bashir badr

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    KABHI YU BHI AA-BASHIR BADRA

    कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो बशीर बद्र (BASHIR BADR) कभी यूँ भी आ मेरी आँख में के मेरी नज़र को ख़बर न हो मुझे एक रात नवाज़ दे मगर उसके बाद सहर न हो वो बड़ा रहीम-ओ-करीम है मुझे ये सिफ़तभी अताकरे तुझे भूलने की दुआ…

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    KABHI YUN MILE KOI -BASHIR BADR

    कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो   बशीर बद्र (BASHIR BADR ) कभी यूँ मिलें कोई मसलेहत, कोई ख़ौफ़ दिल में ज़रा न हो मुझे अपनी कोई ख़बर न हो, तुझे अपना कोई पता न हो वो फ़िराक़ हो या विसाल हो, तेरी याद महकेगी एक दिन वो ग़ुलाब बन के…