गुनाहों का देवता (उपन्यास) – भाग 14
गुनाहों के देवता – धर्मवीर भारती भाग 14 चन्दर ने मन में कहा, यह कुछ इस रहस्यमय बँगले का असर है कि हरेक का दिमाग खराब ही मालूम देता है। दो मिनट बाद जब बर्टी लौटा तो उसके गले में गुलबन्द, ऊनी स्वेटर, ऊनी मोजे थे। वह हाँफता हुआ आकर बैठ गया। ”मिस्टर…
