MAHADEVI VERMA

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    AA GAYE TUM – NIDHI SAXENA

    आ गए तुम(कविता ) निधि सक्सेना आ गए तुम!! द्वार खुला है अंदर आ जाओ.. पर तनिक ठहरो ड्योढी पर पड़े पायदान पर अपना अहं झाड़ आना.. मधुमालती लिपटी है मुंडेर से अपनी नाराज़गी वहीँ उड़ेल आना .. तुलसी के क्यारे में मन की चटकन चढ़ा आना.. अपनी व्यस्ततायें बाहर खूंटी पर ही टांग आना…