गुनाहों का देवता (उपन्यास) – भाग 13
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 13 ”घर कितना सूना लग रहा है बिनती, तुम अकेले कैसे रहती होगी?” चन्दर ने कहा। बिनती की आँखों में आँसू छलछला आये। ”बिनती, रोती क्यों हो? छिह! मुझे देखो। मैं कैसे पत्थर बन गया हूँ। क्यों? तुम तो इतनी अच्छी लड़की हो।” चन्दर ने बिनती…
