इक बार कहो तुम मेरी हो – इब्ने इंशा
इक बार कहो तुम मेरी हो इब्ने इंशा हम घूम चुके बस्ती-बन में इक आस का फाँस लिए मन में कोई साजन हो, कोई प्यारा हो कोई दीपक हो, कोई तारा हो जब जीवन-रात अंधेरी हो इक बार कहो तुम मेरी हो। जब सावन-बादल छाए हों जब फागुन फूल खिलाए हों जब चंदा रूप…
