गुनाहों का देवता (उपन्यास) – भाग 3
गुनाहों का देवता – धर्मवीर भारती भाग 3 ”वह घर आयी और बहुत बिगड़ी, बोली, ‘आप नाच रहे थे या टेनिस का मैच खेल रहे थे, मेरा हाथ था या टेनिस का रैकट?’ इस बात पर बर्टी भी बिगड़ गया, और उस दिन से जो इन लोगों में खटकी तो फिर कभी न बनी। धीरे-धीरे वह लड़की एक…
