कविता

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    AA GAYE TUM – NIDHI SAXENA

    आ गए तुम(कविता ) निधि सक्सेना आ गए तुम!! द्वार खुला है अंदर आ जाओ.. पर तनिक ठहरो ड्योढी पर पड़े पायदान पर अपना अहं झाड़ आना.. मधुमालती लिपटी है मुंडेर से अपनी नाराज़गी वहीँ उड़ेल आना .. तुलसी के क्यारे में मन की चटकन चढ़ा आना.. अपनी व्यस्ततायें बाहर खूंटी पर ही टांग आना…

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    ADARSH PREM -HARIVANSH RAI BACHCHAN

    आदर्श प्रेम / हरिवंशराय बच्चन प्यार किसी को करना लेकिन कह कर उसे बताना क्या अपने को अर्पण करना पर और को अपनाना क्या गुण का ग्राहक बनना लेकिन गा कर उसे सुनाना क्या मन के कल्पित भावों से औरों को भ्रम में लाना क्या ले लेना सुगंध सुमनों की तोड उन्हे मुरझाना क्या प्रेम…

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    SHAKTI AUR KSHAMA -RAMDHARI SINGH DINAKAR

    शक्ति और क्षमा (कविता )  रामधारी सिंह “दिनकर” क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा? क्षमाशील हो रिपु-समक्ष तुम हुये विनत जितना ही दुष्ट कौरवों ने तुमको कायर समझा उतना ही। अत्याचार सहन करने का कुफल यही होता है पौरुष का आतंक मनुज कोमल होकर…