मुस्लिम लड़की को हुआ हिंदू से प्यार तो सियासत में आया भूचाल-सचिन पायलट और सारा की लव स्टोरी

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कश्मीर में इस शादी का हुआ था  काफी विरोध 

कहते हैं कि प्यार किसी की जात और मजहब नहीं देखता। पवित्र प्यार वह अनुभूति है जो हर किसी को ​अपने साथी के प्रति वफादार बना देता है। इतिहास गवाह है कि जमाना प्यार का दुश्मन रहा है लेकिन जब प्यार सच्चा हो तो वह इन सबकी परवाह नहीं करता और लोग इसे सलाम करते हैं।

फारूक अब्दुल्लाह की बेटी से हुआ इश्क
प्यार के नाम लिखी गई यह इबारत सचिन पायलट और सारा अब्दुल्लाह की लव स्टोरी पर हूबहू लागू होती है। 7 सितंबर 1977 को कांग्रेस के दिग्गज नेता राजेश पायलट के घर जन्मे सचिन पढ़ाई में बहुत अच्छे स्टूडेंट रहे हैं। आज सचिन भी कांग्रेस में बड़ा मुकाम हासिल कर चुके हैं। वहीं सारा अब्दुल्लाह कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्लाह की बेटी हैं। अब सारा अब्दुल्लाह सारा पायलट बन चुकी हैं क्योंकि उन्होंने सचिन को जीवनसाथी चुना।

कई लोगो ने किया था विरोध

सचिन और सारा की यह लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं लगती, क्योंकि इस शादी का काफी लोगों ने विरोध भी किया था। कई कट्टरपंथियोंं ने इस पर ऐतराज जताया था लेकिन इन दोनों ने साबित कर दिया कि सच्चा प्यार हर इम्तिहान के बाद और निखरकर सामने आता है।

विदेश में पढ़ाई के दौरान हुई थी मुलाकात

विदेश में पढ़ाई के दौरान सचिन और सारा मुलाकात हुई थी। बाद में दोनों ने शादी का फैसला किया। चूंकि वे दोनों ही चर्चित राजनीतिक परिवारों से हैं, इसलिए कई लोगों ने आशंका जाहिर की थी कि इस शादी का असर उनके राजनीतिक भविष्य पर पड़ सकता है।

कश्मीर में हुआ था शादी का विरोध

मगर सचिन और सारा की शादी ने परंपरागत समाज के कई मिथकों को तोड़ दिया। दोनों ने मजहब, राजनीति व रूढ़ियों को दरकिनार कर जनवरी 2004 में एक सादे समारोह में शादी कर ली। दूसरी ओर कश्मीर में इस शादी का काफी विरोध हुआ।

26 साल में बने सांसद

उसी साल लोकसभा चुनाव होने थे। उस समय सचिन की उम्र मात्र 26 साल थी। वे चुनावों में उतरे और जीत दर्ज की। इसके बाद सचिन राजनीति में तरक्की की सीढ़ियां चढ़ते गए। अब तक इस शादी को लेकर जो विरोध था, वह भी काफी कम हो गया। अब दोनों ही परिवार इस शादी को स्वीकार कर चुके हैं और सचिन व सारा अपनी जिंदगी में काफी खुश हैं।

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