरू होने पर डिफेंस मिनिस्टर यशवंत राव छवन ने सिंह को ऑफिस में बुलाया। उनसे पूछा गया कि एयरफोर्स कितनी देर में आर्मी की मदद के लिए पहुंच सकती है। सिंह ने जवाब दिया… एक घंटे में। एयरफोर्स ने एक घंटे के भीतर ही पाकिस्तानी फौजों पर हमला बोल दिया।

एयरफोर्स के मार्शल अर्जन सिंह (98) का शनिवार को निधन हो गया। वे आर्मी हॉस्पिटल में भर्ती थे। और डिफेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण अर्जन सिंह को देखने हॉस्पिटल पहुंचे थे।पीएम नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर उनके निधन पर शोक जताया.

जानिए कौन थे इकलौते एयर मार्शल अर्जन सिंह…

अविभाजित भारत मेें जन्मे

अर्जन सिंह का जन्म 15 अप्रैल 1919 को अविभाजित भारत के लायलपुर में हुआ था। ये जगह अब पाकिस्तान के फैसलाबाद में है। 1938 को 19 साल की उम्र में RAF क्रेनवेल में उनका सेलेक्शन एम्पायर पायलट ट्रेनिंग के लिए हुआ। उनकी पहली पोस्टिंग नॉर्थ वेस्टर्न फ्रंटियर प्रॉविंस में वेस्टलैंड वापिटी बाइप्लेंस उड़ाने के लिए हुई। वे IAF की नंबर वन स्क्वॉड्रन के मेंबर थे। उन्हें कुछ वक्त के लिए नंबर 2 स्क्वॉर्डन में भी भेजा गया था। लेकिन, जब नंबर वन स्क्वॉड्रन को हॉकर हरिकेन प्लेन मिले तो सिंह को वापस बुला लिया गया। 1944 में उन्हें स्क्वॉड्रन लीडर बनाया गया और उन्होंने अराकान कैंपेन के दौरान जपानियों के खिलाफ टीम को लीड किया। बर्मा, इम्फाल में सक्सेसफुल कैंपेन लीड करने की वजह से 1944 में सिंह को डिस्टिंगुइश्ड फ्लाइंग क्रॉस (DFC) दिया गया।

44 साल   में बने CAS

सिंह की लीडरशिप में पहली बार एयरफोर्स ने किसी जंग में हिस्सा लिया था। जब वे CAS बने तब उनकी उम्र महज 44 साल थी। उन्होंने 1939 में IAF ज्वाइन की और 1970 में 50 साल की उम्र में रिटायरमेंट लिया। इसके बाद उन्होंने स्विटजरलैंड और वेटिकन के एम्बेस्डर के तौर पर भी अपनी सेवाएं दीं।

आजादी के दिन 100 प्लेंस का फ्लाई-पास्ट लीड किया

15 अगस्त 1947 को सिंह को एक और सम्मान दिया गया। उन्हें दिल्ली के लाल किले के ऊपर से 100 IAF एयरक्राफ्ट्स के फ्लाई-पास्ट को लीड करने का मौका दिया गया। विंग कमांडर प्रमोट होने के बाद सिंह यूके के स्टाफ कॉलेज में भी गए और आजादी के तुरंत बाद उन्हें एयर ऑफिसर कमांडिंग, अंबाला बना दिया गया। 1949 में एयर कोमोडोर प्रमोट किए जाने के बाद सिंह ने एयर ऑफिसर कमांडिंग ऑफ ऑपरेशनल कमांड का जिम्मा संभाला। इसे ही बाद में वेस्टर्न एयर कमांड कहा गया। सिंह लगातार प्रमोट होते रहे और 1962 की जंग खत्म होते होते उन्हें DCAS बनाया गया और 1963 में वे VCAS बन गए।

60 अलग-अलग तरह के एयरक्राफ्ट उड़ाए

अपने करियर के दौरान सिंह ने 60 अलग-अलग तरह के एयरक्राफ्ट्स उड़ाए। फ्लाइंग के लिए उनकी ये दीवानगी 1969 में रिटायरमेंट तक जारी रही। उन्होंने वर्ल्ड वार 2 के पहले के बाइप्लेंस से लेकर जीनट्स और वैम्पायर जैसे एयरक्राफ्ट भी उड़ाए। इसके अलावा सुपर कॉन्स्टेलेशन जैसे ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट भी उड़ाए।

जब डिफेंस मिनिस्टर ने किया था सवाल

1 अगस्त 1964 को एयर स्टाफ का चीफ बने। इस दौरान देश को जंग का सामना करना पड़ा। पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम लॉन्च किया। कश्मीर के अखनूर सेक्टर को पाकिस्तान के जवानों ने निशाना बनाया। यही वो वक्त था, जब तब के डिफेंस मििनस्टर ने सिंह से एयर सपोर्ट के लिए कहा था।

एक घंटे में पाकिस्तान पर हमला बोला

जब डिफेंस मिनिस्टर ने उनसे पूछा कि कितनी देर में एयर सपोर्ट मिल जाएगा तो सिंह ने कहा कि एक घंटे में। वाकई एक घंटे के भीतर एयरफोर्स ने पाकिस्तानी फौजों पर हमला बोल दिया। इस जंग में सिंह ने एयरफोर्स को लीड किया। अयूब खान की कश्मीर को हथियाने की कोशिश निश्चित तौर पर इंडियन आर्मी और इंडियन एयरफोर्स की बहादुरी की वजह से नाकाम हो गई।

