CHHOTA JADOOGAR JAYSHANKAR PRASAD
छोटा जादूगर (कहानी ) जयशंकर प्रसाद उसके मुँह पर तिरस्कार की हँसी फूट पड़ी। उसने कहा, ”तमाशा देखने नहीं, दिखाने निकला हूँ। कुछ पैसे ले जाऊँगा, तो माँ को पथ्य दूँगा। मुझे शरबत न पिलाकर आपने मेरा खेल देखकर मुझे कुछ दे दिया होता, तो मुझे अधिक प्रसन्नता होती!” कार्निवल के मैदान में बिजली जगमगा रही थी। हँसी…
