गुनाहों के देवता – उपन्यास – भाग 2
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 2 सिविल लाइन्स के एक उजाड़ हिस्से में एक पुराने-से बँगले के सामने आकर मोटर रुकी। बँगले का नाम था ‘रोजलान’ लेकिन सामने के कम्पाउंड में जंगली घास उग रही थी और गुलाब के फूलों के बजाय अहाते में मुरगी के पंख बिखरे पड़े थे। रास्ते पर भी घास…