कब बने मार्शल

– अर्जन सिंह को 2002 में एयरफोर्स का पहला और इकलौता मार्शल बनाया गया। वे एयरफोर्स के पहले फाइव स्टार रैंक ऑफिसर बने। 1965 की जंग में उनके कंट्रिब्यूशन के लिए भारत ने उन्हें इस सम्मान से नवाजा था। उन्हें 1965 में ही पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया। सिंह 1 अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक चीफ ऑफ एयर स्टाफ (CAS) रहे।

सिंह के नाम पर रखा एयर बेस का नाम

– IAF ऑफिशियल के मुताबिक 2016 में पानागढ़ बेस का नाम एयरफोर्स स्टेशन अर्जन सिंह कर दिया गया। इससे पहले एयरफोर्स ने किसी शख्स के नाम पर बेस का नाम नहीं रखा था। यहां IAF के स्पेशल ऑपरेशंस प्लेन C0130J रखे जाते हैं।

रिटायर्ड एयरफोर्स पर्सनल को दिए 2 करोड़

– सिंह ने दिल्ली के पास अपने फार्म को बेचकर 2 करोड़ रुपए ट्रस्ट को दे दिए। ये ट्रस्ट रिटायर्ड एयरफोर्स पर्सनल्स की वेलफेयर के लिए बनाया गया था।

New Delhi : Marshal of the Indian Air Force Arjan Singh paying his last respect to former President APJ Abdul Kalam at AFS Palam in New Delhi on Tuesday. PTI Photo by Kamal Singh(PTI7_28_2015_000073B)

व्हील चेयर पर आए और खड़े होकर कलाम को किया था सैल्यूट

– 27 जुलाई, 2015 को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम के निधन के बाद उनका पार्थिव शरीर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर लाया गया। तब कलाम के अंतिम दर्शन के लिए राष्ट्रपति और पीएम समेत कई नेता पहुंचे थे। लेकिन सबकी नजरें कांपते हाथों से सैल्यूट करते योद्धा अर्जन सिंह पर थीं। वे आए तो व्हीलचेयर पर थे, लेकिन कलाम को देखते ही खुद चलकर पास आए और तनकर सलामी भी दी थी।

अर्जन सिंह कभी रिटायर नहीं हुए

अर्जन सिंह सेना के 5 स्टार रैंक अफसर थे. देश में पांच स्टार वाले तीन सैन्य अधिकारी रहे थे, जिनमें से फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और फील्ड मार्शल के एम करियप्पा का नाम है, ये दोनों भी जीवित नहीं हैं. ये तीनों ही ऐसे सेनानी रहे, जो कभी सेना से रिटायर नहीं हुए.

छोड़-छोड़ आसा अकेले नाव खोल रे-आचार्य महेन्द्र शास्त्री

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आचार्य महेन्द्र शास्त्री 

भोजपुरी कविता (BHOJPURI KAVITA)

पिता: वैद्य लक्ष्मी पाण्डेय

जनम थान: रतनपुरा, सारन (सीवान), बिहार

जनम: 16 अप्रैल, सन् 1901 ई॰.

मरन: 31 दिसम्बर, सन् 1973 ई0.

शिक्षा: काशी विद्यापीठ से शास्त्री अउरी विशारद कऽ उपाधि,
काव्यतीर्थ, साहित्याचार्य आ दर्शनाचार्य कऽ उपाधि

पेशा: अध्यापन (संस्कृत विद्यालय आ महाविद्यालय), बिहार सांस्कृतिक विद्यापीठ के प्राचार्य

विविध: नामी स्वाधीनता-सेनानी

लेखन के विधा: हिन्दी, भोजपुरी आ संस्कृत में निबंध, व्यंग्य, कविता बिधा में लेखन

संपादन: भोजपुरी के पहिलकी पत्रिका ‘भोजपुरी’ 1947

भोजपुरी कविता-संग्रहः भकोलवा (1921), चोखा (1950), धोखा (1962)

हिन्दी-भोजपुरी कविता संग्रह: हिलोर (1928), आज की आवाज (1947)

हिन्दी कविता-संग्रह : छुआछूत, प्रदीप (1957)

संस्कृत के संपादित कृति: संस्कृत-सार (1929), संस्कृतामोद (1950), सूक्ति-संग्रह (1952)

 
 
 
छोड़-छोड़ आसा अकेले नाव खोल रे।
 
ऊ खूब नीमन गइला पर जननी
 
लगेला सुहावन सुदूर वाला ढोल रे-
 
अब-तक उनकर मुँह हम जोहनी
 
निमने भइल कि खुल गइल पोल रे-
 
काम का बदले बदला दीहल
 
लटकवला से टरकावल भल
 
ना सँपरे तब-साफ-साफ बोल रे-
 
दउड़वला से फल पइबे ?
 
काहे खातिर टालमटोल रे-
 
नाहक सबकर दुश्मन बन-बन
 
कहलइबे तें एक भकोल रे-
 
बेहोसी में व्यर्थ परीक्षा
 
नम्बर मिलजाई एगो गोल रे-
 
तब तें पोंछिये बनल रहबे
 
तब तोर कइसे होई मोल रे-
 
अबहूँ से आपन आदर कर
 
कठपुतरी बनकर मत डोल रे-
 
ठोकर-पर-ठोकर तें खइले
 
न मनले तब मिल गइल ओल रे-
आचार्य महेन्द्र शास्त्री
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