रोने वाला ही गाता है – गोपालदास “नीरज” (Gopaldas Neeraj)
रोने वाला ही गाता है (कविता) – गोपालदास “नीरज”(Gopaldas Neeraj) रोने वाला ही गाता है ! मधु-विष हैं दोनों जीवन में दोनों मिलते जीवन-क्रम में पर विष पाने पर पहले मधु-मूल्य अरे, कुछ बढ़ जाता है। रोने वाला ही गाता है ! प्राणों की वर्त्तिका बनाकर ओढ़ तिमिर की काली चादर जलने वाला दीपक ही…
