जो नहीं हो सके पूर्ण-काम (कविता) – बाबा नागार्जुन
जो नहीं हो सके पूर्ण-काम प्रसिद्ध हिंदी कविता – बाबा नागार्जुन जो नहीं हो सके पूर्ण-काम मैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कुण्ठित और कुछ लक्ष्य-भ्रष्ट जिनके अभिमन्त्रित तीर हुए; रण की समाप्ति के पहले ही जो वीर रिक्त तूणीर हुए ! उनको प्रणाम ! जो छोटी-सी नैया लेकर उतरे करने को उदधि-पार; मन…
