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नारी – केदारनाथ मिश्र ” प्रभात “
नारी – केदारनाथ मिश्र ” प्रभात “ किसने देखी है ऐसी शक्ति विधानों में ऐसा आकर्षण मिला किसे उद्यानों में बरसे जैसा सौंदर्य तुम्हारी चितवन से तुम सचमुच हो देवार्ह दिव्य तन से, मन से | सुख में अनछुई किरण बन सदा झलकती हो दुःख मे कोमल आँसू की भांति छलकती हो वह…
