गुनाहों का देवता (उपन्यास) – भाग 12
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 12 ”यहाँ बहुत रोशनी है! मुझे अपना अँधेरा कमरा ही अच्छा लगता है।” सुधा बोली। ”चलो बिनती, वहीं कार्ड ले चलो!” चन्दर ने कहा, ”आओ सुधा, आज कार्ड लिखते जाएँगे, तुमसे बात करते जाएँगे। जिंदगी देखो, सुधी! आज पन्द्रह दिन से तुमसे दो मिनट बैठकर बात…
